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संवेदनशील मुद्दे उठाने वाले जस्टिस चेलमेश्वर हुए रिटायर

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ तीन अन्य जजों के साथ प्रेस कॉफ्रेंस करने वाले जस्टिस...
संवेदनशील मुद्दे उठाने वाले जस्टिस चेलमेश्वर हुए रिटायर

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ तीन अन्य जजों के साथ प्रेस कॉफ्रेंस करने वाले जस्टिस जे चेलमेश्वर शुक्रवार को रिटायर हो गए। इसके साथ ही उन्होंने तुगलक रोड स्थित सरकारी आवास भी खाली कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में वह करीब सात सालों तक रहे।

जस्टिस एम.बी. लोकुर, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस कुरियन जोसफ के साथ प्रेस कॉफ्रेस कर उन्होंने अदालत में मामलों की चयन प्रक्रिया और सीबीआई के विशेष जज बी.एच. लोया की मौत जैसे संवेदनशील मामलों को उठाया था। यह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसी पहली घटना थी जिसके बाद देश में सियासी भूचाल आ गया था। 

जस्टिस चेलमेश्वर ने तत्कालीन चीफ जस्टिस जस्टिस टीएस ठाकुर और जेएस खेहर के कार्यकाल के दौरान कोलेजियम की बैठकों का बहिष्कार कर दिया था। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि जब तक कोलेजियम की बैठकों का एजेंडा सीजेआई समेत पांच सीनियर सदस्य जजों को नहीं बताया जाएगा वह कोलेजियम में नहीं आएंगे। उनके विरोध को देखते हुए मौजूदा चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कोलेजियम के फैसलों को सार्वजनिक करना शुरू कर दिया। यह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में एक बड़ी घटना थी, क्योंकि 1993 में कोलेजियम व्यवस्था के अस्तित्व में आने के बाद यह पहला बार था जब उसके फैसले सार्वजनिक किए गए।

जस्टिस जोसेफ की पदोन्नति अधर में !

उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में संभावित पदोन्नति की प्रक्रिया में अब विलंब हो सकता है, क्योंकि जस्टिस जे चेलामेश्वर के रिटायर होने के बाद कोलेजियम का स्वरूप बदल जाएगा। उनकी जगह कोलेजियम में जस्टिस एके सीकरी शामिल हो जाएंगे। कोलेजियम के अन्य सदस्यों में जस्टिस रंजन गोगोई, मदन बी लोकूर और कुरियन जोसेफ शामिल हैं। जस्टिस सीकरी की अगुवाई वाली बेंच ने हाल में ही कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक उथापुथल के दौरान फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश सुनाया था। कोलेजियम में जस्टिस सीकरी के शामिल होने के बाद जस्टिस जोसेफ के नाम पर नए सिरे से पुनर्विचार की जरूरत हो सकती है।

कौन है जस्टिस जे. चेलमेश्वर

वह नौ जजों की उस पीठ का हिस्सा थे जिसने ऐतिहासिक फैसले में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया था। वह जस्टिस जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच जजों की उस पीठ का भी हिस्सा थे जिसने हायर ज्युडिसरी में नियुक्ति से संबंधित राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) को निरस्त किया था। वह तीन मई 2007 गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने थे और बादे में  केरल हाईकोर्ट में चले गए। 10 अक्तूबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बने थे।

 

 

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