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शहरनामाः जम्मू

डोगरो का शहर
यादों में शहर

जम्बूपुरा

जनश्रुति के अनुसार एक बार राजा जम्बू लोचन तवी नदी के किनारे सैर कर रहे थे। जम्बू लोचन, नौवीं शताब्दी में शासन करने वाले एक शक्तिशाली स्थानीय सरदार बाहु के भाई थे। उन्होंने देखा कि नदी के किनारे पर एक शेर और एक बकरी एक साथ सामंजस्य के साथ पानी पी रहे थे। यह दृश्य देखकर राजा अचंभित रह गए और उन्होंने तवी नदी के दाहिने किनारे पर ‘जम्बूपुरा’ नाम से  एक शहर बनाने का फैसला किया। बाद में इसी जम्बूपुरा को जम्मू के नाम से जाना जाने लगा। आज भी मान्यता है कि तवी नदी के किनारे शेर और बकरी एक साथ पानी पीते हैं और साथ-साथ रहते हैं। यही विशेषता यहां के लोगों में भी देखी जा सकती है। यहां सामाजिक सद्भाव और सौहार्द का माहौल सभी लोगों में दिखाई देता है।

मंदिरों का शहर

जम्मू तवी नदी के किनारे बसा शहर जम्मू का नाम सुनते ही सबसे पहले जो चित्र उभरता है, वह माता वैष्णो देवी धाम का होता है। त्रिकुटा पर्वत पर बसा यह धाम लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। जम्मू में मंदिरों की संख्या बहुत है। यहां स्थित रघुनाथ मंदिर, रणवीरेश्वर मंदिर, भावेवाली माता मंदिर, पीर खो गुफा मंदिर हैं। माता वैष्णो देवी का दर्शन करने के बाद लोग जम्मू में इन मंदिरों का भ्रमण भी करते हैं। रघुनाथ मंदिर क्षेत्र पर्यटकों के लिए भगवान श्रीराम के दर्शन और खरीदारी के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर से लगी हुई दुकानों से लोग कपड़े और सूखे मेवे खरीदते हैं। यहां बहुत अच्छे किस्म के सूखे मेवे मिलते हैं। इसके साथ ही साथ यहां श्राइनबोर्ड यात्री निवास भी संचालित करता है। ये कालिका भवन, सरस्वती भवन जैसे नामों से जाने जाते हैं।

खंड मिट्ठे लोग डोगरे

जम्मू क्षेत्र को डुग्गर क्षेत्र कहा जाता है। यहां के निवासियों के बारे में प्रसिद्ध गायक महेंद्र कपूर ने अपने गीत “मिट्ठड़ी ऐ डोगरे दी बोली, ते खंड मिट्ठे लोग डोगरे” में बहुत ही सुंदर वर्णन किया है। यहां चलने वाले वाहनों, प्रमुख स्थलों पर यह पंक्ति पढ़ने को मिल जाती है। जम्मू स्मार्ट सिटी द्वारा संचालित सभी ई-बसों में “खंड मिट्ठे लोग डोगरे” टैगलाइन देखी जा सकती है। डुग्गर क्षेत्र के लोगों की बोली मीठी और उनका स्वभाव सरल होता है। यहां के लोगों की वीरता की बात की जाए, तो भारतीय सेना में डोगरा एक पूरी रेजिमेंट बनाई गई है। प्राकृतिक रूप से पहाड़ों में बसने के कारण यहां के लोग बहुत ही मेहनती होते हैं।

जनपद और राज्य एक नाम

जहां तक जानकारी है, जम्मू ही ऐसा जनपद है जो राज्य के नाम पर है। देश में कोई भी ऐसा जनपद नहीं है। यह बाहर के लोगों के लिए परेशानी का सबब भी बन जाता है। लोग जम्मू जनपद और जम्मू केंद्र शासित राज्य के बारे में अंतर नहीं कर पाते हैं।

बर्फ से दूर

जम्मू जनपद पहाड़ और मैदान के बीच का हिस्सा है। यहां वैसी ही गर्मी होती है, जैसी मैदानी क्षेत्रों में होती है। यह सही है कि गर्मी का अहसास यहां अप्रैल माह के बाद तक होता है। अप्रैल तक मौसम खुशनुमा बना रहता है। जम्मू जनपद आम तौर पर आतंकवाद से भी मुक्त है और यहां ऐसी घटनाएं देखने को नहीं मिलती हैं।

खट्ठा-मीठा कद्दू का अंबल

कद्दू की सब्जी, तो सभी ने खाई होगी लेकिन यहां कद्दू का अंबल बनाया जाता है। अंबल कद्दू की रसेदार सब्जी होती है, जिसे यहां हर शुभ अवसर पर बनाया जाता है। इसके बिना किसी भी कार्यक्रम की कल्पना नहीं की जा सकती है। खाने में यह खट्टा-मीठा लगता है और लोग बहुत ही स्वाद से खाते हैं। अंबल को चने की दाल के साथ खाया जाता है। यहां के पारंपरिक भोजन में कड़म का आचार, राजमा-चावल और कालाड़ी कुलचा का भी बहुत महत्व है। मिठाई के रूप में यहां पर मदरा का उपयोग किया जाता है। मदरा दूध से बनी मिठाई होती है, जो देखने में खीर की तरह लगती है।

पहनावे में डोगरी संस्कृति

महिलाओं के लिए डोगरी सूट यहां का पारंपरिक पहनावा होता है। डोगरी सूट कुर्ता और चूड़ीदार पाजामा और कढ़ाई वाला दुपट्टा होता है। दुपट्टे का बॉर्डर चमकीला और भारी होता है। डोगरी पगड़ी यहां की शान मानी जाती है। यह पगड़ी ऊपर की ओर उठी हुई और आगे को झुकी हुई होती है। किसी भी विशेष अवसर पर यहां लोग इसे शान से पहनते हैं और पगड़ी को सम्मान का प्रतीक माना जाता है। 

कलात्मक विविधता

जम्मू में कलात्मक विविधिता देखी जा सकती है। जम्मू-कश्मीर की पेंटिंग शैली को ‘पथर कला’ या पट्ट चित्रकला कहा जाता है। इस कला में प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है और विषय आम तौर पर धार्मिक या ऐतिहासिक होते हैं। जम्मू में विशेष रूप से ‘राजस्थान शैली’ और ‘कश्मीर शैली’ की कला का प्रभाव देखा जाता है। यहां की मूर्ति कला में देवताओं की मूर्तियों को आकार में बड़ा और देवियों की मूर्तियों को छोटा बनाया जाता है। यहां के सभी मंदिरों में यह देखा जा सकता है।

डॉ. उमेश कुमार

(एसिस्टेंट प्रोफेसर, जन संचार एवं नवीन मीडिया विभाग, जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय)

 

 

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