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सत्यार्थी शुरू करेंगे ‘करुणा का वैश्वीकरण’

पूरी दुनिया के हाशिए पर के बच्चों के लिए समाज के ऐसे तबके ने आवाज उठाने का फैसला किया है जिनकी अपनी खास पहचान है। अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्टतम कार्य के लिए दुनिया के सर्वोच्च सम्मान नोबेल पुरस्कार से नवाजे गए ये लोग एक मंच पर आकर समाज के इस वंचित तबके के हक की न सिर्फ आवाज उठाएंगे बल्कि इनके लिए कुछ ठोस करने का भी प्रयास करेंगे।
सत्यार्थी शुरू करेंगे ‘करुणा का वैश्वीकरण’

खास बात यह है कि ये पूरी पहल भारत के नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने की है और उन्हीं के प्रयासों से करीब 34 नोबेल विजेताओं ने इस अभियान से जुड़ने  की स्वीकृति दे दी है। नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कैलाश सत्यार्थी ने बताया कि उन्होंने इस अभियान को ‘करुणा का वैश्वीकरण’ नाम दिया है। उन्होंने बताया कि इस अभियान की शुरुआत 10 और 11 दिसंबर को दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में एक कार्यक्रम के जरिये की जाएगी जिसे उन्होंने ‘लॉरेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्ड्रन समिट’ नाम दिया है। इस समिट का उद्घाटन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी करेंगे और दुनिया के 14 नोबेल विजेता इसमें भागीदारी करने दिल्ली आ रहे हैं। यही नहीं दुनिया के कई वर्तमान एवं पूर्व शासनाध्यक्ष एवं राष्ट्राध्यक्ष, कई कॉरपोरेट हस्तियां और अपने-अपने क्षेत्र के दिग्गज लोग इसमें हिस्सेदारी करेंगे। कई नोबेल पुरस्कार विजेता वीडियो संदेशों के जरिये इसमें भागीदारी करेंगे।

गौरतलब है कि पिछले दिनों आउटलुक हिंदी के कार्यालय में आए कैलाश सत्यार्थी ने यह जानकारी दी थी कि वे दुनिया के हाशिए पर के बच्चों के लिए काम करने के लिए नोबेल पुरस्कार विजेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि तब उन्होंने कहा था कि जब इस मामले में कुछ ठोस प्रगति होगी तब विस्तार से इसकी जानकारी देंगे। 

भारत के लिए शांति का एकमात्र नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाले कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि लॉरेट्स और लीडर्स समिट के साथ हमारा इरादा वैश्विक स्तर पर बच्चों को संरक्षण देने के लिए एक नैतिक मंच बनाना है। हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि हर बच्चा मुक्त, सुरक्षित, स्वस्‍थ और शिक्षित हो। उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया में करीब छह करोड़ बच्चे प्राथमिक शिक्षा भी हासिल नहीं कर पाते। सीरिया, इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान आदि में बच्चों के स्कूल तबाह कर दिए गए हैं। दक्षिण्‍ी सूडान, नाइजीरिया आदि में छोटी बच्चियां सेक्स वर्कर बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि पूरी दुनिया बच्चों के अनुकूल बने और इसके लिए नैतिकता को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया जाए और नैतिकता के प्रति प्रतिबद्धता जताई जाए। इस कार्यक्रम में लॉरेट्स और लीडर्स एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करेगे कि वे अपने-अपने क्षेत्र में बच्चों के विकास और हित में काम करने के लिए मंथन करेंगे।

कार्यक्रम के दूसरे दिन यानी 11 दिसंबर को ‘100 मिलियन फॉर 100 मिलियन’ अभियान का आरंभ होगा। इसका खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में करीब 10 करोड़ वंचित बच्चे हैं। उनकी दशा सुधारने और उन्हें हर प्रकार की हिंसा से बचाने के लिए पूरी दुनिया में 10 करोड़ ऐसे युवाओं को प्रेरित कर इस अभियान से जोड़ा जाएगा जो किसी भी तरह के कट्टरपंथ से मुक्त विचार रखते हों और दुनिया एवं समाज के लिए कुछ करना चाहते हों।अगर यह अभियान जोर पकड़ गया तो समाज में हाशिए पर के बच्चों के हित में यह सबसे बड़ा अभियान साबित होगा।

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