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24 जुलाई 2023 · JUL 24 , 2023

टाइटन हादसा: ले डूबा टाइटैनिक

अटलांटिक महासागर, 4000 मीटर की गहराई और 1912 में डूबे टाइटैनिक जहाज का मलबा, देखने की अमीर-उमरां की लालसा ऐसी कि हाल में पांच धनी-मानी की टाइटन पनडुब्बी के साथ हुई जल समाधि
खोज अभियानः टाइटन पनडुब्बी की तलाश में कनाडा के न्यूफाउंडलैंड के पास अटलांटिक मर्लिन जहाज

टाइटैनिक जहाज का जादू है कि खत्म ही नहीं होता। इस जहाज को डूबे सौ साल से भी ज्यादा हो गए हैं। जहाज का नाम बाकी है और बाकी है इसका कुछ मलबा, लेकिन लोगों की उत्सुकता इसमें खत्म नहीं होती, भले ही इसके लिए जीवन क्यों न खत्म हो जाए। बीते 18 जून को दुनिया के पांच अरबपति टाइटैनिक का मलबा देखने टाइटन पनडुब्बी में बैठकर समुद्र में उतरे और फिर वापस नहीं आ सके। समुद्र में उतरने के दो घंटे के बाद ही उनकी पनडुब्बी का संपर्क टूट गया और 22 जून को घोषणा की गई कि पनडुब्बी फट गई है और उसमें सवार पांचों लोग मारे गए। मारे गए लोग दुनिया के अरबपतियों में थे। टाइटन त्रासदी में जान गंवाने वालों में इस अभियान का संचालन करने वाली कंपनी ओशनगेट के सीईओ स्टॉकटन रश, जो पनडुब्बी के पायलट भी थे, के साथ ब्रिटिश व्यवसायी हामिश हार्डिंग, पाकिस्तानी के सबसे अमीर परिवारों में से एक के सदस्य शहजादा दाऊद, शहजादा के बेटे सुलेमान दाऊद और पूर्व फ्रांसीसी नौसेना अधिकारी, टाइटैनिक विशेषज्ञ पॉल-हेनरी नार्जियोलेट शामिल हैं।

शहजादा दाऊद, सुलेमान, पॉल-हेनरी नार्जियोलेट, स्टॉकटन रश और हामीश हार्डिंग

शहजादा दाऊद, सुलेमान, पॉल-हेनरी नार्जियोलेट, स्टॉकटन रश और हामीश हार्डिंग

पनडुब्बी का संपर्क टूटते ही अमेरिका सहित कनाडा, फ्रांस और ब्रिटेन के तटरक्षक जी जान से इसका पता लगाने में जुट गए। यह पनडुब्बी अटलांटिक महासागर में 4,000 मीटर की गहराई में टाइटैनिक जहाज के मलबे के खोज अभियान पर थी। अमेरिकी तटरक्षक के अनुसार टाइटन अटलांटिक महासागर में टाइटैनिक के मलबे से कुछ ही दूरी पर फट गया था।

इस भयानक हादसे के बाद दुनिया भर में ऐसे जानलेवा अभियानों को लेकर बहस छिड़ गई। क्या जान जोखिम में डाल कर इस तरह के खतरनाक अभियान पर जाना या इसे चलाया जाना समझदारी भरा है? लेकिन रोमांच-प्रेमियों को इससे कतई फर्क नहीं पड़ता। टाइटन भी टाइटैनिक की तरह ही बहुत उत्साह और रोमांच से भर कर अपनी यात्रा पर निकली थी, लेकिन चंद घंटों बाद ही टाइटन के गुम होने की खबर दुनिया के तमाम देशों में सुर्खियां बन गई। टाइटन के लापता होने की सूचना मिलने के तुरंत बाद ही एक खोज अभियान शुरू हुआ जिसमें अमेरिका और कनाडा की नौसेना और वायु सेना को इस काम में लगाया गया। कई निजी गोताखोरों की भी इसमें सेवाएं ली गईं।

टाइटन त्रासदी

टाइटैनिक के मलबे की खोज में निकली टाइटन पनडुब्बी को 18 जून को लॉन्च किया गया था और लगभग 1 घंटे 45 मिनट बाद ही यह लापता हो गई। टाइटैनिक का मलबा अटलांटिक महासागर की तलहटी में लगभग 4,000 मीटर की गहराई में है। टाइटन इसी मलबे को “दिखाने” निकला था। टाइटन केप कॉड से लगभग 900 मील (1,448 किलोमीटर) पूर्व और कनाडा के न्यू़फाउंडलैंड की राजधानी सेंट जॉन्स से 400 मील (643 किलोमीटर) दक्षिण-पश्चिम में लापता हुआ। मलबे की जगह न्यूफाउंडलैंड से लगभग 740 किमी दूर है। ओशनगेट कंपनी 2021 से टाइटैनिक के मलबे पर काम कर रही है और हर साल लोगों को टाइटैनिक का मलबा दिखाने ले जाती है। ओशनगेट 2021 से हर साल टाइटैनिक के मलबे और उसके आसपास के ईको सिस्टम के बारे में बताती रही है। नॉरफॉक, वर्जीनिया में अमेरिकी जिला न्यायालय में कंपनी द्वारा दायर पत्रों के अनुसार, “2021 और 2022 में कम से कम 46 लोगों ने ओशनगेट की पनडुब्बी से टाइटैनिक के मलबे वाली जगह तक सफलतापूर्वक यात्रा की है।”

टाइटन के साथ क्या हुआ

हादसे की विस्तृत जांच से ही सवालों के जवाब मिलेंगे, लेकिन फिलहाल टाइटन त्रासदी के जिन पहलुओं पर चर्चा की जा रही है उनमें टाइटन के ऑपरेटर की ओर से चूक और डिजाइन की खामियां शामिल हैं। यूएस कोस्टगार्ड के रियर एडमिरल जॉन माउगर टाइटन जांच को “जटिल मामला” बताते हैं। वे कहते हैं, “क्यों हुआ, कैसे हुआ, कब हुआ जैसे कई सवाल हमारे सामने हैं लेकिन इस सबके बारे में हम जितनी जानकारी इकट्ठा कर सकते हैं, करेंगे।” टाइटैनिक नाम से ही फिल्म बना चुके फिल्मकार जॉन कैमरून भी इस घटना से आहत हैं। फिल्म बनाने से पहले कैमरून खुद 33 बार टाइटैनिक का मलबा देखने समुद्र में उतर चुके हैं। उनका मानना है कि टाइटन में सवार लोगों के परिवार को झूठी दिलासा दी गई और इसके संचालन में खामी थी। अपने एक इंटरव्यू में कैमरून ने कहा कि जैसे ही उन्हें पता चला कि पनडुब्बी से संपर्क टूट गया है, तभी उन्हें पता चल गया कि एक और “अत्यधिक विनाशकारी घटना” घटी है। बेशक, इससे आगे सावधानियां बरती जा सकती हैं। लेकिन सवाल है कि असावधानियां क्यों बरती गईं।

टाइटन पनडुब्बी

टाइटन पनडुब्बी

दरअसल पर्यटन का यह नया रूप अमीरों के सिर चढ़ गया है। कभी अंतरिक्ष की सैर तो कभी समुद्र की गहराई घूमने के इस शौक से जान के जोखिम का खतरा बढ़ गया है, लेकिन इसकी परवाह किसे है। आखिर यूं ही तो नहीं कहा गया है, शौक बड़ी चीज है...।

टाइटैनिक से विल्हेम गुस्तलाफ तक

टाइटैनिक के डूबने के एक सदी से ज्यादा समय बीतने के बाद भी उसे देखने की दिलचस्पी कायम है। टाइटैनिक दुर्घटना में 1,500 से अधिक लोग मारे गए थे। फिर भी वह सबसे भीषण दुर्घटना नहीं थी क्योंकि समंदर टाइटैनिक से पहले और भी भीषण दुर्घटनाओं का गवाह रहा है। अब टाइटन पनडुब्बी की त्रासदी, जिसमें सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई। अतीत की कुछ भीषण समूद्री दुर्घटनाओं पर एक नजर

एमवी विल्हेम गुस्तलाफ

एमवी विल्हेम गुस्तलाफ

एक जर्मन जहाज, जो 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान डूब गया था। इसमें लगभग 9,000 लोग मारे गए थे। यह क्रूज था लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इससे अस्पताल और अस्थायी बैरक के रूप में भी काम लिया गया। बाद में इसका उपयोग जर्मन कर्मियों और उनके परिवारों को उन क्षेत्रों से निकालने के लिए किया गया जहां मित्र देशों की सेनाएं प्रवेश कर चुकी थीं। 1900 की क्षमता वाले एमवी विल्हेम गुस्तलाफ ने 30 जनवरी, 1945 को लगभग 10,000 लोगों के साथ गोटेनहाफेन (अब ग्डिनिया, पोलैंड) के साथ अपनी यात्रा शुरू की। कहा जाता है कि जहाज पर सैनिकों और विमानभेदी तोपों की मौजूदगी के कारण इस पर हमला हुआ। सोवियत पनडुब्बी ने जहाज पर तारपीडो दागे। हमले से जहाज डूब गया और बचाव के जल्द प्रयास शुरू होने के बावजूद केवल 1,000 लोगों को ही बचाया जा सका। यह अब तक की सबसे भीषण जहाज दुर्घटना है।

एमवी डोना पाज़

एमवी डोना पाज़

1987 में यह यात्री नौका फिलीपींस की राजधानी मनीला से लगभग 110 मील (180 किमी) दक्षिण में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। तबलास जलडमरूमध्य में तेल टैंकर एमटी वेक्टर से टकरा जाने पर आग लग गई और इसमें सवार लगभग 4000 लोग मारे गए।

आरएमएस लुसिटानिया

 आरएमएस लुसिटानिया

1915 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मनों ने 1198 यात्री वाले इस जहाज को डुबा दिया था। मारे गए 1198 यात्रियों में 128 अमेरिकी नागरिक थे। माना जाता है कि इन नागरिकों की मौत उन कारणों में एक है जिसकी वजह से अमेरिका युद्ध में शामिल हुआ। कहा जाता है कि एक जर्मन पनडुब्बी ने इस पर हमला किया और मात्र 18 मिनट में यह डूब गया था।

एसएस सुल्ताना

एसएस सुल्ताना

1865 में हुए इस हादसे को अमेरिकी इतिहास की सबसे भीषण समुद्री आपदा कहा जाता है। इसमें लगभग 1800 लोग मारे गए थे। एसएस सुल्ताना अमेरिकी गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद लौट रहे युद्धबंदियों को ले जा रहा था। इसमें क्षमता से छह गुना अधिक यात्री सवार थे।

एसएस कियांग्या

एसएस कियांग्या

1948 में चीनी गृहयुद्ध के दौरान कियांग्या आपदा में लगभग 4000 लोग मारे गए। यह जहाज शरणार्थियों को ले जा रहा था। शंघाई से करीब 80 किलोमीटर दूर यह हादसा हुआ। खदान से टकराने के बाद डूब गए जहाज में से सिर्फ 1000 लोगों को बचाया जा सका।

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