तेहरान में 28 फरवरी को इज्राएली-अमेरिकी हमले में मारे गए ईरान के सर्वोच्च मजहबी नेता के सफर और सियासी असर पर एक नजर:
मशहद में एक मौलवी के घर अली खामेनेई का जन्म 1939 में हुआ।
शुरुआती पढ़ाई-लिखाई स्थानीय मदरसे में।
18 साल की उम्र में शिया न्यायशास्त्र का अध्ययन किया। कविता तथा साहित्य में गहरी रुचि थी। विक्टर ह्यूगो की कृति लेस मिजरेबल्स को ‘साहित्य के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ उपन्यास’ मानते रहे। जवाहरलाल नेहरू के ग्लिंप्सेस ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री और डिस्कवरी ऑफ इंडिया के मुरीद थे। टॉलस्टॉय और महात्मा गांधी के प्रशंसक थे और अक्सर उद्घृत करते थे।
खामेनेई की पत्नी मसाद भी मजहबी परिवार की थी। उनके चार बेटे मुस्तफा, मोजत्बा, मसूद, मेयसाम और दो बेटियां बोशरा और होदा हैं। हमले में बच गए मोजत्बा को पिता अली खामेनेई की जगह कार्यवाहक जिम्मेदारी दी गई है।
खामेनेई का सियासत में उभार 1960 और 1970 के दशक में निर्वासित नेता अयातुल्ला खुमैनी के समर्थक के रूप में हुआ। वे ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी की अमेरिका समर्थित निजाम के खिलाफ प्रदर्शनों में आगे रहते थे और उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा।
1979 की क्रांति में शाह देश छोड़कर भागने पर मजबूर हुए और ईरान इस्लामी गणराज्य बना। खामेनेई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी काउंसिल के सदस्य और रक्षा उप-मंत्री बनाए गए।
1982 में राष्ट्रपति मोहम्मद अली रजाई की तेहरान में बम हमले में हत्या के बाद खामेनेई राष्ट्रपति चुने गए। चुनावों से ठीक पहले खामेनेई की दो बार हत्या की कोशिश में हमले हुए, जिससे उनके दाहिने हाथ को लकवा मार गया। खामेनेई ने 95 फीसदी वोट के साथ शानदार जीत हासिल की थी।
सुप्रीम काउंसिल के अध्यक्ष के नाते खामेनेई पड़ोसी देश इराक के सद्दाम हुसैन की सरकार के साथ 1980 से 1988 तक आठ साल तक चले युद्ध की रणनीति के मुख्य सूत्रधार थे।
1989 में खोमैनी की मृत्यु के बाद खामेनेई को 88 मौलवियों की परिषद ने रहबर-ए-मोअज्जम या सर्वोच्च नेता चुना। खामेनेई ने 2040 तक फलस्तीन से ‘‘इज्राएली कब्जे के खात्मे’’ की बात की।
उनकी अगुआई में ईरान ने सीरिया में असद की बाथिस्ट पार्टी के साथ साझेदारी में इज्राएल के खिलाफ ‘‘प्रतिरोध की धुरी’’ का निर्माण किया, जिसमें हिजबुल्लाह, हमास और हूती (या अंसार अल्लाह) जैसे पश्चिम एशियाई अर्धसैनिक संगठन शामिल हुए।
लेकिन खामेनेई की सत्ता के खिलाफ अलग-अलग दौर में विरोध प्रदर्शन भी हुए। पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी, धीमी आर्थिक प्रगति और राजनैतिक बंदियों की बढ़ती संख्या के खिलाफ लोगों की नाराजगी रही थी। कई बार बड़े प्रदर्शन हुए और इस्लामिक बंदिशों के खिलाफ आवाज बुलंद होती रही है। 2022 में हिजाब कानून का विरोध तो भयंकर था।
इन्हीं वर्षों में उनके समर्थकों में भी असंतोष चरम पर था। राष्ट्रपति पेजेश्कियान पर दबाव था। 2024 में 798 लोगों को फांसी दी गई।
2022 और 2023 में ईरान में जमीनी स्तर पर विद्रोह और लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों के दौरान सत्ता संरचना में बदलाव किया और सरकार में कुछ उदारपंथी नेताओं को शामिल किया।
पिछले साल जून में इज्राएल-अमेरिकी हमले से खामेनेई की पकड़ मजबूत हुई
इस साल जनवरी में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शनों से फिर सरकार कुछ हिली मगर उसे सख्ती से दबा दिया गया
लेकिन 28 फरवरी को इज्राएल-अमेरिकी साझा हमले में उनके निवास पर कम से कम 30 बम गिराए गए और खामेनेई के परिवार के लोग और सरकार तथा सेना के कई आला अधिकारी मारे गए।
नए रहबर मोजत्बा

शहीद अली खामेनेई के दूसरे बेटे मोजत्बा को रहबर-ए-मोअज्जम या सर्वोच्च नेता चुन लिया गया
मजलिस-ए-खुब्रकान या आलीमों की 88 सदस्यीय विशेषज्ञ परिषद ने आखिरकार शहीद अली खामेनेई के दूसरे बेटे मोजत्बा को रहबर-ए-मोअज्जम या सर्वोच्च नेता चुन लिया। यह एक मायने में ट्रम्प और नेतन्याहू की धमकियों का जवाब भी है। मोजत्बा 1980 में 17 साल की उम्र में फौज के साथ जुड़े थे और इराक के साथ आठ साल चली लड़ाई में सक्रिय थे। बाद में वे अपने अब्बा को सियासी और सरकारी कामकाज में भी मदद करते रहे। उन्हें चुपचाप काम करने वाला माना जाता है और वे सुर्खियों से दूर रहते हैं। उन्हें कट्टर भी माना जाता है और पिछले वर्षों में उदारपंथियों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाइयों के लिए भी उन्हें जिम्मेदार माना जाता है। वे रिवोल्युशनरी आर्म्ड गार्ड्स के ज्यादा नजदीक बताए जाते हैं। उन्हें इज्राएल पर कड़े हमलों का भी हिमायती माना जाता है।