पहली बार सितंबर 2025 में कैपिटल हिल के सामने खड़ी मरीना लैसरडा ने जेफरी एपस्टीन के हाथों अपने यौन शोषण के बारे में सरेआम अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा, ‘‘इतने वर्षों बाद मेरे मन से बोझ हट गया है।’’ 2019 में एपस्टीन के खिलाफ फेडरल जांच में लैसरडा का जिक्र ‘‘नाबालिग पीडि़त 1’’ है। उन्हें 2002 में एपस्टीन ने नौकरी पर रखा था, तब वे सिर्फ 14 साल की थीं। एक दोस्त ने उन्हें सुझाव दिया कि वे एक अमीर आदमी को ‘मसाज’ देकर 300 डॉलर कमा सकती हैं। वे याद करती हैं, ‘‘उसने काम को साफ-सुथरा बताया था।’’ वे 13 साल की उम्र से ही काम करने लगी थीं, फैक्ट्री में नौकरी, वेट्रेस का काम, बैकग्राउंड मॉडलिंग, ऑफिस का काम वगैरह-वगैरह। परिवार का गुजारा चलाना उन्हीं के जिम्मे था। लैसरडा ने बताया, ‘‘14 साल की उम्र में घर का बोझ मुझ पर था। मुझे बस पैसे कमाने थे।’’
वे एपस्टीन के मैनहट्टन मेंशन पहुंचीं, तो हैरान रह गईं। विशाल लकड़ी का दरवाजा। वेटिंग रूम में नेताओं, राज परिवारों और राष्ट्रपतियों जैसे रसूखदारों की तस्वीरें लगी थीं। छत पर नग्न औरतों के ब्लैक-ऐंड-व्हाइट स्केच वाला हॉलवे था। मसाज रूम में विक्टोरिया सीक्रेट ब्रांड के लोशन थे जिसमें कुछ से वे वाकिफ थीं, कुछ से नहीं।
वे बताती हैं, “मुझे याद है कि मैं छत की ओर देख रही थी। बड़ा सुंदर और सुखद लग रहा था। मैं कितनी नासमझ थी!” लैसरडा ने कहा कि उसके बाद जो हुआ, वह उनसे किए गए वादे जैसा बिल्कुल नहीं था। जब हदें बढ़ीं, तो वे जम गईं। उन्होंने सिर हिलाकर मना कर दिया। एपस्टीन मुस्कराया और कहा, “धीरे-धीरे सहज हो जाओगी।” एक दोस्त ने उन्हें “तनाव” न लेन को कहा। वे कहती हैं, “तब मैंने मन में सोचा था, यह आदमी तो हैवान है। मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी।” वे 300 डॉलर लेकर लौट आईं। लेकिन घर का खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा था, उनकी मां कोई काम करने के काबिल नहीं थीं, इसलिए दोबारा कॉल आया, तो वे चली गईं।
वे बताती हैं, दूसरी बार उसने पहले कुछ नहीं कहा। बड़ी विनम्रता से पेश आया था। फिर, धीरे-धीरे हदें धुंधली होती गईं। बस हल्के-हल्के, एक-एक कदम। फिर, वे कहती हैं, “इससे पहले कि मुझे पता चलता, मेरा रेप हो रहा था और मुझे पता भी नहीं पता चला कि कैसे होने लगा।”
वर्षों बाद, उन्होंने दूसरी पीडि़तों से बात करनी शुरू की, तो कुछ ऐसा एहसास हुआ जिससे वे हैरान रह गईं। उन्हें याद आया कि, “उन सबने कहा कि उसने उनके साथ रेप किया था।” लेकिन फोन पर एक लड़की चुप हो गई। उन्होंने धीरे से कहा, “तुम क्या बात कर रही हो मरीना, जेफरी एपस्टीन ने हम लोगों के साथ बलात्कार किया?”
बात वहीं अटकी रही। दूसरी ओर से पीडि़ता ने चेताया कि वह उन्हें अलग-थलग करके ऐसी स्थिति में ला देगा कि दूसरे दुर्दशा देख डरेंगे। वे हक्का-बक्का थीं और सोचा, “ऐसा ही होता है। अच्छी लड़की ऐसी ही होती है, बिल्कुल मरीना जैसी।” उसके बाद, वे कहती हैं, कुछ भूला नहीं, बस ठहर गया, दफन हो गया। मुझे लगता है कि मन को लगा सदमा यही कर देता है।”

मुखर आवाजः वर्जीनिया रॉबर्ट्स गिफ्रे ने अपने अनुभवों पर नोबडीज गर्ल पुस्तक लिखी
लैसरडा उन कई महिलाओं में हैं, जिनका एपस्टीन ने नाबालिग उम्र में यौन शोषण किया था। एपस्टीन अमेरिकी फाइनेंसर था, जो नाबालिग लड़कियों के शोषण का धंधा चलाता था। 2008 में, फ्लोरिडा की अदालत में उसने कबूला कि उसने एक नाबालिग को वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया था। उसे 13 महीने की सजा हुई। दोबारा उसे जुलाई 2019 में फ्लोरिडा और न्यूयॉर्क में बाल तस्करी के लिए संघीय कानून के तहत गिरफ्तार किया गया। मैनहट्टन जेल की कोठरी में 10 अगस्त 2019 को उसकी मौत हो गई, जिसे खुदकशी बताया गया।
लैसरडा कहती हैं, “मैं खुश थी, दुखी और गुस्से में थी, उलझन में थी। मैं सदमे में थी। मैं रोई।” 16 साल की उम्र में एपस्टीन के शोषण का शिकार हुईं पीडि़ता हेली रॉबसन उसकी मौत की खबर सुनकर खुद को संभाल नहीं पाईं, “मैं बस जम-सी गई। मैं बिस्तर पर बैठकर रोती रही।”
उन्होंने आगे कहा, “जेफरी की मौत तो बस एक थी। मुझे नहीं लगता कि वह अकेले जिम्मेदार था।” उन्होंने कहा कि एपस्टीन की लंबे समय की साथी रहीं घिसलेन मैक्सवेल ने खास और अहम भूमिका निभाई। रॉबसन ने मैक्सवेल को “ड्रैगन की सरगना” बताया और आरोप लगाया कि वही एपस्टीन को “खिला-पिला कर पाल-पोस रही थी” और उसके लिए सारी व्यवस्थाएं करती थी।
मैक्सवेल को 2020 में गिरफ्तार किया गया और 2021 में एपस्टीन के लिए नाबालिग लड़कियों की यौन तस्करी और उससे जुड़ी साजिश के आरोपों में दोषी ठहराया गया। उसे 2022 में 20 साल जेल की सजा सुनाई गई।
लैसरडा की तरह रॉबसन को भी “मसाज” के लिए बुलाया गया था, यह बताकर कि एपस्टीन नासा का वैज्ञानिक है। तब वे 16 साल की थीं। उनके परिवार की माली हालत अच्छी नहीं थी और मां-बाप का सहारा नहीं था। उन्हें पैसे कमाने थे और खुद ही अपने को संभालना भी था। वे 2002 में स्कूल से निकल रही थीं, तो एक आदमी उनके पास आया, जिसके साथ एक नाबालिग लड़की थी और उसने एक काम के लिए 200 डॉलर देने का वादा किया। इस तरह वे एपस्टीन के पाम बीच मेंशन पहुंची, जिसे “बिलियनेयर्स बीच” यानी अरबपतियों का ऐशगाह कहा जाता था। उस विला के अंदर नाबालिगों की नग्न तस्वीरें और मूर्तियां देखकर शुरू में वे हैरान रह गईं; उन्हें लगा कि तस्वीरें वहीं के बच्चों की हैं।
पहली मुलाकात जल्दी ही दु:स्वप्न में बदल गई, जो दशकों बाद भी उन्हें दहलाती रहती है। रॉबसन ने बताया कि शुरू में एपस्टीन ने प्यार-दुलार दिखाने की चालाकी दिखाई, और भरोसा दिलाने के लिए उसे “अच्छी लड़की” कहा। वे बताती हैं कि फिर उसने कहा कि यहां उसे “हर तरह से” आराम दिलाने के लिए लाया गया है।
उन्होंने कहा, “मुझे आज 16 साल की लड़की की मनोदशा सोचकर काफी पछतावा है, जिसे लगा था कि वह हमदर्दी की दो-चार बातों से खुश हो गई थी, लेकिन वह कोरा छलावा था, मुझे तैयार करने का तरीका।” आखिरकार, दुराचार धौंस-धमकी में बदल गया: दूसरी लड़कियों को बहलाकर लाओ वरना बुरी गत हो जाएगी। उस धमकी के बाद रॉबसन ने कम से कम आठ लड़कियों को उससे मिलवाया।
लैसरडा ने याद किया कि कैसे उसने उसकी कमजोरी का फायदा उठाया। उसने कहा, “मुझे पता है कि तुम्हें पैसों की जरूरत है। मुझे पता है कि तुम मुश्किल वक्त से गुजर रही हो। मुझे पता है कि तुम यहां के बारे में किसी को बताने की जुर्रत नहीं कर सकती हो। तुम्हें मेरी जरूरत है।” फिर कहा कि कमाई जारी रखना चाहती हो तो दूसरी लड़कियां लाओ।
लैसरडा बुरी तरह घिर चुकी थीं। उन्हें याद नहीं कि वे कितनी लड़कियों को ले आई थीं। “इस तरह मैं एपस्टीन की दुनिया में जुड़ गई।”
वह उनकी जिंदगी के लगभग हर हिस्से को कंट्रोल करता था। वह उन्हें शराब पीने या ड्रग्स लेने से मना करता था, और अगर उसे शक होता कि उन्होंने ऐसा किया है तो वह उनके बालों के स्ट्रैंड्स का टेस्ट करने की धमकी देता था। वह उन्हें कैब सर्विस इस्तेमाल करने से रोकता था क्योंकि वे रिकॉर्ड रखती थीं। बकौल उनके, इससे साफ है कि वह कहीं कोई निशान न छोड़ने को लेकर सतर्क था।
वह उन्हें इमोशनली भी मैनिपुलेट करता था। लड़कियों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करता था, उनमें झगड़े लगाता था। वह किसी की तारीफ ‘‘शानदार’’ कहकर करता था या तुलना करता था कि कौन कितनी लड़कियां लाई, जिससे शोषण होड़ में बदल जाता था।
आप्रवासी होने के नाते लैसरडा को उस तरह ट्रैफिकिंग का शिकार नहीं होना पड़ा, जैसा दूसरों को होना पड़ा। बकौल उनके, एक दिन एपस्टीन ने उन्हें एक दूसरी लड़की के साथ अपने बेडरूम में बुलाया, जो थोड़ा अजीब था, क्योंकि वहां कम ही बुलाया जाता था। वहां एक औरत को उसने अपना ‘‘दोस्त’’ बताया। लैसरडा को बाद में पता चला कि वह मैक्सवेल थी।
उन्होंने कहा, “उन दोनों ने हमारा रेप किया।” लैसरडा के साथ यह दुराचार लगभग तीन साल तक चलता रहा और बाद में वे वहां से निकल पाईं। एपस्टीन ने आखिरकार उन्हें जाने दिया क्योंकि वे उसके लिए “बहुत बड़ी” हो गई थीं। उन्हें याद आया कि एपस्टीन ने कहा था, “तुम अब मजेदार नहीं रही। तुम मेरे लिए सही उम्र की लड़कियां नहीं लाती।” उसने उन पर 13 से 15 साल की लड़कियां लाने का दबाव डाला।
रॉबसन भी 2004 में 18 साल की हुईं तो बाहर निकल गईं। उन्होंने कहा, “मैं डरी हुई थी, लेकिन अब बहुत हो गया था।” डरते-डरते वे बाहर चली गई। “मुझे एहसास हुआ कि मुझे यहां रहने की जरूरत नहीं है। मैं जा सकती हूं और जो भी नतीजे होंगे, उनसे निपट सकती हूं।” उन्होंने बताया कि 2006 में उनके बॉयफ्रेंड की हत्या कर दी गई।
उन्होंने कहा कि यह सदमा उनकी जिंदगी में बना रहा। उसके बाद वे एक बुरे रिश्ते में फंस गईं। प्रेग्नेंट होने पर उनको मारा-पीटा गया। उन्होंने कहा, “मुझे कई बार पुलिस को फोन करना पड़ा। मुझे तलाक लेने में चार साल लग गए। मैं बहुत लकी हूं कि मैं उन कुछेक में से हूं, जो बच निकलीं।”
आज, दोनों औरतें बेटियों की मां हैं और उनको लेकर काफी चिंतित रहती हैं। परिवारों के साथ उनके रिश्ते तनावपूर्ण हैं, रॉबसन पूरी तरह से कटी हुई हैं।
लैसरडा ने कहा, “मैं हर मां-बाप से कहती हूं कि अपने बच्चों को सीमाएं बतानी चाहिए। मसलन, तुम मुझसे ऐसे बात मत करो, तुम मुझे ऐसे मत छुओ, वगैरह।” वे बेटी की हरकतों पर नजर रखती हैं और फोन पर रोक लगाती हैं। उन्होंने कहा, “इंटरनेट खतरनाक है।”
रॉबसन भी ऐसे ही नियम मानती हैं, सिर्फ दो भरोसेमंद परिवारों के साथ ही मिलने-जुलने की इजाजत देती हैं और अपनी बेटी की डिजिटल जिंदगी पर करीब से नजर रखती हैं। जब वे पहली बार मां बनीं, तो उन्हें अक्सर बुरे सपने आते थे। “शुरुआत में मैं डरकर उठ बैठती थी, सपने में जेफरी चुपके से मेरे घर में घुसकर मेरी बेटी को बिस्तर से उठाकर ले जा रहा होता था।”
लड़ाई अब भी जारी
लगभग तीन दशकों से एपस्टीन के पीडि़त चुप्पी के बजाय बोलना चुन रहे हैं। लेकिन उन्हें न्याय मिलना तो दूर, शुरू में न तो उनकी बात सुनी गई और न ही उन पर विश्वास किया गया। सबसे पहले सार्वजनिक मंच पर बोलने वालों में से वर्जीनिया रॉबर्ट्स गिफ्रे थीं, जिन्होंने 2011 में बताया था कि कैसे एपस्टीन और उसकी साथी घिसलेन मैक्सवेल ने नाबालिग उम्र में उनकी ट्रैफिकिंग की थी।
गिफ्रे ने कहा कि उन्हें वर्षों तक एपस्टीन के ‘‘सेक्स स्लेव’’ के तौर पर रहने के लिए मजबूर किया गया। न केवल एपस्टीन और मैक्सवेल ने बल्कि सियासत, बिजनेस, अकादमिक और शाही परिवारों के ताकतवर लोगों के साथ भी उन्हें सेक्स के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने बताया कि उन्हें अलग-अलग देशों में ले जाया गया, और डरा-धमकाकर चुप करा दिया गया। आखिरकार, वे भाग निकलीं और ऑस्ट्रेलिया में अपनी जिंदगी फिर शुरु की। उनकी हिम्मत ने दूसरों के लिए रास्ते खोल दिए। कई लोगों को खुलकर बोलने और शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत दी गई। अप्रैल 2025 में, 41 साल की उम्र में उन्होंने खुदकशी कर ली। यह संकेत है कि सदमा कितने लंबे समय तक रहता है।
कोर्ट के दस्तावेजों में खौफनाक दास्तानें दर्ज हैं। 4 नवंबर, 2010 को दिए गए बयान में बताया गया कि एपस्टीन ने 2002 और 2005 के बीच फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में अपने बंगले में ‘‘चालीस से ज्यादा नाबालिग लड़कियों का बार-बार यौन शोषण किया।’’ उनमें कई के साथ दर्जनों, यहां तक कि सैकड़ों बार कुकर्म काम किया गया। वेब सीरीज, जेफरी एपस्टीन: फिल्दी रिच में बताया गया है कि जांचकर्ता इसे ‘मोलेस्टेशन पिरामिड स्कीम’ कहते थे।
मनोवैज्ञानिक कैथरीन स्टैमौलिस के मुताबिक, डर के मारे कई चुप रहीं और फंसती चली गईं। स्टैमौलिस, न्यूयॉर्क में लाइसेंसशुदा मेंटल हेल्थ काउंसलर हैं जिनकी विशेषज्ञता नाबालिग मनोविज्ञान में है। वे एपस्टीन के कई पीडि़तों के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि शुरू में लड़कियों की कमजोरी जानने के लिए अच्छा बर्ताव करके उनका भरोसा जीता जाता था और फिर फंसा लिया जाता था। उन्होंने बताया कि एपस्टीन ‘‘लोगों की अधूरी जरूरतों को ढूंढने और उनका फायदा उठाने में माहिर था,’’ वह ऐसे नाबालिगों की तलाश करता था जो पैसे की कमी से जूझ रही हों, अकेली हों, या कोई सहारा न हो।
एपस्टीन के पुराने कर्मचारी अल्फ्रेडो रोड्रिगेज ने बाद में जांचकर्ताओं को एक खास मोटा नोटबुक मुहैया कराया, जिसमें पूरे अमेरिका और विदेश, मिशिगन और कैलिफोर्निया से लेकर न्यूयॉर्क, न्यू मैक्सिको, वेस्ट पाम बीच और पेरिस तक की कई लड़कियों के नाम थे। इससे उसके व्याभिचार तंत्र के विशाल दायरे और पैमाने का पता चलता है।
एपस्टीन की 2019 की गिरफ्तारी से बहुत पहले, मारिया फार्मर जैसी महिलाओं ने 1996 में एफबीआइ में उसके बारे में शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी बहन एनी फार्मर, सारा रैनसम और कई अन्य ने भी अधिकारियों को आगाह करने की कोशिश की थी। उन्होंने बदनाम करने की करतूतों, शर्मिंदा करने और लगातार कानूनी धमकियों की परवाह नहीं की और डटी रहीं।
एपस्टीन की मौत के बाद भी इंसाफ अधूरा है। कैपिटल हिल पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में तमाम पीडि़त एक साथ खड़ी हुईं और मांग की कि डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस सभी फाइलें जारी करे और कथित अपराधियों के नाम बताए। अमेरिका में रहने वाली टेक वकील और भारत में सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर की संस्थापक मिशी चौधरी जैसों की दलील है कि पूरी जानकारी देने का विकल्प पीडि़तों के पास ही रहना चाहिए था। उन्होंने कहा, “पीडि़तों को बोलने की आजादी चाहिए... बिना किसी डर या कलंक के।”
स्टैमॉलिस का यह भी कहना है कि अमेरिका का डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस का यह रवैया आला दर्जे की नाइंसाफी है कि “पीडि़तों के नाम तो सार्वजनिक हों लेकिन अपराधियों के नाम छिपा लिए जाएं। यह क्या दिखाता है कि पीडि़तों की पहचान दुराचार करने वालों की तुलना में कम सुरक्षा की हकदार है।”
एक सभा में पीडि़त लिसा फिलिप्स ने कहा, “सालोसाल बीत गए, लेकिन महिलाओं के लिए आगे बढ़ना आसान नहीं है। यह दौर तब तक खत्म नहीं होता जब तक हम यह न कहें कि खत्म हो गया है।”
लैसरडा ने भी यही कहा, “हमें उन सभी को सामने लाना होगा जिन अपराधियों के बारे में हम जानते हैं। हमें उन्हें इंसाफ के कटघरे में लाना होगा। उन्हें कोर्ट में अपना दिन देखना होगा।” पीडि़तों के लिए मामला किसी एक आदमी का नहीं था, उसके केंद्र में ऐसा तंत्र था जिसने उसे ताकतवर बनाया। उनका कहना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। आज सबसे जरूरी समाज और सत्तातंत्र में व्याप्त शोषण और दुरुपयोग का खुलासा है, ताकि ऐसे हैवान फिर न पनपें।