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टैक्स में एकरूपता लाएगा जीएसटी

एक राष्ट्र एक कर, वाक्य ने टैक्सदाताओं के मन में नई आशा जगाई है। जानिए कैसे काम करेगा टैक्स का यह प्रारूप
व‌ित्त मंत्री अरुण जेटली और राजस्व सच‌िव हसमुख अध‌िया

आजादी के बाद का सबसे बड़ा टैक्स सुधार है जीएसटी। इसका असर हर आम और खास पर पड़ेगा। भारतीयों के लिए शायद टैक्स ही सबसे ज्यादा डरावना शब्द है। सरकार इतने टैक्स लाद देती है कि जनता समझने के बजाय चुपचाप उसे स्वीकार कर लेने में ही अपनी भलाई समझती है। पिछले दिनों जीएसटी शब्द बहुत चर्चित रहा है। आखिर क्या है यह जीएसटी और कैसे यह हम सब पर असर डालेगा। आजादी के बाद का इन डायरेक्ट टैक्स के क्षेत्र में सबसे बड़ा रिफॉर्म अब जल्द ही मूर्त रूप लेने वाला है। हम बात कर रहे हैं गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) की। जीएसटी लागू करने की कवायद 16 साल पहले शुरू हुई थी, जो अब लगभग लागू होने को तैयार है। संसद ने हाल ही में संशोधित बिलों के साथ जीएसटी को मंजूरी दे दी है। सरकार का दावा है कि एक जुलाई 2017 से जीएसटी लागू कर दिया जाएगा।

 

क्या है जीएसटी

गुड्स एंड सर्विस टैक्स वस्तुओं और सेवाओं दोनों पर लगेगा। इसके लागू होने के बाद पूरे देश में एक समान इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम लागू हो सकेगा। यह केंद्र और राज्यों के 20 से ज्यादा इनडायरेक्ट टैक्स की जगह लेगा। जीएसटी लागू होने के बाद एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी, स्पेशल एडिशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम, वैट/सेल्स टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स, मनोरंजन कर, ऑक्ट्रॉय एंड एंट्री टैक्स, लग्जरी जैसे टैक्स खत्म होंगे।

 

कैसे लगेगा जीएसटी

जीएसटी किसी भी वस्तु और सेवाओं की खरीद-बिक्री पर लगेगा। इसके तहत उत्पाद बनाने वाले मैन्युफेक्चरर और उसकी ट्रेडिंग करने वाले थोक विक्रेताओं को लागू रेट के अनुसार जीएसटी देना होगा, लेकिन उसे वह टैक्स क्रेडिट के रूप में वापस ले सकेंगे। यानी जो अंतिम उपभोक्ता होगा उसे जीएसटी का भुगतान करना होगा।

 

केवल तीन तरह के टैक्स

जीएसटी लागू होने के बाद वस्तुओं एवं सेवाओं पर केवल तीन तरह के टैक्स लिए जाएंगे। पहला सीजीएसटी, यानी सेंट्रल जीएसटी, जो केंद्र सरकार के दायरे में होगा। दूसरा एसजीएसटी, यानी स्टेट जीएसटी, जो राज्य सरकार के दायरे में होगा, जिसके जरिए राज्य सरकार टैक्स वसूलेगी। वहीं अगर कोई कारोबार दो राज्यों के बीच होगा तो उस पर आईजीएसटी, यानी इंटीग्रेटेड जीएसटी लगेगा, जिसे केंद्र सरकार वसूलेगी और उसे राज्यों में तय अनुपात में बांटा जाएगा।

जीएसटी में ऐसे लगेगा टैक्स

जीएसटी के लिए अभी सरकार ने चार स्लैब बनाए हैं। जिसमें 5, 12, 18 और 28 फीसदी के स्लैब तय किए गए हैं। अभी किस वस्तु पर कितना टैक्स लगेगा यह तय नहीं हुआ है। हालांकि सरकार ने जीएसटी बिल में अधिकतम टैक्स दर 20 फीसदी रखी है। इस तरह केंद्र और राज्य को मिलाकर अधिकतम टैक्स दर 40 फीसदी की जा सकती है।

 

सेस के लिए ये है प्रावधान

सरकार ने अभी लगने वाले शिक्षा सेस, कृषि कल्याण सेस, स्वच्छ भारत सहित सभी सेस को खत्म कर दिया है। हालांकि जीएसटी में एक 'डिमेरिट्स गुड्स’ का वर्ग बनाया गया है, जिस पर सेस लगेगा। इसके तहत पान मसाले पर अधिकतम 135 फीसदी, सिगरेट पर 290 फीसदी, लग्जरी कार और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स पर 15 फीसदी तक सेस लगाने का प्रावधान है।

टैक्स चोरी पर मिलेगी सजा

कानून के तहत 5 करोड़ से ऊपर की टैक्स चोरी गैर जमानती होगी। इसमें 5 साल तक जेल का प्रावधान है। टैक्स पेमेंट में देरी पर अधिकतम 18 फीसदी तक ब्‍याज देना पड़ सकता है। इसी तरह मुनाफाखोरी रोकने के लिए एक प्राधिकरण भी बनाया जाएगा। 

 

छोटे कारोबारियों को राहत

सालाना 50 लाख रुपये तक बिजनेस करने वाले मैन्युफेक्चरर्स को टर्नओवर पर 2 फीसदी (1 फीसदी सीजीएसटी और 1 फीसदी एसजीएसटी) तक टैक्स देना होगा। वहीं  रेस्टोरेंट बिजनेस के लिए 5 फीसदी (2.5 फीसदी सीजीएसटी और 2.5 फीसदी एसजीएसटी),  ट्रेडर्स के लिए 1 फीसदी (0.5 फीसदी सीजीएसटी और 0.5 फीसदी एसजीएसटी) टैक्स का प्रावधान किया गया है। बीस लाख तक रेवेन्यू वाले बिजनेस जीएसटी के दायरे से बाहर होंगे। हालांकि कुछ पूर्वोत्तर और सुदूर क्षेत्र के दर्जे वाले राज्यों में यह सीमा 10 लाख रुपये सालाना होगी।

ई-कॉमर्स कंपनियों पर लगेगा जीएसटी

ई-कॉमर्स कंपनियां अपने मार्केट प्लेस का इस्तेमाल करने वाले सेलर्स को भुगतान करने से पहले टैक्स काटेंगी। यह अधिकतम 2 फीसदी होगा, इसमें 1 फीसदी सीजीएसटी और 1 फीसदी एसजीएसटी।

इन सेवाओं को रखा गया है बाहर

बिल के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और तीर्थ यात्रा पर जीएसटी लागू नहीं होगा। यानी इस सेवाओं को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाएगा, जिससे इन अहम सेवाओं पर अतिरिक्त कर बोझ नहीं पड़ेगा।

क्या होगा फायदा

अभी हम अलग-अलग सामान पर 30 से 35 प्रतिशत टैक्स देते हैं। जीएसटी में कम टैक्स लगेगा। सभी राज्यों में सभी सामान एक कीमत पर मिलेगा। अभी एक ही चीज दो राज्यों में अलग-अलग दाम पर बिकती है, क्योंकि राज्य अपने हिसाब से टैक्स लगाते हैं। साथ ही वस्तुओं की कीमतों में भी कमी आने की संभावना है। इसके अलावा कारोबारियों की लागत भी घटने का अनुमान है। ऐसा अनुमान है कि जीएसटी लागू होने के बाद सकल घरेलू उत्पाद में एक से दो फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।

 

कारोबारियों की लागत कम होगी

अगर कोई कंपनी एक राज्य में अपने उत्पाद बनाकर दूसरे राज्य में बेचती है तो उसे कई तरह के टैक्स दोनों राज्यों को चुकाने होते हैं, जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है। जीएसटी लागू होने से ऐसा नहीं होगा।

 

जरूरी चीजों की कीमतों में इजाफा नहीं होने की उम्मीद

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने संसद में जीएसटी बिल पर चर्चा के दौरान यह भरोसा दिलाया है जरूरी वस्तुओं पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे महंगाई नियंत्रण में रहेगी। बिल में प्रावधान है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के तहत आने वाली करीब 50 फीसदी जरूरी वस्तुओं पर जीरो टैक्स लगेगा। ऐसे में जीएसटी लागू होने से जरूरी चीजों की कीमतों में इजाफा नहीं होगा इसके अनुसार रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं पर 5 फीसदी टैक्स लगेगा जबकि उपभोग की अन्य वस्तुओं पर 12 से 18 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा।

प्रोफेशनल्स को कराना होगा पंजीकरण

अंतरराज्यीय सेवाएं देने वाले प्रोफेशनल्स को अनिवार्य तौर पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा जबकि एक राज्य में सेवा देने वाले प्रोफेशनल्स को तभी रजिस्ट्रेरशन कराना होगा जब उनका टर्नओवर 20 लाख रुपये से अधिक होगा। पूर्वोत्तर भारत में काम करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए टर्नओवर की लिमिट 10 लाख रुपये होगी।

अभी केंद्र और राज्यों के कर अधिकारियों के बीच अधिकारों के बंटवारे का मुद्दा सुलझा नहीं है। केंद्रीय अधिकारियों का मानना है कि उनके अधिकारों में नई कर व्यवस्था में कैंची चली है, जबकि राज्य सरकार के अधिकारियों को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। यह मसला अभी तक उलझा हुआ है। साथ ही राज्य सरकारों के अधिकारियों की तकनीकी क्षमता को लेकर भी सवाल हैं। सरकार ने जीएसटी से उम्‍मीदें बढ़ा दी हैं। इसके लागू होने से जीडीपी में दो फीसदी तक की बढ़ोतरी के दावे किए जा रहे हैं। दुनिया के जिन देशों में जीएसटी लागू हुआ है, वहां शुरुआती समय में कीमतों में इजाफा हुआ है। ऐसे में बड़े फायदे से पहले महंगाई के लिए तैयार रहना चाहिए।

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