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...तो कोरोना ‘महामारी’ नहीं है कोई ‘आपदा’

देहरादून। पिछले सवा साल से भी ज्यादा समय से पूरा देश कोरोना महामारी का कहर झेल रहा है। तमाम लोग इसकी...
...तो कोरोना ‘महामारी’ नहीं है कोई ‘आपदा’

देहरादून। पिछले सवा साल से भी ज्यादा समय से पूरा देश कोरोना महामारी का कहर झेल रहा है। तमाम लोग इसकी वजह से असमय की काल का ग्रास बन गए हैं। लेकिन केंद्र सरकार की नजर में ये कोरोना महामारी कोई आपदा नहीं है। लिहाजा इस महामारी के मरने वालों को किसी तरह का कोई मुआवजा भी नहीं मिलेगा।

मार्च-2020 से देश में कोरोना महामारी ने अपना कहर ढाना शुरू किया। पहली लहर में तमाम लोगों की मौत हुई। लेकिन मार्च-2021 से शुरू हुई दूसरी लहर ने तो पूरे देश को ही अपनी चपेट में ले लिया। अब तीसरी लहर की बात भी सामने आ रही है। इस महामारी को लेकर केंद्र सरकार कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसे अभी तक आपदा की कैटेगरी में शामिल नहीं किया गया है। इसी वजह से इस कोरोना से मरने वालों के आश्रितों को किसी तरह का कोई मुआवजा भी नहीं मिलने वाला। इस बात की तस्दीक उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव ने खुद की है।

दरअसल, पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया में एक फार्म वायरल हो रहा था। इस बारे में कहा गया था कि कोरोना से मरने वालों के परिजन ये फार्म भरकर संबंधित जिलों के डीएम को दें। वहां से उन्हें चार लाख का मुआवजा दिया जाएगा। अकेले उत्तराखंड में छह हजार से ज्यादा मौत इस महामारी से हुईं हैं। कितने मृतक आश्रितों ने सोशल मीडिया के कहने पर फार्म भरे ये तो जानकारी नहीं है। लेकिन उत्तराखंड शासन के आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव एसए मुरुगेशन जरूर सक्रिय हो गए। उन्होंने सूचना विभाग के माध्यम से एक पत्र जारी करके कहा कि केंद्र सरकार ने कोरोना को आपदा घोषित नहीं किया है। ऐसे में कोरोना मृतक आश्रित को चार लाख रुपये मिलने की बात का खंडन किया जाता है। सवाल यह भी है कि अगर देशभर में सवा साल से हो रही असमय मौतों को आपदा नहीं माना जा रहा है तो आपदा क्या है।

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