धूप नीचे नहीं उतरती नई कहानीकार श्रद्धा का पहला कहानी संग्रह है, जिसमें तेरह कहानियां शामिल हैं। शीर्षक कहानी में बंधक बने बच्चों का आजादी का ख्याल उनके लिए जीवन की धूप की तरह है। कहानी ‘ऊष्मा’ की भूमिका में ख्यात कहानीकार ज्ञानरंजन कहते हैं कि यहां यह कहानी उनकी कहानी ‘मृत्यु’ को अपदस्थ करती हैं।
‘फलसफा’ जैसी कहानी पैसों को ही दुनिया मान लेने वालों और भ्रष्टाचारियों की पोल खोलती है। चूहे को पात्र बनाकर यह जादुई यथार्थ कहानी बुनी गई है। इसी के साथ उल्लेखनीय कहानी ‘सरहुल का फूल’ में आतंक में घिरे प्रेम को पुनर्जीवन देती है। ‘गोबा अली’ का कैनवास बहुत बड़ा है। इस कहानी में पीढ़ियों को एक वास्तविक जीवन की राह की ओर अग्रसर करने का प्रयास निहित है। ‘दावानल’ बस्तर की पृष्ठभूमि पर लिखी श्रेष्ठ कहानी है। श्रद्धा की कहानियों की भूमि पाठकों के लिए अनदेखी सी लग सकती है क्योंकि वहां पहुंचना सबके लिए आसान नहीं है। लेखक की दृष्टि उपेक्षित लेकिन मौलिक जीवन पर केन्द्रित है। हमेशा विशेष की तलाश में रहने वाली रचनात्मकता के बरक्स इन कहानियों में बहुत साधारण से दिखने वाले चरित्रों को केन्द्र में लाया गया है। कमजोर दृष्टि सतह पर दिखते ‘महत्वपूर्ण’ पर जाती है पर साधारण के महत्व को नहीं जानती। यह समकालीन कथा समय में विरला अनुभव है कि श्रद्धा की दृष्टि इन पर पड़ती है।
यह भी अनोखा है कि श्रद्धा दुर्गम जीवन को रचती हैं। उनकी रचनात्मक और पवित्र लालसा उनसे यह करवा ले जाती है। पहाड़ को देखने और महसूस करने पहाड़ पर जाना पड़ता है। यह शरीर और चेतना, दोनों के लिए श्रम साध्य है। सुविधा भोगी दृष्टि यह नहीं देख पाती, न कर पाती है। शामिल किए गए चरित्रों की व्याख्या की अदेखी कर दें, तो समकालीन कहानी में श्रद्धा विकट वांछना की तरह प्रकट हो रही हैं।
धूप नीचे नहीं उतरती
श्रद्धा श्रीवास्तव
प्रकाशक | पुस्तकनामा
कीमतः 180 रुपये
पृष्ठः 95