भारत में क्रिकेट मात्र खेल नहीं, बल्कि एक भावना है, युवा जोश का साधन है। यही कारण है कि भारतीय क्रिकेट का हर ऐतिहासिक मोड़ देश के लिए नई परिभाषा और नया विजन तय करता है। 1983 की ऐतिहासिक जीत ने राष्ट्र को विश्वास दिलाया था कि हम भी विश्व पटल पर विजेता बन सकते हैं। 2011 के विजय अभियान ने स्पष्ट किया कि हमारे पास प्रतिभा की कमी नहीं है, बस सही समय पर सही तालमेल की आवश्यकता है। 2024 की खिताबी जीत ने आधुनिक क्रिकेट खेलने के हमारे नए नजरिये को दुनिया के सामने रखा। अब भारत ने 2026 में टी20 विश्व कप के फाइनल में न्यूजीलैंड को जिस तरह एकतरफा मुकाबले में हराया, उसने वैश्विक क्रिकेट में नए युग का सूत्रपात कर दिया। भारत अब तक तीन टी20 विश्व कप खिताब जीतने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। ऐसे में यह जीत केवल ट्रॉफी नहीं, बल्कि बुलंद घोषणा है कि आने वाला दशक पूरी तरह से भारतीय क्रिकेट के नाम होने वाला है।

संजू सैमसन
भारतीय टीम का विश्व कप अभियान जादुई सफर से कम नहीं था। पूरे टूर्नामेंट में टीम ने सिर्फ एक हार झेली। मुंबई में अमेरिका के खिलाफ कप्तान सूर्यकुमार यादव ने 84 रनों की शानदार पारी खेली। उनके इस प्रदर्शन की बदौलत भारत ने 29 रनों से जीत दर्ज की। इसके बाद दिल्ली में नामीबिया के खिलाफ टीम ने अपना दबदबा बनाए रखा और एकतरफा मुकाबले में 93 रनों से बड़ी जीत हासिल की।
जीत का यह कारवां कोलंबो पहुंचा, जहां पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने चिर-प्रतिद्वंद्वी की तरह नहीं, बल्कि चैंपियन की तरह खेल दिखाया। ईशान किशन की 40 गेंदों में 77 रनों की तूफानी पारी ने भारत को 175 के स्कोर तक पहुंचाया। इसके बाद गेंदबाजों ने कहर बरपाते हुए पावरप्ले में ही चार विकेट झटक लिए और पाकिस्तान को महज 114 रनों पर समेट कर 61 रनों से करारी शिकस्त दी। लगातार चौथी जीत अहमदाबाद में नीदरलैंड्स के खिलाफ आई। इस संघर्षपूर्ण मुकाबले में शिवम दुबे ने बल्ले और गेंद दोनों से जौहर दिखाया। उन्होंने 31 गेंदों में 66 रन कूटने के बाद 2 विकेट भी झटके, जिससे भारत 17 रनों से जीत दर्ज कर शान से सुपर-8 में पहुंचा।

ईशान किशन
सुपर-8 की शुरुआत भारत के लिए अच्छी नहीं रही और उसे दक्षिण अफ्रीका के हाथों 76 रनों की हार झेलनी पड़ी। लेकिन टीम इंडिया इस झटके से उबरते हुए जिम्बाब्वे के खिलाफ ऐतिहासिक वापसी की। भारत ने टी20 विश्व कप इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर (256/4) खड़ा कर दिया। अर्शदीप सिंह की अगुआई में गेंदबाजों ने जिम्बाब्वे को 184 रनों पर रोककर इस ‘करो या मरो’ वाले मैच को अपने नाम किया। कोलकाता के ईडन गार्डेन में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला गया मुकाबला ‘वर्चुअल क्वार्टर फाइनल’ था। यहां संजू सैमसन ने 50 गेंदों में नाबाद 97 रनों की ‘ईडेन स्पेशल’ पारी खेलकर 196 रनों के लक्ष्य को बौना साबित कर दिया।
सैमसन का यह फॉर्म सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ भी जारी रहा। मुंबई में उन्होंने 42 गेंदों में 89 रनों की पारी खेली, जिससे भारत ने 253/7 का पहाड़ जैसा स्कोर बनाया। इंग्लैंड की ओर से जैकब बेथेल ने अपने करियर का पहला टी20 शतक जड़कर कड़ी टक्कर दी, लेकिन अक्षर पटेल के कुछ अविश्वसनीय कैचों और जसप्रीत बुमराह की सधी हुई डेथ ओवर गेंदबाजी ने भारत की जीत पर मुहर लगा दी। चौथी बार टी20 विश्व कप के फाइनल में पहुंचकर भारत ने इतिहास रच दिया, जहां उन्होंने न्यूजीलैंड को एकतरफा अंदाज में हराकर विश्व विजेता का ताज अपने नाम किया।
अगर इस विजयी अभियान में किसी एक खिलाड़ी की सबसे ज्यादा चर्चा हुई, तो वह संजू सैमसन थे। संजू के लिए यह टूर्नामेंट उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि पिछले कुछ महीनों से वे लगातार सचिन तेंडुलकर के संपर्क में थे। उनके मार्गदर्शन ने बल्लेबाजी में ठहराव और गहराई दी, जिसकी कमी संजू लंबे समय से महसूस कर रहे थे। संजू ने जिस तरह से कठिन परिस्थितियों में संयम दिखाया और दबाव के समय बड़े शॉट खेले, उसने चयनकर्ताओं के भरोसे को सही साबित किया।
विश्व कप से ठीक पहले खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। समय पलटा और संजू ने फिर खुद को टीम में पाया। सैमसन ने वेस्टइंडीज के खिलाफ जानदार मुकाबले में नाबाद 97 रनों की पारी खेलकर अपनी काबिलियत का परिचय दिया। उन्होंने सेमीफाइनल और फाइनल में भी 89-89 रनों की पारी खेलकर फॉर्म बरकरार रखा। संजू की ताबड़तोड़ मगर सूझबूझ भरी बल्लेबाजी की बदौलत भारत हर मैच में बड़ा स्कोर खड़ा करने या मुश्किल लक्ष्य का पीछा करने में सफल रहा। संजू ने 5 मुकाबलों में 80 के औसत और 199 के स्ट्राइक रेट से कुल 321 रन बनाए। वे प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने।

सूर्यकुमार यादव
दूसरी ओर, गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह टीम के रक्षक बने रहे। इस विश्व कप में बुमराह की गेंदबाजी किसी भी बल्लेबाज के लिए समझना मुमकिन नहीं हो पाया। उनकी यॉर्कर और धीमी गति की गेंदों ने विपक्षी खेमे में खौफ पैदा कर दिया। जब भी टीम को विकेट की जरूरत होती या विपक्षी टीम तेजी से रन बना रही होती थी, कप्तान के पास केवल एक ही नाम होता था, बुमराह। बुमराह ने न केवल विकेट चटकाए बल्कि उनकी कंजूस गेंदबाजी ने दूसरे छोर के गेंदबाजों के लिए भी काम आसान कर दिया। बुमराह ने 8 मैचों में सबसे ज्यादा 14 विकेट झटके। इस बीच उनका औसत 12.43 जबकि इकॉनमी रेट 7 से भी कम का रहा। बुमराह को 4 विकेट की बदौलत फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच का अवार्ड मिला।
सूर्यकुमार यादव ने बल्लेबाजी में भले ही निराश किया हो लेकिन कप्तानी में उन्हें पूरे नंबर मिलेंगे। अपने खिलाड़ियों पर भरोसा करके उन्होंने टीम को एकजुट रखा। टूर्नामेंट के दौरान कई मौके आए जब टीम इंडिया मुश्किल में दिखी, लेकिन हर बार नया हीरो सामने आया। कभी हार्दिक पांड्या ने अपने ऑलराउंडर खेल से मैच जिताया, तो कभी जसप्रीत बुमराह की यॉर्कर ने कमाल दिखाया। स्पिन गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में रनों की गति पर लगाम लगाई और नियमित अंतराल पर विकेट लिए। यह जीत किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरी टीम की मेहनत का नतीजा थी। गौतम गंभीर की रणनीतियों ने भी मैदान पर खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित किया।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए फाइनल मुकाबले में जीत का अंतर बताता है कि भारतीय टीम इस समय किस स्तर पर क्रिकेट खेल रही है। न्यूजीलैंड ने भी पूरे टूर्नामेंट में सही खेल दिखाया लेकिन फाइनल में वे भारतीय रणनीति के सामने बेबस नजर आए। बुमराह के आक्रमण ने कीवी बल्लेबाजों को हाथ खोलने का मौका नहीं दिया। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, भारत की पकड़ मजबूत होती गई और भारतीय खिलाड़ियों ने मैदान पर तिरंगा लहरा दिया।
आंकड़ों के लिहाज से भी यह विश्व कप भारत के लिए अभूतपूर्व रहा। भारत ने वे रिकॉर्ड बनाए जो आज तक कोई टीम नहीं बना पाई थी। लगातार मैचों में जीत और खिलाड़ियों का व्यक्तिगत प्रदर्शन यह बताने के लिए काफी है कि यह टीम इतिहास रचने के इरादे से ही मैदान पर उतरी थी।
इस टी-20 विश्व कप में ज्यादा रन
संजू सैमसनः 5 मुकाबलों में 321 रन (औसत - 80.25)
ईशान किशनः 9 मुकाबलों में 317 रन (औसत-35.22)
सूर्यकुमार यादवः 9 मुकाबलों में 242 रन (औसत - 30.25)
किसने ज्यादा विकेट चटकाए
अक्षर पटेलः 7 मुकाबलों में 11 विकेट (औसत - 18.64)
जसप्रीत बुमराहः 8 मुकाबलों में 14 विकेट (औसत - 12.43)
वरुण चक्रवर्तीः 9 मुकाबलों में 18 विकेट (औसत - 20.50)