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खट्टर सरकार पर पूर्व सीएम हुड्डा का हमला, ये जनसरोकारों की नहीं सिर्फ सर्वे और सर्विलांस की सरकार; किसानों को लेकर कही बड़ी बात

चंडीगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि बीजेपी-जेजेपी...
खट्टर सरकार पर पूर्व सीएम हुड्डा का हमला, ये जनसरोकारों की नहीं सिर्फ सर्वे और सर्विलांस की सरकार; किसानों को लेकर कही बड़ी बात

चंडीगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि बीजेपी-जेजेपी जनसरोकार की नहीं बल्कि सर्वे और सर्विलांस की सरकार है। गठबंधन सिर्फ इवेंटबाजी और विज्ञापन के जरिए सरकार चलाना चाहता है, जो संभव नहीं है। मौजूदा सरकार की कुनीतियों से हर वर्ग प्रताड़ित है। यह सरकार किसानों के अधिकारों पर लगातार कुठाराघात करने में लगी है। इसी के तरह मॉनसून सत्र में भूमि अधिग्रहण बिल लाया गया। इसके तहत कांग्रेस सरकार के दौरान बनाए गए कानून से किसानहित के प्रावधानों को समाप्त कर दिया गया। नए कानून का मकसद बिना सहमति किसानों की जमीन को पूंजीपतियों के हवाले करना है। सरकार ने अब 70 प्रतिशत किसानों की सहमति, सेक्शन-4, सेक्शन-6 के नोटिस करने और जमीन के बदले मुआवजे के साथ रिहायशी प्लॉट देने जैसे तमाम नियमों को समाप्त कर दिया है। अब कोई भी क्लेक्टर बिना किसानों की सहमति रातोंरात उनकी जमीन का अधिग्रहण कर सकता है।

हुड्डा ने कहा कि सिर्फ किसान ही नहीं प्रदेशहित के प्रति गठबंधन सरकार रवैया हमेशा उदासीन रहा है। इसके चलते पहली बार ऐसा हुआ है कि पिछले एक साल से भाखड़ा मैनेजमेंट बोर्ड में हरियाणा का कोई भी सदस्य नहीं है। अगर बोर्ड में हमारा कोई नुमाइंदा ही नहीं होगा तो हरियाणा को उसका हक कैसे मिलेगा और हरियाणा के हिस्से की नौकरियों का क्या होगा?

नेता प्रतिपक्ष ने आज अपने आवास पर पत्रकार को संबोधित कहा कि गठबंधन सरकार में मानवीय संवेदना का संपूर्ण अभाव है, जो इसकी कार्यशैली से स्पष्ट दिखाई देता है। कोरोना काल में लोगों ने जो भुगता है, उसे कोई भूल नहीं सकता। ऑक्सीजन, दवाई, अस्पतालों में बिस्तर, डॉक्टर्स की कमी में हजारों जानें गई। संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है कि सरकारी झूठ से उस सच्चाई को ढकने की कोशिश की जा रही है, जिसे हरियाणा का बच्चा-बच्चा जानता है। ऑक्सीजन की कमी से मौतों की सच्चाई को नकारकर सरकार ने प्रदेश की जनता, सदन और केंद्र सरकार सभी को गुमराह किया है।

हुड्डा ने कहा कि पेपर लीक होना इस सरकार में की परंपरा है। एचपीएससी और एचएसएससी सरकारी नौकरियों की दुकान बन गई हैं। पेपर लीक मामले में कुछ लोग पुलवामा से पकड़े गए हैं। यानी यह अब अंतर-राज्यीय मामला बन गया है। इसलिए इसकी सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच जरूरी है। इस संदर्भ में विपक्ष की नहीं तो सरकार को कम से कम अपने गृह मंत्री की बात मान लेनी चाहिए।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए हुड्डा ने एकबार फिर बेरोजगारी को लेकर सीएमआईई के आंकड़ों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा में बेरोजगारी की तस्वीर बयां करने वाले आंकड़ों पर सरकार दोहरा रवैया अपना रही है। डिप्टी सीएम खुद विपक्ष मे रहते हुए इसी संस्था के आकड़ों को सही बताते हुए ट्वीट किया करते थे। आज सरकार उसी संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है। लेकिन सिर्फ सीएमआईई ही नहीं, बल्कि नीति आयोग और तमाम रिपोर्ट्स से स्पष्ट हो चुका है कि जो हरियाणा कांग्रेस सरकार के दौरान रोजगार सृजन, प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति निवेश, खुशहाली और विकास में पहले पायदान पर था, वह आज बेरोजगारी, नशे, अपराध, घोटाले और प्रदूषण में नंबर एक हो चुका है।

हुड्डा ने एकबार फिर ऑलंपिक पदक विजेताओं को डीएसपी नियुक्त करने और नीरज चोपड़ा को सेना में ऑनरेरी कर्नल बनाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वो सिर्फ नेता प्रतिपक्ष के तौर पर यह मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि अपनी सरकार के दौरान खुद ऐसा कर चुके हैं। कांग्रेस सरकार के दौरान पदक लाओ, पद पाओ नीति के तहत 18 खिलाड़ियों को डीएसपी और 500 से ज्यादा खिलाड़ियों को इंस्पेक्टर व अन्य पदों पर नियुक्ति दी गई थी। उनकी सरकार के दौरान खिलाड़ियों को पद, पैसा और प्रतिष्ठा सब दिया जाता था। उसी नीति का नतीजा है कि हरियाणा खेलों के हब के रूप में विश्वस्तर पर जाना जाने लगा और ऑलंपिक खेलों में भारत का प्रदर्शन सुधरा। हुड्डा ने कहा कि अगर मणिपुर की सरकार मीराबाई चानू को एडिशनल एसपी बना सकता है तो हरियाणा सरकार अपने पदक विजेताओं को डीएसपी क्यों नहीं बना सकती।

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