फैन आधार और मुख्यधारा की पार्टियों से मोहभंग के सहारे एक्टर विजय की टीवीके तमिलनाडु में राजनैतिक पालाबदल की कोशिश में
झक सफेद कमीज और हल्के भूरे रंग की पैंट पहने सी. जोसेफ विजय 13 फरवरी 2026 को सेलम में चहलकदमी करते हुए मंच पर आते हैं। अब वे महज फिल्मी एक्टर नहीं, बल्कि तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के अध्यक्ष हैं। पृठभूमि में, “उंगा विजय, उंगा विजय” का नारा गूंज रहा है और भीड़ चीखने-चिल्लाने लगती है। वे भाषण शुरू करते हैं, “सिर्फ एक ही इंसान हर हारी-मारी में आपके साथ खड़ा रहेगा, वह है विजय। मुझे उम्मीद है कि मैं तमिलनाडु का संकटमोचन बनूंगा। आज, यह विजय, आपका विजय, आपसे सिर्फ वोट मांगने नहीं आया है। मैं इंसाफ मांगने आया हूं। मैं आपके लिए इंसाफ मांगने के लिए राजनीति में आया हूं।”
विजय ने कॉलीवुड में 1992 में 18 साल की उम्र में फिल्म नालया थीरपु में मुख्य भूमिका से शुरुआत की थी। डायरेक्टर उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर थे। उसके बाद 1996 से 2000 के बीच पूवे उनक्कागा, काधलुक्कु मरियाधई, नाएरुक्कु नाएर, थुल्लाधा मनमुम थुल्लुम और कुशी जैसी फिल्मों से अपना झंडा लहराया। थिरुमलाई, घिल्ली और पोक्किरी जैसी फिल्मों से उनकी लोकप्रियता बुलंदी पर पहुंची।
चर्चित अखबार हिंदू के पूर्व प्रधान संपादक तथा हिंदू पब्लिशिंग ग्रुप के डायरेक्टर एन. राम कहते हैं, ‘‘मैंने सुना है कि विजय कई साल से अपनी स्टार अपील के दम पर राजनैतिक पार्टी शुरू करने की सोच रहे थे। मुझे लगता है कि उनके आस-पास के लोगों ने उन्हें समझाया किया कि यह सही समय है, क्योंकि अन्नाद्रमुक के ढहने से जगह बन रही है।’’
सेलम में विजय टीवीके को द्रविड़ राजनीति का ही विस्तार बताते हैं। वे सी.एन. अन्नादुरै के नेतृत्व में द्रमुक की 1967 की जीत और एम.जी. रामचंद्रन के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक की 1977 की जीत का जिक्र करते हैं, और कहते हैं कि दोनों ने तमिलनाडु की राजनीति को नया रूप दिया और युवाओं की भागीदारी बढ़ाई।
पार्टी की विचारधारा की दिशा अक्टूबर 2024 में पहले राज्य-स्तरीय सम्मेलन में तय की गई थी। तब उन्होंने पेरियार, डॉ. आंबेडकर, के. कामराज, वेलु नाचियार (शिवगंगा की रानी जिन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ युद्ध छेड़ा था) और अंजलाई अम्मल (स्वतंत्रता सेनानी) को अपना मार्गदर्शक बताया था। उसी कार्यक्रम में उन्होंने द्रमुक को टीवीके का राजनैतिक विरोधी और भाजपा को विचारधारा विरोधी बताया था।
इसके साथ एक विवाद भी उभर आया है। चुनाव आयोग ने 22 जनवरी 2026 को टीवीके को चुनाव चिन्ह सीटी आवंटित किया, जो पहले 2019 के लोकसभा चुनावों में एक्टर प्रकाश राज और दिवंगत कॉमेडियन मायिलसामी की पार्टी को मिला था। टीवीके से विवाद शुरू से ही जुड़ गया। 27 सितंबर 2025 को मध्य तमिलनाडु के करूर में टीवीके की रैली में मची भगदड़ में कम से कम 41 लोगों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। राज्य में ऐसी घटना से मातम छा गया था।
तब शुरुआती ट्वीट के बाद उनका पहला वीडियो मैसेज तीन दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने पछतावा तो जाहिर किया, लेकिन यह मानने से इनकार किया कि हादसे के लिए उनकी कोई जवाबदेही है। टीवीके ने कोई जिम्मेदारी नहीं ली और सत्ताधारी द्रमुक और पुलिस को दोषी ठहराया। उससे उनकी छवि पर छींटे तो पड़े, लेकिन विजय के आस-पास पुरानी पार्टी छोड़ चुके या माहभंग के शिकार लोगों का जमावड़ा है। पुदुच्चेरी के पूर्व एमएलए एन. आनंद उर्फ बुस्सी आनंद पार्टी के महासचिव हैं और विजय फैन क्लब को सियासी रूप देने में लगे हैं। अन्नाद्रमुक के पुराने नेता के.ए. सेंगोट्टैयन नवंबर 2025 में मुख्य संयोजक बने और वे कोयंबत्तूर, इरोड, तिरुप्पुर और नीलगिरी जिलों के प्रभारी संगठन सचिव हैं।
इसी तरह द्रमुक, मद्रमुक और अन्नाद्रमुक में रह चुके अनुभवी वक्ता नंजिल संपत दिसंबर 2025 में शमिल हुए। वीसीके के पूर्व सदस्य आधव अर्जुन प्रचार प्रभारी महासचिव बने, जबकि अन्नाद्रमुक में आइटी शाखा के प्रमुख रहे सीटीआर निर्मल कुमार सोशल मीडिया के प्रभारी बनाए गए। द्रमुक के पूर्व विधायक एस. डेविड सेल्विन ने स्थानीय संगठन का काम संभाला।
विजय की संभावनाओं को पहले से राजनीति में उतरने वाले एक्टरों की पार्टियों के बरक्स आंका जा रहा है। 2005 में विजयकांत की डीएमडीके को 2006 के विधानसभा चुनावों में करीब 8.5 प्रतिशत और 2009 के लोकसभा चुनाव में 10.5 प्रतिशत वोट मिले थे। तब उसे अन्नाद्रमुक का खेल बिगाड़ने वाला माना गया। लेकिन 2011 में उनका अन्नाद्रमुक से गठजोड़ हो गया और वह 40 सीटें लड़कर 29 सीटें जीत गई। लेकिन 2016 में वह 2.4 प्रतिशत वोट प्रतिशत से मुंह के बल आ गिरी।
एन. राम की राय में विजय का चुनाव में उतरना तो अहम है लेकिन शायद खास फर्क न डाल पाए। वे कहते हैं, “वे भीड़ खींच रहे हैं, लेकिन क्या यह भीड़ वोटों में बदलेगी? और क्या वोट सीटों में बदलेंगे?” उनका कहना है कि विजय के पास मजबूत राजनैतिक ढांचे की कमी है। द्रमुक की ताकत लंबे समय से हर स्तर पर प्रशिक्षित काडर है। वे यह भी कहते हैं कि अन्नाद्रमुक के वोटर आज भी एमजीआर और जयललिता के प्रति ही वफादार है।
राम कहते हैं कि एमजीआर ने अपनी पार्टी बनाने से पहले द्रमुक में अपनी सोच को बेहतर बनाया, जबकि एन.टी. रामा राव ने अपनी पार्टी शुरू करने से पहले राजनैतिक समझदारी दिखाई थी। विजयकांत कम सफलता के बावजूद “ज्यादा गंभीर राजनैतिक हस्ती थे।” उन्होंने लगातार चुनाव लड़ा, अपने विचार रखे और इकाई अंक के वोट शेयर के साथ भी सम्मान हासिल किया। राम चेतावनी देते हैं कि सिर्फ बड़ी रैलियां वोट में नहीं बदलतीं। विजय को भाषणों में अपनी जिक्र से आगे बढ़कर सामूहिक नेतृत्व, स्पष्ट नीतियों और वाजिब घोषणा-पत्र की बात करनी होगी। वे ऐसा कर पाते हैं या नहीं, यह “देखना बाकी है।”
विजय का समर्थन आधार, असल में, फैन क्लब है, लेकिन यह अलग-अलग इलाकों और खासकर युवाओं में है। दिक्कत यह भी है कि विजय के राजनैतिक जुड़ाव बदलते रहे हैं। अगस्त 2011 में यूपीए राज के दौरान वे इंडिया अगेंस्ट करप्शन के प्रदर्शन में जंतर-मंतर पर अन्ना हजारे से मिले थे। उसी साल वे और उनके पिता अन्नाद्रमुक की महासचिव जे. जयललिता से मिले, और विजय मक्कल इयक्कम को समर्थन देने की पेशकश की। 2010 में वे राहुल गांधी से मिले जब द्रमुक यूपीए का हिस्सा थी। तब उस मुलाकात को द्रमुक ने अच्छी नजर से नहीं देखा था। अप्रैल 2014 में वे कोयंबत्तूर में नरेंद्र मोदी से मिले। 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान वे साइकिल से अपने पोलिंग बूथ तक गए। उसे द्रमुक के लिए समर्थन के तौर पर देखा गया।
इसलिए विजय को लेकर लोगों में कई तरह की दुविधाएं हैं। वरिष्ठ पत्रकार कोलाहल श्रीनिवास का कहना है कि टीवीके के लगभग सभी समर्थक विजय के फैन हैं, और उन्हें शक है कि इसके अलावा उन्हें कहीं से समर्थन मिलेगा। उनके कोलाहलस टीवी ने सर्वे के जरिए विजय के समर्थन आधार को आंकने की कोशिश की। पहला सर्वे मई 2025 में और दूसरा इस साल की शुरुआत में किया गया था। वे कहते हैं, “इन सर्वे मे पूरे राज्य में शहरी-ग्रामीण बंटवारा साफ दिखता है। उत्तरी चेन्नै में बहुत कम समर्थन दिखता है। विल्लुपुरम जैसे इलाकों में टीवीके को ज्यादा समर्थन दिखता है, जिससे पता चलता है कि पार्टी का आधार कुछ शहरी और कस्बाई इलाकों में ही है।”
विजय के प्रचार अभियान को ताकत 9 जनवरी को जन नायकन की रिलीज के साथ मिलना था। यह चतुर रणनीति थी क्योंकि लोग विजय को देखने और उनकी बातें सुनने के लिए पैसे देते। हालांकि, रिलीज अप्रैल के आखिर तक रोक दी गई है।
प्रोड्यूसर को 22 दिसंबर 2025 को बताया गया कि समीक्षा समिति ने कुछ बदलावों के साथ यू/ए 16+ सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की है। प्रोड्यूसर मान गए। उसके बाद, प्रोडक्शन हाउस को बताया गया कि फिल्म की समीक्षा के लिए दूसरी कमिटी को भेज दिया गया है।
प्रोडक्शन हाउस ने एक रिट याचिका के जरिए मद्रास हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और पक्ष में आदेश हासिल किया। हालांकि, सीबीएफसी ने अपील की और स्टे हासिल कर लिया, और सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में दखल देने से मना कर दिया। उसके बाद, एक खंड पीठ ने नई सुनवाई का निर्देश दिया, जिसके बाद प्रोडक्शन हाउस केस आगे न बढ़ाने का फैसला किया और समीक्षा के लिए राजी हो गया।
यह अदालत में लड़ी जा रही सियासी लड़ाई थी, जिसे भाजपा के दबाव के तौर पर देखा गया, ताकि गठजोड़ करने को मजबूर किया जा सके। विजय की टीम इसके लिए तैयार नहीं लग रही थी। विजय के फैन उनके अगले कदम और फिल्म का इंतजार कर रहे हैं।