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जीएसटी से बंधी मप्र की उम्मीदें

हालांकि निवेशक सम्मेलन में बाबा रामदेव ने सरकार पर तंज कसा
मध्य प्रदेश निवेशक सम्‍मेलन में दीप जलाकर उद्घाटन करते मंत्री रविशंकर प्रसाद

वैश्विक मंदी के दौर में देश के हृदय प्रदेश मध्य प्रदेश में औद्योगिक पूंजी निवेश के सपनों का ताना-बाना बेहतर तरीके से बुना जा रहा है। बीते दो सालों में मध्य प्रदेश में निवेशकों ने पांच लाख 62 हजार 847 करोड़ रुपये के निवेश की मंशा दिखाई है। इस आंकड़े में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट से लेकर निजी क्षेत्र के बिल्डरों की विकास योजनाओं के आंकड़े भी समाहित हैं। लेकिन आने वाले दौर में मध्य प्रदेश को सबसे ज्यादा रोजगार लॉजिस्टिक हब के क्षेत्र में मुहैया होने वाला है।
जीएसटी के लागू होने पर मध्य प्रदेश को दोहरा लाभ मिलने वाला है। पहला यह कि सात करोड़ की आबादी का राज्य होने के कारण यहां माल की खपत होने पर टैक्स मिलेगा। पहले यह उस राज्य को मिलता था जो उस सामान का निर्माण करता था। जीएसटी के कारण दूसरा फायदा मध्य प्रदेश को लॉजिस्टिक हब के क्षेत्र में मिलने वाला है। मध्य प्रदेश जैसे लैंड लॉक स्टेट को (समुद्री तट विहीन) जो नुकसान होता था वह देश के बीचोबीच स्थित होने के कारण अब मध्य प्रदेश को मिलेगा। वो इसलिए कि किसी राज्य में निर्माण के बाद उद्योग समूह को अपने उत्पाद पर वहां भी टैक्स लगता था जहां वह माल को स्टोर करके रखता था। जीएसटी के बाद यह प्रावधान खत्म हो जाएगा। इसके बाद बड़ी-बड़ी उत्पादक कंपनियां प्रॉक्टर एंड गैंबल कंपनी की तरह भोपाल और उसके आसपास अपने लॉजिस्टिक हब विकसित करेंगी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी इस बात को रेखांकित किया है कि जीएसटी का सबसे बड़ा फायदा मध्य प्रदेश को ही मिलने वाला है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा जताया है कि 2630 निवेशकों ने जो मंशा जताई है वह मूर्त रूप लेगी। चौहान तो आत्मविश्वास से इतने लबरेज थे कि उन्होंने अगला निवेश सम्मेलन 16-17 फरवरी, 2019 में करने का ऐलान करते हुए कहा कि तब भी वह खुद निवेशकों के स्वागत के लिए तैयार मिलेंगे। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव नवंबर 2018 में होने वाले हैं। निवेश सम्मेलन में आए देश के तमाम शीर्षस्थ उद्योगपतियों ने मध्य प्रदेश में निवेश की मंशा जताने से ज्यादा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तारीफों के पुल बांधे। अगर प्रदेश सरकार पर किसी ने तंज कसा तो वह देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों को चुनौती दे रहे बाबा रामदेव ने। उन्होंने पतंजलि उत्पादों को मध्य प्रदेश में लाने के साथ ही खेती और गौ-संवर्धन के लिए हजार एकड़ जमीन मांगी है। लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने 45 एकड़ जमीन ही मुहैया कराई है। उन्होंने इसके लिए उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मोहम्मद सुलेमान पर यह तंज भी कसा कि 45 एकड़ में तो कबड्डी खेली जा सकती है। उन्होंने निवेशकों को यह उलाहने भी दिए कि उन्होंने सारी बातें कर डालीं सिवाय निवेश के। निवेशक सम्मेलन में पिछली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी थे तो शिवराज ने इस बार अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, वेंकैया नायडू, नरेन्द्र तोमर और रविशंकर प्रसाद सरीखे दिल्ली में बैठे अपने पैरोकार केंद्रीय मंत्रियों के लिए पलक-पावड़े बिछाए। इन मंत्रियों ने भी शिवराज की दिल खोलकर तारीफ की। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जरूर पेट्रोलियम पदार्थों से राज्य में टैक्स कम करने का मशविरा दिया है। उनकी इस दलील में दम भी है। जब तक राज्य में किसी उत्पाद की लागत कम नहीं आएगी तो कोई उद्योगपति भला यहां क्यों निवेश करेगा। प्रधान पूरे देश में वाहनों के ईंधन पर समान टैक्स की वकालत कर रहे हैं। प्रधान ने बीना में ग्रीन रिफायनरी की बात भी कही है। इसके तहत रिफायनरी के लिए कृषि के बचे हुए उत्पाद नरवाई से बिजली बनाई जाएगी। उन्होंने प्रदेश में 500 मेगावाट के सोलर पॉवर प्लांट लगाने की भी बात कही है। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसके मिश्रा कहते हैं कि मध्य प्रदेश में लगातार हो रहे निवेशक सम्मेलनों के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। प्रदेश की पुरानी छवि टूटी है इसके चलते अब उद्योगपति खुद राज्य में निवेश के लिए कदम आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निवेश की बाधाओं को दूर करने की जो बात कही है उसे जल्द ही जमीन पर उतारा जाएगा। लॉजिस्टिक हब के लिए बनी नीति में जरूरत के मुताबिक परिवर्तन की जरूरत होगी तो उसे भी पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। लेकिन मध्य प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास के प्रयासों को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव नाकाफी बताते हैं। उनका कहना है कि जो संजीदगी निवेशक सम्मेलन में दिखाई जाती है उसके दीदार तब नहीं होते जब उद्योगपति सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाता है।

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