Advertisement

#MeToo की तर्ज पर #MenToo, जानिए, इस कैम्पेन के बारे में

देश भर में इन दिनों #MeToo अभियान जोरो पर है। फिल्मी दुनिया में जहां अभिनेता नाना पाटेकर से लेकर आलोक नाथ,...
#MeToo की तर्ज पर #MenToo, जानिए, इस कैम्पेन के बारे में

देश भर में इन दिनों #MeToo अभियान जोरो पर है। फिल्मी दुनिया में जहां अभिनेता नाना पाटेकर से लेकर आलोक नाथ, विकास बहल, मुकेश छाबड़ा जैसी हस्ती भी इसके लपेटे में आई। वहीं कई पत्र-पत्रिकाओं के संपादक रहे एमजे अकबर को केन्द्रीय मंत्री पद से इस्तीफा तक देना पड़ गया। इस अभियान के तहत महिलाएं अपने खिलाफ हुए यौन हिंसा, उत्पीड़न आदि के बारे में सोशल मीडिया पर खुलकर लिख रही हैं। अब इसी अभियान की तर्ज पर पुरूषों ने भी पहल करनी शुरू कर दी है। जिसमें पुरूष अपने साथ हुए यौन हमले, हिंसा,शोषण और उत्पीड़न के बारे में लिख रहे हैं। साथ ही मी टू अभियान के तहत झूठे मामले दायर करने वालों को सजा देने की मांग कर रहे हैं। इसे #MenToo नाम दिया गया है।

फिलहाल #MenToo हैशटैग के साथ अपनी आपबती लिखने वाले पुरूषों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है। लेकिन #MenToo की जरूरत बताते हुए इसके समर्थन में पोस्ट लिखने वालों की संख्या काफी तादात में हैं। कई पुरूषों ने अपने साथ हुई घटनाओं के बारे में बताया है। हालांकि आउटलुक इसकी सत्यता और प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता।

कैसे हुई शुरूआत

15 लोगों के एक समूह ने मैन टू आंदोलन की शुरुआत करते हुए पुरुषों से कहा कि वे महिलाओं के हाथों अपने यौन शोषण के बारे में खुलकर बोलें। इन लोगों में फ्रांस के एक पूर्व राजनयिक भी शामिल हैं जिन्हें 2017 में यौन उत्पीड़न के एक मामले में अदालत ने बरी कर दिया था।

मैन टू आंदोलन की शुरुआत शनिवार को गैर सरकारी संगठन चिल्ड्रंस राइट्स इनिशिएटिव फॉर शेयर्ड पेरेंटिंग (क्रिस्प) ने की। 

मीटू के तहत झूठे मामले दायर करने वालों को मिले सजा

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक,क्रिस्प के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमार वी ने कहा कि समूह लैंगिक तटस्थ कानूनों के लिए लड़ेगा। उन्होंने मांग की कि मी टू अभियान के तहत झूठे मामले दायर करने वालों को सजा मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मी टू एक अच्छा आंदोलन है, उन्होंने हालांकि कहा कि झूठे आरोप लगाकर किसी को फंसाने के लिए इसका दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘इस आंदोलन का परिणाम समाज में बड़ी मेहनत से अर्जित लोगों के सम्मान को धूमिल करने के रूप में निकला है।’’

उन्होंने कहा कि मी टू में जहां पीड़िताएं दशकों पहले हुए यौन उत्पीड़न की बात बता रही हैं, वहीं इसके विपरीत मैन टू आंदोलन में हालिया घटनाओं को उठाया जाएगा। मी टू आंदोलन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि यौन उत्पीड़न का मामला सच्चा है तो पीड़िताओं को सोशल मीडिया पर आने की जगह कानूनी कार्रवाई का सहारा लेना चाहिए।

मैन टू आंदोलन मी टू आंदोलन का जवाब नहीं

फ्रांस के पूर्व राजनयिक पास्कल मजूरियर भी मौजूद थे जिन पर अपनी बेटी के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था, लेकिन 2017 में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था। उन्होंने कहा कि मैन टू आंदोलन मी टू आंदोलन का जवाब देने के लिए नहीं है, बल्कि यह पुरुषों की समस्याओं का समाधान करेगा जो महिलाओं के अत्याचारों के खिलाफ नहीं बोलते हैं।

पुरूष भी हैं पीड़ित लेकिन खुलकर सामने नहीं आ रहे

पास्कल ने कहा, ‘‘पुरुषों के पास असली दुख है। वे भी पीड़ित हैं लेकिन वे महिलाओं और अपने दुराचारियों के खिलाफ खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाते हैं। यह अच्छा है लेकिन हमें नहीं भूलना चाहिए कि मानवता का आधा हिस्सा पुरुष हैं।’’ पास्कल अदालती लड़ाई का सामना कर रहे हैं क्योंकि उनकी पत्नी उन्हें बरी करने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ कर्नाटक उच्च न्यायालय चली गई थीं। फ्रांस के पूर्व राजनयिक की पत्नी के पास उनके तीन बच्चों का संरक्षण है।

अब आप हिंदी आउटलुक अपने मोबाइल पर भी पढ़ सकते हैं। डाउनलोड करें आउटलुक हिंदी एप गूगल प्ले स्टोर या एपल स्टोर से
Advertisement
Advertisement
Advertisement
  Close Ad