इस जीत के साथ रियल मैड्रिड यूएफा सुपर कप को दो साल लगातार जीतने वाला दूसरा क्लब बन गया है। इससे पहले रियल मैड्रिड ने पिछले साल सेविया को 3-2 से हराकर सुपर कप अपने नाम किया था।
केंद्र सरकार में ग्रामीण और शहरी विकास मंत्रालयों की जिम्मेदारियां संभाल रहे नरेंद्र सिंह तोमर की गिनती भाजपा के कद्दावर नेताओं में होती है। मध्यप्रदेश से आकर राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले तोमर पार्टी के लिए संकटमोचक का काम भी करते रहे हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही त्रिवेंद्र सिंह रावत की तुलना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तेजी और तेवरों से की जा रही है। जबकि रावत मानते हैं कि पहाड़ में पहाड़ के हिसाब से रफ्तार रखनी पड़ती है।
अनिल कुंबले के इस्तीफा देने के बाद टीम इंडिया के नए कोच की तलाश शुरू हो गई है। नए कोच के लिए दस उम्मीदवारो को चुना गया गया है। इनमें रवि शास्त्री, वीरेंद्र सहवाग, क्रेज मैकडरमोट, लांस क्यूसनर, राकेश शर्मा, लाजचंद राजपूत, फिल सिमंस, टाम मूडी, डोडा गणेश और रिचर्ड पाइबस हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी ने आज ललित मोदी के बेटे रुचिर मोदी को हराकर राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पर अपनी जगह बना ली है। कुल 33 वोटों की गणना में सीपी जोशी को 19 जबकि रूचिर मोदी को कुल 14 वोट मिले।
बाबरी मामले की सुनवाई कर रही विशेष सीबीआई अदालत ने मंगलवार को लालकृष्ण आडवाणी, एमएम जोशी, उमा भारती और अन्य अभियुक्तों के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का आरोप तय कर दिया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत सभी 12 आरोपियों को जमानत भी दे दी है। सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने आरोप खारिज करने की मांग की है।
बाबरी विध्वंस मामले की सुनवाई में जुटी सीबीआई की विशेष अदालत ने भाजपा नेता लाल कृष्ण अडवाणी, केंद्रीय मंत्री उमा भारती और मुरली मनोहर जोशी को 30 मई से पहले कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है। वहीं, मामले से जुड़े सभी आरोपियों को भी 30 मई को पेशी के लिए मौजूद रहना होगा।
मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन का मानना है कि मोदी सरकार ने तीन साल में देश को आर्थिक स्थिरता प्रदान की है और सुधारों की दिशा में बड़े कदम बढ़ाए हैं। सार्वजनिक संसाधनों के आवंटन में भ्रष्टाचार पर अंकुश और जैम व्यवस्था को वे मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धियां मानते हैं। लेकिन यह भी स्वीकार करते हैं कि तेज आर्थिक वृद्धि दर के बावजूद रोजगार के मौकों की रफ्तार धीमी है। उन्होंने अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और केंद्र सरकार के तीन साल के कामकाज से जुड़े कई अहम मु्द्दों पर आउटलुक के संपादक हरवीर सिंह से बेबाक बातचीत की। कुछ अंश: