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हल्द्वानी अतिक्रमण से सरकार का नहीं कोई सीधा वास्ता, कोर्ट के आदेश का अनुपालन सरकार की जिम्मेदारी

हल्द्वानी में एक बस्ती को हटाने के मामले में कांग्रेस सियासत कर भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश में है।...
हल्द्वानी अतिक्रमण से सरकार का नहीं कोई सीधा वास्ता, कोर्ट के आदेश का अनुपालन सरकार की जिम्मेदारी

हल्द्वानी में एक बस्ती को हटाने के मामले में कांग्रेस सियासत कर भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश में है। लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि इस मामले में उसका रोल सिर्फ अदालत के आदेश का अनुपालन कराने तक ही सीमित है।

यहां बता दें कि नैनीताल हाईकोर्ट ने इस बस्ती को बलपूर्वक हटाने का आदेश दिया था। पर अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है।

हल्द्वानी का यह मामला कई रोज से सुर्खियों में है। हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने को सरकार की तरफ से कोशिशें चल रही है। 10 जनवरी से इस अतिक्रमण को बलपूर्वक हटाया जाना था। लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को स्थगित कर दिया है। इससे साफ है कि अब 10 तारीख से ऐसा कोई भी अभियान नहीं चलने वाला।

अहम बात यह भी है कि कांग्रेस ने इसे एक सियासी मुद्दा बनाया और कहा कि भाजपा सरकार गरीबों को बेदखल कर रही है। इस मामले में सरकारी पक्ष का कहना है कि सरकार का इससे कोई भी लेना-देना नहीं है। सरकार का काम अदालत के आदेश का अनुपालन कराने तक ही सीमित होता है। हाईकोर्ट ने बलपूर्वक हटवाने का आदेश दिया तो सरकार ने उसके लिहाज से तमाम तैयारियां मुकम्मल कर ली थीं। अब सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश को स्थगित कर दिया है तो सरकार ने भी अपने हाथ खींच लिए हैं। राज्य सरकार का इस मामले से कोई भी सीधा लेना-देना नहीं है। जमीन रेलवे की है और नैनीताल हाईकोर्ट ने इस खाली कराने का आदेश दिया था।

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