भाकपा (माले-लिबरेशन) ने 2020 में 12 सीटें जीती थीं, उसे केवल दो सीटें मिलीं
महागठबंधन के प्रमुख घटक वाम दलों की सीटें 2020 में 16 से घटकर इस बार सिर्फ 3 रह गई हैं। नेताओं का कहना है कि ये नतीजे 2020 और 2024 के चुनावों में उनके मजबूत प्रदर्शन के मद्देनजर जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। चार वामपंथी उम्मीदवार मामूली अंतर से हारे, लेकिन उनके लगभग आधे उम्मीदवार 20,000 से ज्यादा मतों से हारे।
भाकपा (माले-लिबरेशन) ने 2020 में 12 सीटें जीती थीं, उसे केवल दो सीटें मिलीं। भाकपा(माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने नतीजों को ‘‘अस्वाभाविक और समझ से परे’’ बताया। उन्होंने कहा कि वामपंथी पार्टियों और महागठबंधन का प्रदर्शन 2010 के बिहार चुनाव जैसा ही था, जबकि हालात काफी अलग थे। उनके अनुसार, 2010 नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री के रूप में शुरुआती साल थे और लोगों का उन पर अटूट विश्वास समझा और समझाया जा सकता था।
भट्टाचार्य ने आउटलुक से कहा, ‘‘इस बार, 2020 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में हमारे प्रदर्शन के मद्देनजर नतीजे पूरी तरह से विपरीत आए और जमीनी स्तर पर जो दिख रहा है, उससे मेल नहीं खाते। हमें गहन समीक्षा और जांच-पड़ताल करने की जरूरत है।’’
पार्टी ने 2024 में दो लोकसभा सीटें जीतीं, जो उसका सर्वश्रेष्ठ चुनावी प्रदर्शन था। लगभग डेढ़ साल में ही पार्टी सदमे में आ गई। इस बार संदीप सौरभ 6,655 मतों के अंतर से अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे और काराकाट विधायक अरुण सिंह 2,836 मतों से जीते। कुछ सीटों पर मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा। भोजपुर में सिर्फ 95 मतों से, डुमरांव में 2,105 मतों से और जीरादेई में 2,139 मतों से हार का सामना करना पड़ा।
बलरामपुर में महागठबंधन और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के बीच मुस्लिम वोटों का भारी बंटवारा हुआ, नतीजतन वरिष्ठ वामपंथी विधायक महबूब आलम हार गए, जो अपनी सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं।
हालांकि, ज्यादातर मामलों में, अंतर काफी ज्यादा रहा। दरौली में भाकपा (माले) के वरिष्ठ तथा मौजूदा विधायक सत्यदेव राम 9,572 मतों से हार गए। भोजपुर जिले में तरारी लंबे समय से लिबरेशन का गढ़ रहा है। वहां वरिष्ठ वामपंथी मदन सिंह 11,464 मतों से हार गए। काराकाट जिले के अरवल में पार्टी के दिग्गज नेता महानंद सिंह 14,209 वोटों से हार गए। घोसी प्रत्याशी 11239 वोटों से हारे।
दीघा, राजगीर, कल्याणपुर और सिकटा में पार्टी क्रमशः 59,079 वोट, 52,383 वोट, 38,586 वोट, 37,816 वोट के भारी अंतर से हार गई। वारिसनगर, फुलबारी, पिपरा और आरा उम्मीदवारों की भी 20,000 से अधिक वोटों के अंतर से हार तय थी।
भोरे में भाकपा (माले) के उम्मीदवार जितेंद्र पासवान को उनकी उम्मीदवारी की घोषणा के तुरंत बाद एक दशक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। पार्टी ने तुरंत एक छात्र नेता को नया उम्मीदवार घोषित कर दिया और उम्मीद जताई कि पार्टी को मतदाताओं की सहानुभूति मिलेगी क्योंकि उसके मूल उम्मीदवार को ‘परेशान’ किया गया था। हालांकि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) ने 16,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से यह सीट बरकरार रखी। राजद और कांग्रेस के साथ महागठबंधन ने ही 2020 में पार्टी को चुनावी बढ़त दिलाई थी, अब उसका भी वही हश्र हो रहा है जो उनके गठबंधन सहयोगियों का हुआ।