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नेपाल: सियासत के ‘बागी’ को ताज

चुनाव में जनरेशन-जेड की लहर पर सवार रैपर, काठमांडू के मेयर की नई पार्टी को बेमिसाल बहुमत, सभी पुरानी...
नेपाल: सियासत के ‘बागी’ को ताज

चुनाव में जनरेशन-जेड की लहर पर सवार रैपर, काठमांडू के मेयर की नई पार्टी को बेमिसाल बहुमत, सभी पुरानी पार्टियों का सूपड़ा साफ

बालेन्द्र शाह ने 2019 में अपने लोकप्रिय गीत, ‘बलिदान’ में एक सवाल पूछा था, “देश कैसे बनता है?” छह साल बाद नेपाल के लोग अब जिम्मेदारी सौंपकर मानो उनसे यही सवाल कर रहे हैं। नेपाल में हुए आम चुनावों में रैपर बालेन्द्र ‘बालेन’ शाह की नई-नवेली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) को लोगों ने ऐसी प्रचंड जीत दिलाई कि सारी पुरानी लंबी राजनैतिक प्रक्रिया का ही सुपड़ा साफ कर दिया। यह जनादेश ऐसा है, मानो लोगों ने तय कर लिया हो कि देश की राजनीति की स्लेट को एकदम साफ करके नई धारा बहाई जाए। लंबे राजनैतिक संघर्षों की विरासत और मजबूत राजनैतिक धाराओं से निकली लगभग सभी पार्टियां पृष्ठभूमि में चली गईं। बड़े नामधारी नेताओं में सिर्फ पुष्प कमल दहल प्रचंड ही अपनी सीट बचा पाए। अभी तक की स्थिति यह है कि प्रत्यक्ष चुनाव की कुल 165 सीटों में 125 सीटें आरएसपी के खाते में आती दिख रही हैं। नेपाली संसद की 275 सीटों में बाकी 110 सीटें प्रातिनिधिक चुनाव प्रणाली से तय होंगी। प्रातिनिधिक सीटों में 58 आती दिख रही हैं। दो-तिहाई बहुमत के लिए 184 सीटों की जरूरत होगी। पूर्व प्रधानमंत्री कृष्‍ण प्रसाद ओली की पार्टी सीपीएन-यूएमएल को प्रत्यक्ष चुनाव में नौ और प्रातिनिधिक सीटों में 16 मिली हैं। प्रत्यक्ष चुनावों में नेपाली कांग्रेस को 18 और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी को आठ सीटें मिली हैं।

पहली बारः बहुमत हासिल करने की खुशी

बालेन शाह तीन साल पहले पहली दफा काठमांडू के मेयर चुने गए थे। फिर, पिछले साल यानी 2025 में नेपाल में जेनरेशन जेड ने उग्र विरोध प्रदर्शन किया था, तो उन्हें युवा नेता के तौर पर प्रसिद्धि मिली। तब सड़कों पर भीड़ ‘बालेन’ के नारे लगाती थी और लाउडस्पीकरों पर उनके गाने बजाए जाते थे। ये वीडियो खूब वायरल हुए। उसके बाद रैपर से नेता बने बालेन की पार्टी आरएसपी के उम्मीदवारों को पूरे नेपाल में बहुत मजबूती मिली।

अगर बालेन की पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिलता है, तो यह पहली बार होगा कि कोई एक पार्टी ऐसा कर पाएगी। नेपाल की दोहरी मतदान प्रणाली के कारण किसी भी पार्टी के लिए साधारण बहुमत हासिल करना मुश्किल होता है, ऐसे में दो-तिहाई बहुमत दूर की बात है। बालेन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को 49,614 वोटों के बड़े अंतर से हराया।

काठमांडू में 1990 में मैथिल मधेसी मूल के नेवार बौद्ध परिवार में जन्मे बालेन्द्र शाह ने नेपाली समाज में मौजूद भ्रष्टाचार, गरीबी और पछड़ेपन को उजागर करने वाले गीतों के माध्यम से ख्याति अर्जित की। उनके गाने के बोल ने उन्हें समाज से जोड़ने का काम किया। उनके गीत निराशा और मोहभंग से गुजर रही पीढ़ी के दिलों तक पहुंचे। खासकर ‘बलिदान’ गीत, जिसे यूट्यूब पर सत्तर लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। बालेन्द्र ने अपने राजनैतिक विचारों को संगीत के माध्यम से व्यक्त किया, जिसमें, “देश के रखवाले मूर्ख हैं। सारे नेता चोर हैं, जो देश को लूटकर खा रहे हैं,” जैसे बोल बहुत लोकप्रिय हुए।

कर्नाटक के विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में एमटेक की डिग्री हासिल करने के बाद वे नेपाल लौट आए। 2022 में, बालेन ने नेपाल की सत्ताधारी राजनैतिक पार्टियों में शामिल होने से इनकार कर दिया और काठमांडू के मेयर पद के लिए स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। उन्होंने 61,000 से अधिक वोटों से जीत हासिल की। उन्होंने स्थापित राजनैतिक परिवारों को भारी बहुमत से हराया, जो नेपाली राजनीति में एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है। धूप का चश्मा शाह की पहचान का पर्याय बन गया है। अपने चुनाव प्रचार के दौरान वे काले ब्लेजर, पैंट, चौकोर फ्रेम वाले धूप के चश्मे और कंधों पर नेपाली झंडा लपेटे हुए नजर आए। ।

बालेन के अपरंपरागत राजनैतिक प्रवेश ने उन्हें नेपाल के विभिन्न समूहों का समर्थन दिलाया और मीडिया में भी उन्हें बहुत सुर्खियां मिली हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के एक लेख में शाह को उद्घृत किया गया, ‘‘मैं पहले नेताओं की आलोचना करता था। अब मैं खुद नेता बन गया हूं।’’ सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के कारण भड़की युवा पीढ़ी के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों का बालेन ने समर्थन किया था। प्रधानमंत्री के इस्तीफे के बाद उन्होंने फेसबुक पर एक संदेश जारी किया, ‘‘कृपया शांत रहें। राष्ट्रीय संसाधनों का नुकसान हम सबका सामूहिक नुकसान है। हम सभी के लिए संयम बरतना आवश्यक है।’’ लेकिन नेपाल के प्रमुख दलित अधिकार कार्यकर्ता मित्रा पेरियार ने द काठमांडू पोस्ट में लेख में कहा है कि बालेन ‘‘वर्ग और जाति के मुद्दों से अनभिज्ञ’’ दिखाई पड़ते हैं। वे उनके ‘‘दक्षिणपंथी झुकाव’’ के लिए चेतावनी देते हैं।

मेयर के अपने कार्यकाल के दौरान, शाह ने काठमांडू में रेहड़ी लगाने वालों के साथ सख्त व्यवहार किया और राजधानी में सड़कों को साफ रखने और बिना लाइसेंस वाले विक्रेताओं पर नकेल कसने के उद्देश्य से पुलिस को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया। पेरियार इस व्यवहार की तुलना ‘जंगली जानवरों’ से करते हुए दावा करते हैं कि मेयर रहते हुए बालेन ने रेहड़ी लगा कर जीवन यापन करने वाले लोगों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की।

महापौर बन जाने के तुरंत बाद शाह ने 2022 में काठमांडू शहर में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ अभियान शुरू किया। उन्होंने बुलडोजरों का इस्तेमाल करके उन इमारतों और ढांचों को ध्वस्त कर दिया, जिनके बारे में उनका कहना था कि वे सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर बनी थीं। उन्होंने बेघर लोगों को बिना पुनर्वास योजना के वहां से भगा दिया। बालेन ने 2023 में सोशल मीडिया पोस्ट में संघीय सरकार के प्रशासनिक केंद्र सिंह दरबार को जलाने की धमकी देकर सार्वजनिक रूप से हिंसा भड़काई।

अब जब बालेन को बहुमत मिल गया है, तब उनकी 2022 के एक इंटरव्यू का टुकड़ा इंटरनेट पर दोबारा घूम रहा है, जिसमें वे कहते दिख रहे हैं कि वे हिटलर से बहुत कुछ सीखना चाहेंगे, जैसे उसकी रणनीतिक योजना और जनता के बीच एक ही विचारधारा का प्रचार करने की क्षमता।

एक मीडिया हाउस को दिए एक साक्षात्कार में भी उन्होंने कहा था कि, “बॉलीवुड की फिल्मों में पाकिस्तान को हमेशा हथियारों और बम वाली जगह के रूप में दिखाया जाता है। नेपाल के नागरिक पाकिस्तान जाने से डरते हैं।” उन्होंने अपने दफ्तर में ‘बृहत्तर नेपाल’ का नक्शा लगा लिया था। इस नक्शे में नेपाल की सीमाएं वर्तमान सीमाओं से आगे बढ़कर उन क्षेत्रों को भी दर्शाती हैं, जो 1816 की सुगौली संधि से पहले नेपाली शासन के अधीन थे।

बालेन ने यह कदम भारत में संसद भवन में प्रदर्शित ‘अखंड भारत’ म्यूरल के प्रति प्रतीकात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर उठाया था। ‘अखंड भारत’ नक्शे में नेपाल के कई हिस्सों को भारत का हिस्सा बताया गया था। उन्होंने कहा, “मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा जिसके लिए मुझे माफी मांगनी पड़े। भारत ने अपने संसदीय मानचित्र को सांस्कृतिक मानचित्र बताया, इसलिए हमने बृहत्तर नेपाल का ऐतिहासिक मानचित्र लगाया। किसी को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।”

हाल ही में, 2025 में, बालेन ने फेसबुक पेज पर विभिन्न देशों और राजनैतिक दलों के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘‘भारत को धिक्कार है’’, जिसे बाद में हटा दिया। गतिशील लोकतांत्रिक पार्टी से चुनाव लड़ रहे राजनैतिक कार्यकर्ता पवन थापा का दावा है कि बालेन की राजनैतिक विचारधारा स्पष्ट नहीं है, क्योंकि वे प्रेस से बात करने से बचते हैं। थापा का दावा है कि बालेन हिंदुत्व विचारधारा से प्रभावित हैं और नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। थापा कहते हैं, ‘‘जनता ने संघर्ष करके देश के लिए वापस लोकतंत्र हासिल किया है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि नेपाल को एक अक्षम नेता मिल जाए या इससे भी बदतर, निरंकुश नेता के अधीन वापस लौटना पड़े।” जो भी हो, लोकतंत्र के रंग निराले होते हैं।

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