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17 मार्च 2025 · MAR 17 , 2025

सोशल मीडिया: अश्लील बोल के बहाने

यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया की आपत्तिजनक बोली पर उठे शोर-शराबे के क्या मायने
अश्लीलता के नए सितारे

मनोरंजन और खुलेपन के नाम पर इंटरनेट पर क्या परोसा जा रहा है और इसके किरदार खुद को चर्चा में कैसे-कैसे बनाए रखते हैं, इसकी ताजा मिसाल समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया नाम के दो सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। दोनों एक अश्लील सवाल से विवादों में आ गए और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। इसी के साथ ओटीटी तथा सोशल मीडिया पर कंटेंट नियंत्रण का सवाल फिर पूछा जाने लगा। क्या सोशल मीडिया पर इस तरह की भद्दी और अश्‍लील बातें आसानी से की जा सकती हैं? क्या इस विवाद के बहाने इस माध्यम पर सरकारी नियंत्रण होना चाहिए? सोशल मीडिया पर नियंत्रण की सरकारी कवायदें इस मामले से पहले भी हो चुकी हैं। लेकिन आलोचनाओं के चलते सिरे नहीं चढ़ पाई? अब यह सवाल इसलिए भी बड़ा बन गया है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार सरकार को नियंत्रण के सूत्र पकड़ा दिए हैं। 

बीते दिनों स्टैंड अप कॉमेडियन समय रैना के युट्यूब पर आने वाले एक शो, ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में इन्फ्लुएंसर रणवीर इलाहाबादिया ने एक प्रतिभागी पूछा, “तुम अपने माता-पिता को आजीवन संभोग करते देखना चाहोगे या फिर उनके सामने जाकर हमेशा के लिए उनका संभोग करना बंद करना चाहोगे?” हालांकि यह टिप्पणी पश्चिम के किसी शो में पहले कही जा चुकी है, जिसे शायद खुद को बोल्ड दिखने या किसी और मंशा से रणवीर ने कह डाली थी।

इलाहाबादिया इस शो में बतौर मेहमान शामिल हुए थे। इस पर इलाहाबादिया के साथ मंच पर जो थे, जोर से ठहाके लगाने लगे। देखते ही देखते सवाल पर बवाल हो गया और रणवीर पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी। कई हस्तियों को भी रणवीर का सवाल नागवार गुजरा और एक सुर में इस तरह के ‘एक्ट’ की भर्त्सना होने लगी। आलोचनाओं से घिरे रणवीर गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। हालांकि कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से राहत तो दी, मगर कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि उन्हें अपना पासपोर्ट ठाणे पुलिस स्टेशन में जमा कराना होगा और जांच में पूरा सहयोग करना होगा। उन्हें पुलिस अधिकारियों के बुलाने पर पूछताछ के लिए तुरंत पेश होना होगा। साथ ही उन्हें निर्देश दिया गया कि वह और उनके साथी फिलहाल कोई भी शो प्रसारित न करें। रणवीर के कोर्ट की अनुमति के बिना देश से बाहर जाने पर भी रोक ला दी गई है।

खराब पसंदः अश्लील चुटकुले पर इंडियाज गॉट लेटेंट की टीम को नोटिस

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‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के एपिसोड में सोशल मीडिया और इसी माध्यम पर चर्चित हस्तियां बुलाई जाती हैं। इस शो का जॉनर डार्क कॉमेडी है। हाल के दिनों में यह डार्क कॉमेडी शब्द खूब प्रचलित है। इसका आसान भाषा में मतलब होता है, ‘शो में गाली-गलौज और अश्लील बातें कर हास्य पैदा किया जा सकता है। राखी सावंत से लेकर भारती सिंह और रैपर बादशाह तक समय रैना के शो में शामिल हो चुके हैं। इसी कड़ी में रणवीर इलाहाबादिया भी शो में पहुंचे थे। वैसे, रणवीर का इलाहाबाद से कुछ लेनादेना नहीं हैं। वे मूल रूप से रणवीर अरोड़ा है। सोशल मीडिया पर उनके अच्छे खासे फॉलोवर हैं। वे अपने पॉडकास्ट में, नामचीन और कामयाब फिल्मी, राजनैतिक हस्तियों का इंटरव्यू करते हैं। उनके यूट्यूब चैनल पर नेता, खिलाड़ी, अभिनेता और उद्योगपति, धर्मगुरु सभी पहुंचते हैं। रणवीर अपने कंटेंट के कारण युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। उनकी लोकप्रियता और इंस्टाग्राम फॉलोवर की संख्या और सोशल मीडिया में उनकी प्रसिद्धि को देखते हुए हुए ही पिछले दिनों दिल्ली में हुए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे इन्फ्लुएंसरों से साथ उन्हें भी सम्मानित किया था।

रणवीर ने शो में जब सवाल पूछा, तो जोरदार ठहाका लगा था। उस वक्त उन्हें जरा उम्मीद नहीं थी कि इस ठहाके की गूंज उन्हें इतनी महंगी पड़ेगी। अक्सर अपने पॉडकास्ट में हिंदुत्व, सनातन धर्म और आध्यात्मिकता की बातें करने वाले रणवीर की इस हरकत पर लोग इतने आहत हुए कि उनके लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग करने लगे।

सोशल मीडिया पर गुस्सा इतना ‘वायरल’ हो गया कि रणवीर और रैना की मुश्किलें बढ़ती गईं। आलोचना और विरोध के साथ दोनों को जान से मारने की धमकी मिलने लगी। मामले की गंभीरता भांपते हुए रणवीर पहले तो घर छोड़ कर गायब हुए और बिना देरी किए सोशल मीडिया पर अपने बिना शर्त माफीनामे का एक वीडियो अपलोड कर अपनी गलती स्वीकार कर ली। समय रैना भी इसमें नहीं चूके और उन्होंने फौरन अपने यूट्यूब चैनल से शो के सभी एपिसोड डिलीट कर दिए।

रणवीर पर असम, जयपुर में दर्ज हुई एफआइआर के बाद पुलिस जब उनसे पूछताछ के लिए न अपने घर में मिले, न फोन उठाया। रणवीर के वकील अभिनव चंद्रचूड़ ने जस्टिस सूर्यकांत और एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच के सामने अपनी दलील रखी। जस्टिस सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी की, ‘‘आप थोड़े से प्रसिद्ध हो गए हैं, तो क्या आपको कुछ भी बोलने का लाइसेंस मिल गया है? आपने जिस तरह की अश्लीलता भरी बातें कही हैं, वह आपके दिमाग की गंदगी को दिखाता है। माता-पिता को लेकर भी बेहद आपत्तिजनक बातें कही हैं। अगर यह अश्लीलता नहीं है तो और क्या है? हम इस तरह के व्यक्ति की सहायता आखिर क्यों करें?’’

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने सभी एफआइआर को एक साथ जोड़ने की रणवीर की मांग पर महाराष्ट्र और असम सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में रणवीर के वकील ने बताया कि रणवीर और उसके साथियों को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। एक व्यक्ति ने तो जुबान काट कर लाने वाले के लिए ईनाम की घोषणा की है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से रणवीर की सुरक्षा का इंतजाम करने को कहा है। महाराष्ट्र साइबर सेल ने रणवीर को 24 फरवरी को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था। समय रैना को वीडियो कांफ्रेंस के जरिये बयान दर्ज कराने की अनुमति नहीं मिली। रैना ने कहा है कि वे अमेरिका में हैं और 17 मार्च से पहले भारत नहीं लौट पाएंगे, लेकिन महाराष्ट्र पुलिस की साइबर सेल ने रैना को व्यक्तिगत रूप से अपना बयान दर्ज कराने के लिए कहा है।

रणवीर और रैना के साथ यूट्यूबर आशीष चंचलानी, इन्‍फ्लुएंसर अपूर्वा मखीजा और ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ की टीम पर भी केस हुआ है। सभी को मुंबई के खार पुलिस स्टेशन में बुलाकर पूछताछ की गई है। इस मामले के बहाने देश भर में अश्लीलता की बहस छिड़ गई है। सरकार इसके बहाने ऑनलाइन कंटेंट पर शिकंजा कसने के लिए नए कानूनी ढांचे पर विचार कर रही है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति को इस बारे में सूचित कर दिया है। इससे पहले निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली इस समिति ने सूचना-प्रसारण सचिव और अन्य अधिकारियों से अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए सरकार के प्रस्तावित कदमों का विस्तृत मसौदा प्रस्तुत करने को कहा था। कई हलकों में सवाल उठ रहा है कि कहीं सरकार राजनैतिक रूप से अप्रिय खबरों और टिप्‍पणियों को रोकने का इसे साधन तो नहीं बनाएगी।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि क्या कानून बना देने भर से ये युवा सुधर जाएंगे। जिन लोगों को अपने समाज, आसपास के माहौल का खयाल नहीं क्या वे सिर्फ कानून से डरेंगे। कानून से ज्यादा जरूरी है कि स्कूलों और कॉलेजों में समाज के कायदे पढ़ाए जाएं और नैतिक-अनैतिक की किताबी व्याख्या के बजाय सामाजिक व्याख्या समझाई जाए। शायद तब कोई हल निकले। और इससे भी जरूरी है कि इन वारदातों के बहाने राजनैतिक बंदिशें न थोपी जाएं, ताकि प्रतिकूल कंटेंट पर अंकुश लगे।

 

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