Advertisement

Search Result : "जेएनयू छात्रासंघ अध्यक्ष"

मनोहर बने बीसीसीआई अध्यक्ष, क्रिकेट में लाएंगे लोकपाल

मनोहर बने बीसीसीआई अध्यक्ष, क्रिकेट में लाएंगे लोकपाल

वकील से प्रशासक बने शशांक मनोहर को भारतीय क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई का निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिया गया। इसी के साथ बीसीसीआई में नए युग की शुरूआत हुई और एन श्रीनिवासन का इस धनाढ्य खेल संस्था पर से दबदबा समाप्त हो गया।
बीसीसीआई अध्यक्ष का चयन 4 को, मनोहर पर मुहर तय

बीसीसीआई अध्यक्ष का चयन 4 को, मनोहर पर मुहर तय

बीसीसीआई ने अपने नए अध्यक्ष के चयन के लिए 4 अक्तूबर को आमसभा की विशेष बैठक बुलाई है जिसमें नागपुर के वकील शशांक मनोहर सभी की पसंद के उम्मीदवार के रूप में उभरे हैं।
क्‍यों कुलपति बनने के काबिल नहीं हैं सुब्रह़मण्यम स्वामी?

क्‍यों कुलपति बनने के काबिल नहीं हैं सुब्रह़मण्यम स्वामी?

सुब्रह़मण्यम स्वामी को जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद़यालय का कुलपति बनाने की चर्चा इतनी तेजी से शुरू हुई कि प्रायः हर किसी ने इसे सच मान लिया। अकादमिक दुनिया कान लगाकर आहट सुनने लगी। इस पर मीडिया माध्यमों से लेकर बौद्ध‍िक तबके में विमर्श का दौर शुरू हो गया और सुब्रह़मण्यम स्वामी की टिप्पणियां भी सामने आ गई। उन्होंने अपनी योजनाएं भी बता दीं कि वे जेएनयू में किस प्रकार नक्सलियों और ड्रग्स के शिकार लोगों को काबू में करेंगे। यह अपेक्षा भी जता दी कि सरकार उन्हें खुली छूट दे तो वे काम करने को तैयार हैं।
'यह जेएनयू और स्वामी दोनों को प्रताड़ित करने जैसा होगा'

'यह जेएनयू और स्वामी दोनों को प्रताड़ित करने जैसा होगा'

अर्थशास्त्री, लेखक, प्रोफेसर, वरिष्ठ वकील और भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति बनाए जाने की संभावनाओं पर दिन भर सोशल मीडिया पर तीखी बहस जारी रही। मीडिया में आई खबरों के अनुसार मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने इसके लिए स्वामी का नाम प्रस्तावित किया है। हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। इसमें कितनी सच्चाई है यह भी नहीं पता लेकिन दिनभर इसपर तीखी प्रतिक्रियाएं आती रहीं-
बीसीसीआई अध्यक्ष पर फंसा पेंच, पूर्व क्षेत्र अलग से मैदान में

बीसीसीआई अध्यक्ष पर फंसा पेंच, पूर्व क्षेत्र अलग से मैदान में

अनुभवी प्रशासक जगमोहन डालमिया के निधन ने बीसीसीआई को विभाजित कर दिया गया है। पूर्व क्षेत्र की इकाइयों ने अपना स्वयं का उम्मीदवार खड़ा करने का फैसला किया है जिससे उत्तराधिकार की लड़ाई में नया मोड़ आ गया है।
डालमिया के बाद आसान नहीं बीसीसीआई अध्यक्ष का चयन

डालमिया के बाद आसान नहीं बीसीसीआई अध्यक्ष का चयन

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष जगमोहन डालमिया के निधन के बाद नए अध्यक्ष के चयन की अटकलें तेज हो गई हैं। बोर्ड के लिए हालांकि नए अध्यक्ष का चुनाव आसान तो नहीं होगा, लेकिन इस पद के लिए राजीव शुक्ला, गौतम राय और दिल्ली के सी. के. खन्ना के नाम को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।
पाक सीनेट अध्यक्ष ने सैन्य तख्तापलट को लेकर दी चेतावनी

पाक सीनेट अध्यक्ष ने सैन्य तख्तापलट को लेकर दी चेतावनी

पाकिस्तान के सीनेट अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि सेना ने अगर फिर से तख्ता पलट करने की कोशिश की तो उसे संवैधानिक तरीके से रोका जाएगा। पाकिस्तान में सेना द्वारा तख्ता पलट किए जाने की कई घटनाएं हो चुकी हैं और आजादी के बाद से अब तक 68 साल में से लगभग आधे समय देश में सैन्य शासन रहा है।
पाक सीनेट अध्यक्ष ने सैन्य तख्तापलट को लेकर दी चेतावनी

पाक सीनेट अध्यक्ष ने सैन्य तख्तापलट को लेकर दी चेतावनी

पाकिस्तान के सीनेट अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि सेना ने अगर फिर से तख्ता पलट करने की कोशिश की तो उसे संवैधानिक तरीके से रोका जाएगा। पाकिस्तान में सेना द्वारा तख्ता पलट किए जाने की कई घटनाएं हो चुकी हैं और आजादी के बाद से अब तक 68 साल में से लगभग आधे समय देश में सैन्य शासन रहा है।
अमित शाह ने मोदी को दिया डीयू व जेएनयू की कामयाबी का श्रेय

अमित शाह ने मोदी को दिया डीयू व जेएनयू की कामयाबी का श्रेय

दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू छात्र संघ चुनावों में एबीवीपी को मिली सफलता से उत्साहित होते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इन सफलताओं का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया।
जेएनयू छात्रसंघ: लेफ्ट का दबदबा लेकिन एबीवीपी की वापसी

जेएनयू छात्रसंघ: लेफ्ट का दबदबा लेकिन एबीवीपी की वापसी

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में वामपंथियों का दबदबा इस बार भी कायम रहा है। पहली बार अध्‍यक्ष पद पर सीपीआई समर्थित ऑल इंडिया स्‍टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) का उम्‍मीदवार जीता है लेकिन 14 साल बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) भी जेएनयूएसयू सेंट्रल पैनल में वापसी करने में कामयाब रही। दिल्‍ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में सभी सीटों पर जीतने वाली एबीवीपी के लिए यह एक बड़ी सफलता है। हालांकि, जेएनयू अभी भी लेफ्ट का गढ़ है लेकिन एबीवीपी का असर बढ़ रहा है।
Advertisement
Advertisement
Advertisement