पशुपालन घोटाला मामले में सजायाफ्ता राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को तत्काल राहत नहीं मिली। दुमका कोषागार से तीन करोड़ 13 लाख रुपये अवैध निकासी के मामले में जमानत याचिका पर अब 19 फरवरी को सुनवाई होगी। सीबीआइ की ओर से शपथ पत्र दाखिल नहीं होने के कारण फैसला नहीं हो पाया अब 19 फरवरी को सुनवाई होगी। जेल मैनुअल के उल्लंघन के मामले में भी इसी दिन सुनवाई होनी है। रांची उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की अदालत में जमानत याचिका पर कोई आधा घंटा तक सुनवाई हुई। दुमका कोषागार से अवैध निकसी मामले में लालू प्रसाद को सात साल की सजा हुई है।
लालू चार मामलों में सजायाफ्ता हैं जिनमें तीन में उन्हें आधी सजा काट लेने की वजह से जमानत मिल चुकी है। पांचवां मामला रांची के डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी का है जिसमें अभी सुनवाई चल ही रही है। दुमका कोषागार से अवैध निकासी के मामले में लालू प्रसाद की ओर से कहा गया है कि उन्होंने आधी सजा काट ली है और वह विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हैं। लालू प्रसाद की ओर से पैरवरी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने रिकार्ड पेश करते हुए कहा कि लालू प्रसाद ने 28 महीने 29 दिन जेल में गुजारे हैं। उनकी आधी सजा पूरी हो चुकी है। इसी आधार पर जमानत की याचिका दाखिल की गई है।
आधी सजा काट लेने के तर्क को लेकर निचली अदालत की रिपोर्ट भी पेश की गई है। हालांकि सीबीआइ की ओर से कहा गया है कि लालू प्रसाद ने दुमका कोषागार मामले में आधी सजा अभी नहीं काटी है। सीबीआइ की दलील है कि जेल में सजा काटने की गणना सही नहीं है। उन्होंने 27 माह छह दिन ही जेल में गुजारे हैं। इस तरह सीबीआइ और लालू के पक्षकारों के हिसाब से सजा की अवधि में 28 दिनों का फर्क है।
मालूम हो कि तबीयत खराब रहने के आधार पर लालू प्रसाद लंबे समय से रांची के रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान ) में भर्ती रहे और अभी तबीयत बिगड़ने के कारण दिल्ली के एम्स में एडमिट हैं।