केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करने और सुरक्षा कर्मियों के साथ बातचीत करने के लिए 7-8 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर का दौरा करेंगे। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उल्लेखनीय है कि जम्मू प्रांत में विगत कुछ वर्षों के दौरान आतंकी गतिविधियों में तेजी आई है। आतंकियों ने अब जम्मू प्रांत में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ की रणनीति अपनाई है। हाल ही में, जिला कठुआ के हीरानगर में आतंकियों के एक दल ने घुसपैठ की थी।
इसके बाद, 27 मार्च को सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें तीन पुलिसकर्मी वीरगति को प्राप्त हो गए, जबकि दो आतंकी ढेर कर दिए गए। हालांकि, अन्य आतंकी भागने में सफल रहे, जिन्हें पकड़ने के लिए सुरक्षाबलों का अभियान जारी है।
इस पृष्ठभूमि में अमित शाह की यात्रा और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। अपनी यात्रा के दौरान, शाह जम्मू-कश्मीर में कानून एवं व्यवस्था की वर्तमान स्थिति का आकलन करने के लिए एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
बैठक में जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। चर्चा में आतंकवाद विरोधी अभियानों, सीमा पार से घुसपैठ के प्रयासों और जम्मू-कश्मीर के समग्र सुरक्षा परिदृश्य पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
समीक्षा बैठक के अलावा, गृह मंत्री अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अग्रिम इलाकों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करेंगे और वहां तैनात सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाएंगे।
यह यात्रा आतंकवाद से निपटने और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के सरकार के प्रयासों का हिस्सा है। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से सरकार ने आतंकवाद विरोधी अभियानों को तेज किया है और क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और विकास को बढ़ावा देने के लिए कई पहल शुरू की हैं। शाह की यह यात्रा इन प्रयासों की अगली कड़ी के रूप में देखी जा रही है।
गृह मंत्री की पिछली जम्मू-कश्मीर यात्रा अक्टूबर 2022 में हुई थी, जब उन्होंने कई विकास परियोजनाओं की घोषणा की थी और क्षेत्र में शांति व स्थिरता लाने के सरकार के संकल्प को दोहराया था।
इसके अलावा, हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान भी शाह जम्मू आए थे। सितंबर 2024 में उन्होंने यहां भाजपा के चुनाव अभियान की शुरुआत की थी। अपने दौरे के दौरान, उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और सार्वजनिक रैलियों को संबोधित किया और भाजपा की विकास व सुरक्षा की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया था।
उन्होंने विपक्षी दलों, विशेषकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और कांग्रेस पर राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया था। शाह ने स्पष्ट किया था कि केंद्र सरकार चुनाव के बाद उचित समय पर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करेगी।
अब, कठुआ एनकाउंटर और बढ़ती आतंकी गतिविधियों के बीच अमित शाह की यह यात्रा जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने के लिहाज से अहम मानी जा रही है।