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धन कुबेर मंत्री के फेर में उलझी भाजपा

मंत्री के करीबियों पर पुलिस कार्रवाई से उठे कई सवाल
हवाला मामले में पकड़े गए सरावगी (गुलाबी शर्ट में) और संजय पाठक के साथ मुख्य मंत्री शिवराज सिंह।

मध्य प्रदेश में हाल में दो बड़े मामले पकड़ में आए हैं जिनके तार प्रदेश के रसूखदार भाजपा नेताओं से जुड़ रहे हैं। एक मामला खांटी भाजपा नेता सुशील वासवानी से जुड़ा है तो दूसरा कांग्रेस से आए धनकुबेर नेता संजय पाठक से जुड़ा है। पाठक कांग्रेस की सदस्यता त्यागने के बाद भाजपा से चुनाव लड़े और अभी शिवराज कैबिनेट में स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री हैं। एक मामला नोटबंदी के बाद वासवानी के सहकारी बैंक में करोड़ों की रकम जमा होने के बाद गर्माया है तो दूसरे में करोड़ों की रुपये की रकम फर्जी खाते जमा कराने और उस रकम से कारोबार की पड़ताल से जुड़ा है।

इनमें से एक मामले की जांच आयकर विभाग के पास है तो दूसरे हवाला कारोबार की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है। इस मामले को उजागर करने वाले कटनी के तेजतर्रार पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी की बदली हो चुकी है। तिवारी का कुसूर यह था कि उन्होंने फर्जी खाते में रकम जमा होने पर पड़ताल शुरू की तो उनके हाथ कटनी के हवाला कारोबारी और मंत्री संजय पाठक के व्यापारिक साझेदार सतीश सरावगी और मनीष सरावगी की गिरेबां तक जा पहुंचे। आठ साल में करोड़पति से अरबपति बने सरावगी बंधु के हवाला कारोबार में अभी तक संजय पाठक का सीधे तौर पर कोई नाम नहीं आया है। लेकिन सरावगी बंधुओं के गिरफ्तारी हो पाती उसके पहले ही कटनी के पुलिस कप्तान गौरव तिवारी के तबादले ने पाठक और शिवराज सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। दूसरी ओर संजय पाठक का कहना है कि जिस हवाला कारोबार में उनका नाम जोड़ा जा रहा है उसमें मैं न कभी वे लिप्त थे, न हैं और न कभी आगे लिप्त होंगे। उन्होंने कहा कि ईडी की जांच जल्द पूरी हो जिससे पूरी सच्चाई सामने आ सके।

दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस मामले की भनक लगने के बाद पीएमओ से राज्य सरकार को तलब कराया था। वित्त मंत्री अरुण जेटली को भी इसके राजनीतिक नतीजों के बारे में आकलन करने का जिम्‍मा सौंपा गया था। कटनी के हवाला कारोबार में संजय पाठक के साथ ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के बेटे की भी सरावगी और पाठक के साथ व्यापारिक साझेदारी की बात सामने आ रही थी। पहले भाजपा हाईकमान ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पाठक के साथ नंदकुमार सिंह चौहान के इस्तीफे के लिए दवाब बनाया था। लेकिन मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संजय पाठक की दलीलों से सहमत होते हुए जेटली के जरिये आलाकमान को इस बात पर राजी करा लिया कि यदि उप्र चुनाव के पहले दोनों के इस्तीफे हुए तो भाजपा को नुकसान उठाना पड़ेगा।

दरअसल इस मामले की शुरुआत रजनीश तिवारी और अमर दहायत द्वारा पुलिस को की गई शिकायत के बाद हुई। बीपीएल कार्डधारी तिवारी को मार्च 2016 में आयकर विभाग का नोटिस मिला तो उसे पता चला कि वह एसके मिनरल्स का संचालक है। उसके नाम के खाते से करोड़ों का लेनदेन हुआ था। इसके बाद ऑटोमोबाइल कारोबारी विनय जैन ने शिकायत की जिनके नाम पर महादेव ट्रेडिंग फर्म चल रही थी। ऐसे एक-दो नहीं 45 खाते फर्जी पाए गए जिनसे 500 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया। कुल 32 फर्में हैं। इनमें से कुछ नई खोली गई तो कई बंद पड़ी पुरानी खरीदी गई। ईडी ने गौरव तिवारी द्वारा जब्‍त कराए गए 31 बोरे दस्तावेजों को अपने कब्‍जे में लेने के बाद कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही ईडी ने एक्सिस बैंक के 32 खातों से हुए लेनदेन के दस्तावेज बरामद कर लिए हैं। पाठक के दामन पर जिन सरावगी बंधुओं के कारण आंच आ रही है, उनकी कामयाबी का ग्राफ भी संजय पाठक की सफलता के साथ कुलांचें मारते हुए आगे बढ़ा है। आठ साल पहले तक सतीश सरावगी और मनीष सरावगी कोयले की ढुलाई का काम करते थे। लेकिन संजय पाठक के साथ जुडऩे के बाद लौह अयस्क की खरीद-बिक्री का काम भी उन्हें मिल गया। सरावगी बंधु कटनी की 32 फर्मों में मालिक, भागीदार और संचालक के बतौर जुड़े हैं। ऐसा अनुमान है कि इन तमाम कारोबार में संजय पाठक की प्रत्यक्ष और परोक्ष भागीदारी रही है। लेकिन संजय पाठक इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं।

भाजपा नेता वासवानी भी निकले बड़े आसामी

बस कंडक्‍टर से कॅरिअर की शुरुआत करने वाले भोपाल के भाजपा नेता सुशील वासवानी की आयकर छापे में सौ करोड़ से ज्यादा की संपत्ति उजागर हुई है। वासवानी बैरागढ़ में महानगर सहकारी बैंक के अध्यक्ष रह चुके हैं। अभी उनकी पत्नी किरण वासवानी इसकी अध्यक्ष हैं। आयकर विभाग को नोटबंदी के बाद इस बैंक से नोटों की बड़े पैमाने पर बदली की शिकायत मिलने के बाद यह छापामारी की गई थी। वासवानी ने आयकर विभाग के सामने दस करोड़ की अघोषित आय उजागर की है। लेकिन माना जाता है कि वासवानी ने भोपाल के कई भाजपा नेताओं के माल को नोटबंदी के बाद ठिकाने लगाया है।

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