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क्या भारत में ईमानदारी की सजा मौत हो गई है

बेंगलूरू में आइएएस अफसर डीके रवि की मौत ने कई सवाल पैदा किये हैं। रवि की छवि एक ईमानदारी अधिकारी की थी। उनकी सख्ती की वजह से रेता और खनन माफिया के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई थीं। माना जा रहा है कि उनकी हत्या के पीछे भी माफिया का हाथ है। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश के मंजूनाथ और नरेंद्र कुमार सिंह समेत देश के कई राज्यों में ईमानदार अफसर अपनी जान गंवा चुके हैं। कुछ को अपनी ईमानदारी की वजह से दूसरी मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। जिस तरह से भारत में भ्रष्टाचार संस्थागत रूप लेता जा रहा है इसने ईमानदार और उसूल वाले लोगों का जीना दूभर कर दिया है।
क्या भारत में ईमानदारी की सजा मौत हो गई है

सवाल उठता है:

क्या भारत में ईमानदार होना अपनी जान को खतरे में डालना है?

भ्रष्ट और बेईमान लोगों के इतना शक्तिशाली होने की वजह क्या हैं?

अपराधियों को कौन संरक्षण देता है?

क्या भारत में कोई भी व्यवसाय ईमानदारी से संभव नहीं?

क्या यह सब क्रोनी कैपिटलिज्म के लक्षण हैं?

हम इन सारे सवालों पर अपने पाठकों की राय जानना चाहते है। आप अपनी विस्तृत राय नीचे लिखे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं।

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