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अटल टनल सामरिक दृष्टि से महत्वूर्ण, लेह में तैनात भारतीय सैनिकों की राह हुई आसान: जयराम ठाकुर

प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी द्वारा विश्व की सबसे लंबी अटल रोहतांग टनल के देश समर्पित होने के बाद...
अटल टनल सामरिक दृष्टि से महत्वूर्ण, लेह में तैनात भारतीय सैनिकों की राह हुई आसान: जयराम ठाकुर

प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी द्वारा विश्व की सबसे लंबी अटल रोहतांग टनल के देश समर्पित होने के बाद मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां कहा कि टनल सामरिक दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है। टनल के बनने से सैन्य बलों को वर्ष भर सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए आवाजाही की सुविधा मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मनाली-लेह-लद्दाख सड़क मार्ग सुरक्षा के लिहाज से बहुत अहम है और अटल सुरंग से सैन्य बलों को कम समय में आवाजाही के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की सामाग्री की आपूर्ति करने की सुविधा मिलेगी।
इस सुरंग के निर्माण से सैन्य बलों के आवागमन और आपूर्ति में एक दिन के समय की बचत होगी।

अटल टनल के निर्माण की अनुमति पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपई ने 2002 में दी थी और टनल का फाउंडेशन स्टाइन यूपीए की अध्यक्षा सोनिया गांधी ने 2010 में रखा था ।टनल का निर्माण 2015 में ही जाना था लेकिन बाद में कुछ मुश्किलों के चलते काम पूरा होते और पांच साल लग गए।

जय राम ठाकुर ने कहा कि सभी मौसमों में सुरंग के खुले रहने से लाहौल-स्पीति के लोगों को भी लाभ मिलेगा और वे वर्ष भर देश के साथ संपर्क में बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि 9.02 किलोमीटर लम्बी अटल सुरंग से पर्यटकों को भी लाभ मिलेगी क्योंकि मनाली से लाहौल-स्पीति के बीच कई किलोमीटर की दूरी कम होगी।

यात्रा के समय में कटौती होने से घाटी के किसानों को अपने उत्पाद आसानी से मंडियों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी। अब उनकी प्रमुख फसलें जैसे मटर, ब्रोकली और आलू कुल्लू और अन्य मंडियों तक पहुंचने से पहले ट्रकों में नहीं सड़ेंगी। पेट्रोल डीजल तथा सब्जियों जैसी आवश्यक वस्तुऔ की आपूर्ति भी वर्ष भर सुनिचित होगी।

इस सुरंग के निर्माण से लाहौल घाटी में पर्यटन विकास को भी व्यापक स्तर पर प्रोत्साहन मिलेगा। अटल टनल के खुलने से पहले लाहौल और स्पीति के निवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं और खाद्य सामग्री जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब वे आसानी से मनाली पहुंच सकेंगे और देश के अन्य हिस्सों से भी उनका संपर्क बना रहेगा।

अब तक 13059 फुट ऊंची रोहतांग पास के कारण लाहुल में रहने वाले लोगों को 6 माह तक देश के बाकी हिस्सों से काटे रहने का कष्ठ झलेना पड़ता था।

 

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