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निर्भया कांड के आरोपी का इंटरव्यू से लेकर महिला पीसीआर तक चर्चित रहे आलोक वर्मा, जानें करियर

गुरुवार को सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने के बाद अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और यूनियन टेरेटरी कैडर के...
निर्भया कांड के आरोपी का इंटरव्यू से लेकर महिला पीसीआर तक चर्चित रहे आलोक वर्मा, जानें करियर

गुरुवार को सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने के बाद अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और यूनियन टेरेटरी कैडर के 1979 बैच के देश के सबसे वरिष्ठ आइपीएस आलोक वर्मा ने शुक्रवार को फायर एंड सेफ्टी के डीजी के पद से इस्तीफा दे दिया है। अपने चालीस साल के करियर में वर्मा ने कई उपलब्धियां हासिल की। आइए जानते हैं 1979 बैच के अधिकारी आलोक वर्मा और उनके करियर के बार में-

अपने बैच के सबसे युवा अधिकारी थे वर्मा

आलोक वर्मा 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वह अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश काडर में चुने गए थे। जिस समय आईपीएस में उनका सेलेक्शन हुआ उनकी आयु महज 22 वर्ष थी। वह अपने बैच के सबसे युवा अधिकारी थे। लिहाजा आईपीएस के तौर पर उनका कार्यकाल काफी लंबा है।

दिल्ली के कमिश्नर भी रह चुके हैं

आलोक वर्मा देश की राजधानी दिल्ली के पुलिस कमिश्नर भी रह चुके हैं। इससे पहले वह जेल के जनरल भी थे। वह मिजोरम में पुलिस महानिदेशक (डीजी) के पद पर भी तैनात रह चुके हैं। दिल्ली में पुलिस कमिश्नर रहते हुए उन्होंने पुलिस सुधार और कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए थे, जिनकी काफी सराहना भी की गई थी।

बिहार के चर्चित सृजन घोटाले को लेकर कर चुके हैं पटना का दौरा

सीबीआई चीफ बनने के बाद आलोक कुमार वर्मा बिहार के चर्चित सृजन घोटाले को लेकर कार्रवाई तेज करते हुए पटना का दौरा भी कर चुके हैं। सृजन घोटाला शुरुआती जांच में 200 करोड़ तक का था। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, रकम भी बढ़ती गई। यह रकम 1300 करोड़ से पार हो गई है। भागलपुर से शुरू हुए इस सृजन घोटाले की आंच का दायरा बांका, सुपौल, सहरसा तक जा पहुंचा है।

बिना अनुभव सीधे सीबीआई निदेशक बने आलोक वर्मा

सेंट स्टीफेंस कॉलेज से पढ़ाई करने वाले आलोक वर्मा सीबीआई के 27वें निदेशक हैं। वर्ष 2017 में उन्हें सीबीआई की कमान सौंपी गई थी। उस वक्त वह दिल्ली के पुलिस कमिश्नर पद पर तैनात थे। खास बात ये है कि आलोक वर्मा को तब तक सीबीआई में काम का कोई अनुभव नहीं था। बावजूद उन्हें सीधे सीबीआई निदेशक पद पर बैठा दिया गया था। उन्हें सीबीआई निदेशक बनाने वाली कैबिनेट कमिटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर शामिल थे।

बीबीसी की डाक्यूमेंट्री 'इंडियाज डॉटर' को लेकर भी हुआ था विवाद

आलोक कुमार वर्मा को लेकर उस समय भी विवाद गहराया था, जब 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली में हुए निर्भया कांड को लेकर बीबीसी ने एक डाक्यूमेंट्री 'इंडियाज डॉटर' बनाई थी। 'इंडियाज डॉटर' डाक्यूमेंट्री के लिए बीबीसी ने तिहाड़ जेल में बंद निर्भया कांड के आरोपित का इंटरव्यू लिया था। इसके बाद विवाद गहराने पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने तिहाड़ जेल के तत्कालीन महानिदेशक आलोक कुमार वर्मा को तलब भी किया था। हालांकि, निर्भया कांड के दोषी का इंटरव्यू करने की अनुमति तत्कालीन डीजी विमला मेहरा ने दी थी।

आलोक वर्मा की ये हैं उपलब्धियां

दिल्ली में महिला पीसीआर की शुरूआत करने का श्रेय तत्कालीन कमिश्नर आलोक वर्मा को ही दिया जाता है। इसके लिए उनकी काफी सराहना भी हुई थी। दिल्ली में रहते हुए पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर उन्होंने नीतियों में कई अहम बदलाव किए थे, जिनकी लंबे समय से प्रतीक्षा की जा रही थी। नई नीति में 11,371 सिपाही को हेड कांस्टेबल, 12,813 हेड कांस्टेबल को एएसआई, 1792 एएसआई को सब इंस्पेक्टर (एसआई) और 390 आईएस को इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नत किया गया था। आलोक वर्मा को 1997 में पुलिस मेडल और 2003 में राष्ट्रपति के पुलिस मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है।

वर्मा ने दिल्ली के सेंट जेवियर स्कूल और सेंट स्टीफन कॉलेज से पूरी की पढ़ाई

साफ-सुथरी छविवाले आईपीएस अधिकारी माने जानेवाले आलोक वर्मा मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं। बिहार के तिरहुत प्रमंडल के शिवहर जिला निवासी आलोक कुमार वर्मा मात्र 22 वर्ष की उम्र में वर्ष 1979 में आईपीएस चुन लिए गए थे। 14 जुलाई, 1957 को जन्में आलोक वर्मा ने 22 वर्ष की उम्र में ही आईपीएस चुने गए थे। वह अपने बैच के सबसे कम उम्र के अभ्यर्थी थे। हालांकि, उनकी शिक्षा दिल्ली में हुई है। उन्होंने सेंट जेवियर स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद सेंट स्टीफन कॉलेज से उन्होंने इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।

छुट्टी पर भेजने की क्या थी वजह

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा, विभाग में नंबर दो के अधिकारी विशेष निदेशक राकेश अस्थाना संग विवाद की वजह से सुर्खियों में आए थे। ये पहला मौका था जब सीबीआई के अंदर की रार खुलकर सबसे सामने आई थी। विवाद की वजह से ही पहली बार सीबीआई ने अपने ही विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ 15 अक्टूबर 2018 को भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया था। एफआइआर में राकेश अस्थाना पर मांस कारोबारी मोइन कुरैशी से तीन करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था।

इससे पहले राकेश अस्थाना कैबिनेट सेक्रेटरी से आलोक वर्मा की शिकायत कर चुके थे। राकेश अस्थाना ने आलोक वर्मा पर मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के करीबी सतीश बाबू सना से दो करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया था।  

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