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एबेकस तकनीकी से तीन हजार बच्चों ने चुटकियों में सवालों का निकाला हल

क्या कोई बच्चा गणित का कठिन से कठिन सवाल तीन मिनट में हल कर सकता है। जवाब हां भी हो सकता है लेकिन 120 सवालों के जवाब अगर तीन मिनट में हल करना हो तो यह कैसे संभव है। लेकिन एबेकस तकनीकी के जरिए एक, दो या तीन बच्चें नहीं बल्कि तीन हजार बच्चों ने जब एक साथ सवालों के जवाब हल करना शुरू किया तो सभी ने दांतों तले उंगली दबा ली।
एबेकस तकनीकी से तीन हजार बच्चों ने चुटकियों में सवालों का निकाला हल

नोएडा के एक्सपो सेंटर में एसआईपी अकादमी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जब बच्चों ने एबेकस तकनीकी के जरिए सवालों को हल किया तो सभी हैरान रह गए। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रामशंकर कठेरिया इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। एबेकस का इस्तेमाल पूरी दुनिया में व्यवसाय के लिए किया जाता था, जो लकड़ी की स्लेट के आकार में होता था। इसमें पाच तार होते थे, जिसमें मोती पिरोई जाते थे। इसका इस्तेमाल व्यवयास में पैसों को गुणा और जोड़- घटाने के लिए किया जाता था। एबकेस का इस्तेमाल बैंक तक में भी किया जाता था। वहीं, नई तकनीकी के आने के बाद इसका इस्तेमाल बच्चों के खिलौने के रूप में होने लगा, जिससे वे गणित के सवालों को सॉल्व करते थे।

 एसआईपी ने लिम्का बुक रिकॉर्ड में अब तक चार बार 2005,2007, 2010 और 2011 में अपना नाम दर्ज किया है। इतना ही नहीं वर्ल्ड वाइड अचीवर अवॉर्ड में इसने भारत में बेस्ट कोचिंग का भी खिताब हासिल किया है, जो बच्चों को स्किल को बढ़ाने में सफल साबित हुआ है। बच्चों को ट्रेंड करने के लिए एबेकस, ब्रेन जिम और स्पीड राईटिंग के जरिए बच्चों को नंबरों के साथ एन्जवॉय करना सिखाया जाता है। क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बच्चों को अलग-अलग खैल और पजल के जरिए समझाया जाता है ताकि वह गणित और उनके नंबरों से डरे नहीं बल्कि मजे से सॉल्व करें। बच्चों को इस क्षमता को बढ़ाने का मकसद है उनका समय बचाना ताकि वह और भी चीजों में भाग ले सकें। बच्चों की इस स्किल क्षमता बढ़ाने वाले कंपीटीशन में 7 से 12 वर्ष के बच्चे भाग लेते हैं, जिन्हें बड़े ही कम पैसों में यह स्किल सिखाई जाती है।

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