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लोकसभा में बोले अमित शाह, 'हम मणिपुर पर चर्चा के लिए तैयार, सच देश के सामने आना चाहिए'

मणिपुर हिंसा और विशेष तौर पर दो महिलाओं को आदमियों के समूह द्वारा निर्वस्त्र घुमाए जाने को लेकर बढ़ी...
लोकसभा में बोले अमित शाह, 'हम मणिपुर पर चर्चा के लिए तैयार, सच देश के सामने आना चाहिए'

मणिपुर हिंसा और विशेष तौर पर दो महिलाओं को आदमियों के समूह द्वारा निर्वस्त्र घुमाए जाने को लेकर बढ़ी गहमा गहमी अभी थमी नहीं है। विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच दोनों सदनों में इस विषय पर चर्चा नहीं हो सकी है। अब गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह चर्चा के लिए तैयार हैं लेकिन उन्हें हैरानी है कि आखिर विपक्ष इसके लिए तैयार क्यों नहीं।

लोक सभा में संक्षिप्त बात करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी नेताओं से चर्चा होने देने की मांग की और कहा कि यह ज़रूरी है कि मणिपुर मुद्दे पर सच्चाई जनता के सामने आए। मणिपुर मुद्दे पर पहले तीन बार के स्थगन के बाद दोपहर 2.30 बजे जैसे ही सदन दोबारा शुरू हुआ, शाह ने कहा कि सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के नेता इस पर चर्चा करना चाहते थे।

उन्होंने आगे कहा, "मैं बात करने के लिए तैयार हूं। मैं विपक्ष से भी यही अपील करता हूं। इस संवेदनशील मुद्दे पर सच जनता के सामने आना चाहिए।" बता दें कि विपक्षी सदस्यों ने प्रधानमंत्री के बयान की मांग करते हुए अपना विरोध जारी रखा, तो अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी। यह कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, "हमारी संघीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद, विधानसभाओं, केंद्र और राज्य सरकारों की संवैधानिक जिम्मेदारियां तय हैं। कुछ 'पूर्वाग्रही लोग और राजनीतिक खिलाड़ी' देश को बदनाम करने की हताशा में 'शरारती मानसिकता वाले जघन्य अपराध' पर भी राजनीति कर रहे हैं। 'हिट एंड रन' दृष्टिकोण के पेशेवर खिलाड़ी संवेदनशील मुद्दों पर संसद में बहस और चर्चा नहीं चाहते हैं। वे सड़कों पर सिर्फ हंगामा और हंगामा चाहते हैं।"

उधर, केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा, "यह स्पष्ट है कि कांग्रेस और उसके मिश्रित समर्थक राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं और मणिपुर में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति का राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं। वे राजनीतिक अंक अर्जित करना चाहते हैं।"

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पीएम से बयान की मांग की और कहा, "प्रधानमंत्री संसद के प्रति जवाबदेह हैं। दुनिया में ऐसा कोई संसदीय लोकतंत्र नहीं है, जिसमें संसद को प्रधानमंत्री से मिलने, सवाल करने और सुनने का मौका न मिलता हो। यह एक विचित्र स्थिति है जो उन्होंने अपनाई है।"

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, "विपक्ष मणिपुर पर चर्चा चाहता था और सरकार इस पर सहमत थी। अब, अगर इस मुद्दे (महिलाओं के खिलाफ अत्याचार) पर समग्रता से चर्चा की जाती है तो उन्हें क्या समस्या है?"

गौरतलब है कि अबतक मणिपुर मुद्दे पर विपक्ष और सरकार के बीच गतिरोध के बीच लोकसभा और राज्यसभा, दोनों मानसून सत्र के दौरान कोई महत्वपूर्ण कामकाज करने में विफल रहे हैं।

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