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क्या हो पाएगी प्रसिद्ध तांगा दौड़? विधायकों की मांग, बेनीवाल का कड़ा ऐलान, प्रशासन सकते में

सदियों से चली आ रही नागौर सहित उत्तर-पश्चिमी राजस्थान की परंपरा पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन की टेढ़ी नजर है।
क्या हो पाएगी प्रसिद्ध तांगा दौड़? विधायकों की मांग, बेनीवाल का कड़ा ऐलान, प्रशासन सकते में

प्रशासन जहां सरकार की ओर से अध्यादेश लाकर दी जा सकने वाली अनुमति का इंतजार कर रहा है, वहीं नागौर के दबंग विधायक हनुमान बेनीवाल बीते साल स्वयं की घोषित बात पर अड़िग हैं। बताया जाता है कि इस बार सरकार की अनुमति नहीं देने व सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से तांगा दौड़ प्रभावित सकती हैं, लेकिन बेनीवाल ने साफ कह दिया है कि चाहे उनको जेल जाना पड़े, लेकिन वे तांगा दौड़ करवाकर रहेंगे। दूसरी तरफ नागौर के विधायकों के अलावा अखिल भारतीय वीर तेजाजी जाट जन्म स्थली संस्थान, खरनाल के उपाध्यक्ष व बायतु से भाजपा विधायक कैलाश चौधरी ने मुख्यमंत्री को अध्यादेश लाकर तांगा दौड़ आयोजित करवाने की अपील की है।

हनुमान बेनीवाल ने कहा था: होकर रहेगी दौड़

आपको बता दें कि प्रतिवर्ष मुंदियाड़ से खरनाल व खरनाल से नागौर तक तांगा दौड़ होती रही है। नागौर कोर्ट की सख्ती के बाद नागौर व आसपास के जिलों के लोग खींवसर से निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल की अगली घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। बेनीवाल ने पिछले वर्ष ही तेजाजी के मेले के अवसर पर खरनाल में आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए मंच से कहा था कि अगले वर्ष (2017) में तांगा दौड़ कराई जाएगी। इस मौके पर आयोजित सभा में हजारों की भीड़ को आश्वासन देते हुए बेनीवाल ने कहा था कि राजस्थान सरकार या कोर्ट इस दौड़ की अनुमति भले ही नहीं दें, लेकिन वे अगले वर्ष तांगा दौड़ जरुर कराएंगे। बेनीवाल ने साफ तौर पर कहा था कि इसके लिए चाहे उन्हें जेल ही क्यों नहीं जाना पड़े।

बेनीवाल दौड़ को बना सकते हैं लोगों का हथियार

सुप्रीम कोर्ट की ओर से पशु क्रूरता की बात कहते हुए इस तरह के मेलों में पशुओं की दौड़ पर रोक लगा रखी है। इसका हवाला देते हुए जिला प्रशासन भी तांगा दौड़ की अनुमति देने से कताराता रहता है। बीते साल भी इसकी अनुमति नहीं मिलने के बाद लोगों को काफी निराश होना पड़ा था। आपको यह भी बता दें कि नागौर सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान में विधायक बेनीवाल का वर्चस्व रहता है। यहां पर वे युवाओं के दम पर सरकार के खिलाफ खूब आवाज उठाते रहते हैं। बताया जाता है कि जो भी काम सरकार के लिए मुसीबत पैदा करने वाला होता है, वह बेनीवाल अवश्य करते हैं।

दो साल से बंद है ये दौड़

उल्लेखनीय यह भी है कि पीढ़ियों से चली आ रही तांगा दौड़ को दो साल पहले उच्चतम न्यायालय के आदेश पर बंद कर दिया गया था। हालांकि एक साल पहले यह दौड़ अनुमति नहीं देने के बाद भी आंशिक रुप से आयोजित की गई थी। इस दौड़ को न केवल मनोरंजन का माध्यम माना जाता है, वरन लोगों ने आस्था का कारण भी बना रखा है। लोगों का कहना है कि इस दौड़ में जीतने वाले व्यक्ति का स्वयं गणेशजी तांगा चलाते हैं। बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और युवाओं में इस दौड़ को लेकर काफी क्रेज रहता है। कई किलोमीटर तक दौड़ देखने के लिए लाखों की संख्या में लोग घंटों तक कच्चे व पक्के मार्गों के दोनों ओर कतारबद्ध खड़े रहते हैं।

अब तक नहीं हुआ कोई हादसा

मुंदियाड़ से खरनाल और खरनाल से नागौर तक सदियों से हो रही इस दौड़ को देखने के लिए नागौर के अलावा आसपास के सभी जिलों से लोग आते हैं। मुंदियाड़ के गजानंदजी, खरनाल के वीर तेजाजी मेले तथा बालापीर के मेले में के अवसर पर आयोजित होने वाली यह दौड़ दो दिन तक चलती है। इस दौरान कुछ छुटमुट घटनाएं भी सामने आती हैं। हालांकि अभी तक किसी पशु या व्यक्ति के हताहत होने की बात सामने नहीं आई है।

इस बार भी बेनीवाल पर टिकी हैं निगाहें

बीते करीब 15 साल से इस दौड़ को लेकर विधायक बेनीवाल का काफी योगदान रहता है। लेकिन दो साल पहले कोर्ट के आदेश के बाद इसको बंद करने के कारण लोगों में सरकार के प्रति खासा रोष है। इसी रोष का फायदा उठाते हुए हनुमान बेनीवाल ने बीते साल तेजाजी के मेले के अवसर पर हजारों की भीड़ को दौड़ करवाने का आश्वासन दिया था। ऐसे में लोगों को इस बात का इंतजार है कि क्या विधायक बेनीवाल पिछले साल किया गया अपना वादा निभा पाएंगे। चूंकि राज्य सरकार वे बेनीवाल के बीच हमेशा छत्तीस का आंकड़ा रहा है, ऐसे में पूर्व की भांति यदि बेनीावल युवाओं को साथ लेकर अपने वादे पर अड़े रहते हैं तो राजस्थान सरकार को लोगों की भावनाओं के सामने झुकते हुए तमिलनाडू सरकार की तरह सोचना पड़ सकता है।

हुंकार तो भरी है, लेकिन साफ नहीं कह सकते

हालांकि मेले में होने वाली इन दौड़ों को लेकर विधायक बेनीवाल ने हुंकार भरते हुए पुन: कहा है कि राज्य सरकार को आगले दो महीनों में आमजन व 36 कौम की आस्था के केंद्र विश्व प्रसिद्ध नागौर जिले के मुंदियाड़ के गजानंदजी और खरनाल के वीर तेजाजी मेले तथा बालापीर के मेले में इस तांगा दौड़ को फिर से शुरू कराना चाहिए, क्योंकि ये दौड़ न केवल जनता के मनोरजंन के लिए है, वरन उनकी धार्मिक आस्था भी इन दौड़ों से जुड़ी हुई हैं।

विधानसभा में भी उठा चुके हैं मामला

आपको यह भी बता दें कि इसी साल बजट सत्र के दौरान लगातार तीसरी बार चुने गए विधायक बेनीवाल ने नागौर में होने वाली इस प्रसिद्ध दौड़ का मामला विधानसभा में भी उठाया था। जिसके जवाब में सरकार ने दौड़ करवाने को लेकर आश्वासन भी दिया था। बेनीवाल ने विधानसभा में कहा कि इन मेलों में होने वाली तांगा दौड़ों में घोड़ों के साथ किसी भी प्रकार की पशु क्रूरता नहीं की जाती है। दौड़ में हमेशा पूर्ण प्रशिक्षित घुड़सवार ही दौड़ में हिस्सा लेते हैं। इस मौके पर बेनीवाल ने कहा था कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद जब तमिलनाडु सरकार वहां के खेल जल्लीकुटु के लिए अध्यादेश ला सकती है तो राजस्थान सरकार इस दिशा में क्यों नहीं सोच पाती है।

नागौर के विधायक होने लगे एक

इस बीच राजस्थान के नागौर जिले के सभी विधायक एक होने लगे हैं। यहां के विधायक मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अध्यादेश लाने की मांग कर रहे हैं। बताया जाता है कि यहां के 3 विधायक अब तक सीएम को पत्र लिख चुके हैं। इसके अलावा जाट समाज से आने वाले सभी विधायक पत्र लिखकर सीएम राजे से तांगा दौड़ के लिए अध्यादेश के लिए आग्रह करने जा रहे हैं। विधायक चौधरी ने इस तांगा दौड़ को 36 कौम की आस्था का केंद्र बताते हुए इस धार्मिक आस्था को फिर से शुरू करवाने की अपील की है।

आगे क्या होगा?

अब देखना ये है कि राजस्थान सरकार के सकारात्मक कदम उठाने से यह तांगा दौड़ शुरू हो पाती है या फिर तीसरे साल भी हजारों लोगों की आस्था के इन मेलों को तांगा दौड़ करवाए बिना यूं ही सूखा निकाल दिया जाएगा। अगर इस दौड़ को पुन: शुरू किया जाएगा तो वादे के अनुसार सरकार को अध्यादेश लाना होगा। यदि सरकार ने इस बार भी इसको शुरू नहीं किया तो हो सकता है नागौर जिले में बेनीवाल की ओर से बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया जाए। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि विधायक बेनीवाल इस तांगा दौड़ की आस्था को हवा देकर लोगों को उकसाने से नहीं चूकेंगे।

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