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हिमाचल प्रदेश के इकलौते आइएएस अफसर डॉ. यूनुस, जिनके नाम दर्ज ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ की हैट्रिक

जब शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर एक साथ 4,023 से अधिक हस्तनिर्मित शॉलें सजीं, तो यह केवल एक भव्य दृश्य...
हिमाचल प्रदेश के इकलौते आइएएस अफसर डॉ. यूनुस,  जिनके नाम दर्ज ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ की हैट्रिक

जब शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर एक साथ 4,023 से अधिक हस्तनिर्मित शॉलें सजीं, तो यह केवल एक भव्य दृश्य नहीं था। यह हिमाचल प्रदेश की आत्मा, उसकी परंपरा और उसके कारीगरों की सदियों पुरानी मेहनत का उत्सव था। हिम एमएसएमई 2026 के दौरान बना यह दृश्य गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में ‘मोस्ट हैंड मेड शाल्स डिसप्लेड एट ए सिंगल वेन्यू’ के रूप में दर्ज हुआ।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे जिस प्रशासनिक दूरदर्शिता और संवेदनशील नेतृत्व की छाप साफ़ दिखती है, वह है 2010 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. यूनुस। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश सरकार में डायरेक्टर, इंडस्ट्रीज डिपार्टमेंट तथा स्टेट टैक्स एंड एक्साइज़ कमिश्नर के रूप में कार्यरत हैं। उनका प्रशासनिक दृष्टिकोण केवल फ़ाइलों और आँकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि लोककला, संस्कृति और स्थानीय आजीविका को वैश्विक पहचान दिलाने की ठोस पहल में दिखाई देता है।

‘गिनीज रिकॉर्ड्स’ में हिमाचल प्रदेश की छाप

कुल्लू दशहरा में नाटी

हज़ारों लोगों की सामूहिक भागीदारी से बना सबसे बड़े लोकनृत्य का विश्व रिकॉर्ड, जो हिमाचल की सामुदायिक संस्कृति और पर्वतीय विरासत का प्रतीक है।

मंडी की विशाल खिचड़ी

1,995 किलोग्राम से अधिक खिचड़ी पकाने का यादगार आयोजन, जिसने पारंपरिक हिमाचली भोजन और सामूहिकता को विश्व मंच पर रखा।

मोस्ट हैंड मेड शाल्स डिसप्लेड एट ए सिंगल वेन्यू

और अब शिमला रिज पर शॉलों की ऐतिहासिक प्रदर्शनी, जिसने हथकरघा और बुनकरों की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया। इन सभी आयोजनों का साझा उद्देश्य स्पष्ट है, हिमाचल प्रदेश की परंपरा को उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि अवसर के रूप में प्रस्तुत करना।

प्रशासनिक संवेदना की मिसाल

डॉ. यूनुस के नेतृत्व में उद्योग और एमएसएमई क्षेत्र को केवल नीतिगत समर्थन ही नहीं मिला, बल्कि स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और नवोन्मेषकों को बाज़ार से जोड़ने का मंच भी मिला। हिम एमएसएमई 2026 जैसे आयोजनों ने यह साबित किया कि प्रशासन अगर संवेदनशील हो, तो संस्कृति भी रोज़गार और आत्मनिर्भरता का साधन बन सकती है।

मानवीय पक्ष

डॉ. यूनुस की पहचान केवल एक कुशल प्रशासक तक सीमित नहीं। पंजाब के एक शहीद सैनिक की बेटी को गोद लेना उनके मानवीय और संवेदनशील व्यक्तित्व को रेखांकित करता है। यह दिखाता है कि सेवा केवल पद से नहीं, बल्कि भावना से होती है। डॉ. यूनुस की यह यात्रा हिमाचल के लिए एक संदेश है, जब प्रशासन संस्कृति को अपनाता है, तब पहचान अपने आप बनती है।

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