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‘गायों के लिए एम्बुलेंस चलाने वाले झारखंड में आधार के बिना भूख से मर गई बच्ची’

झारखंड में आधार कार्ड ना होने की वजह से एक बच्ची की भूख से मौत के मामले ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। आजादी...
‘गायों के लिए एम्बुलेंस चलाने वाले झारखंड में आधार के बिना भूख से मर गई बच्ची’

झारखंड में आधार कार्ड ना होने की वजह से एक बच्ची की भूख से मौत के मामले ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। आजादी के इतने वर्षों बाद भूखमरी से किसी की मौत अपने आप में चिंताजनक है, ऐसे में डिजिटल इंडिया की ओर कदम बढ़ा रहे भारत में आधार कार्ड के बिना राशन नहीं मिलना भी बेहद खतरनाक मसला है। इसे लेकर जहां सूबे के मंत्री नौकरशाही पर आरोप लगा रहे हैं तो राज्य के अफसर भी घटना की लीपापोती में लगे हुए हैं। लेकिन इस बीच जनता के आक्रोश की बानगी बखूबी देखी जा सकती है।

सोशल मीडिया पर इस दर्दनाक घटना की चौतरफा निंदा की जा रही है। राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने ट्वीट कर कहा, “झारखंड के सिमडेगा में 11साल की बच्ची भूख से मर गयी क्योंकि परिवार को राशन नही मिला क्योंकि राशन कार्ड से आधार लिंक नही था, यही अच्छे दिन हैं?”

वहीं मोहम्मद तनवीर नाम के एक यूजर ने लिखा है, “झारखंड वही राज्य है जो गायों के लिए एबुलेंस सेवा चलाने में अग्रणी है और इसी राज्य में एक बच्ची भूख से "भात भात" कहते हुए मर गई, शर्मनाक।”

कुछ लोग प्रधानमंत्री के ‘न खाऊंगा ना खाने दूंगा’ जुमले के साथ इस मसले पर तंज कस रहे हैं। शिल्पी सिंह ने ट्वीट किया, “झारखंड में एक बच्ची भूख से मर गयी, किसको पता था कि मोदीजी "ना खाने दूंगा" को लेकर ज्यादा सीरियस रहेंगे।”


अल्ताफ खान अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखते हैं, “झारखंड के सिमडेगा में 18 वर्षीय संतोषी की भूख से मौत, विकास की कड़वी सच्चाई है। भाषणों तक सीमित विकास की भागदौड़ में हम इंसानियत भूल गए।”

गौरतलब है कि झारखंड सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड की पतिअंबा पंचायत के गांव कारीमाटी में रहने वाली 11 साल की एक बच्ची संतोषी कुमारी की भूख से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि संतोषी कुमारी नाम की इस लड़की ने 8 दिन से खाना नहीं खाया था जिसके चलते बीते 28 सितंबर को भूख से तड़पते हुए उसने दम तोड़ दिया।

 

 

 

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