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औपनिवेशिक मानसिकता त्यागने, राष्ट्रवादी सोच अपनाने के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज है संविधान: संविधान दिवस पर बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि संविधान औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने और राष्ट्रवादी...
औपनिवेशिक मानसिकता त्यागने, राष्ट्रवादी सोच अपनाने के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज है संविधान: संविधान दिवस पर बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि संविधान औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने और राष्ट्रवादी सोच अपनाने के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 75वें संविधान दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि हमारे संविधान-निर्माता चाहते थे कि हमारे व्यक्तिगत और लोकतांत्रिक अधिकार हमेशा सुरक्षित रहें। केंद्र की नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना देश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मू ने संविधान के डिजिटल संस्करण का 9 भाषाओं में विमोचन किया।

संविधान दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “आज के दिन 26 नवंबर 1949 में संविधान सभा के सदस्यों ने भारत संविधान के निर्माण का कार्य संपन्न किया था। आज के दिन उस पर हम भारत के लोगों ने अपने संविधान को अपनाया था। स्वाधीनता के बाद संविधान सभा ने भारत की अंतरिम संसद के रूप में भी कर्तव्य का निर्वहन किया। बाबा साहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर हमारे संविधान के प्रमुख निर्माता में से थे। बाबा साहब की 125वीं जयंती के वर्ष में यानी 26 नवंबर 2015 में हर साल संविधान दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया, ये निर्णय अत्यंत सार्थक निर्णय लिया गया।”

उन्होंने कहा कि हमारे संविधान-निर्माता भी यही चाहते थे कि हमारे निजी और लोकतांत्रिक अधिकार हमेशा सुरक्षित रहें। संविधान औपनिवेशिक मानसिकता छोड़कर राष्ट्रवादी सोच अपनाने का मार्गदर्शक दस्तावेज है। अपने संबोधन से पहले राष्ट्रपति ने मलयालम, मराठी, पंजाबी, नेपाली, बोडो, कश्मीरी, तेलुगू, ओडिया और असमिया समेत 9 भाषाओं में संविधान का ट्रांसलेटेड वर्जन जारी किया।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी संविधान दिवस पर संविधान सदन में कहा, “हमारे संविधान का ड्राफ्ट, बहस और फिर उसे भारत माता के हमारे महान नेताओं ने संविधान सभा में अपनाया। यह आजादी के लिए लड़ने वाले हमारे लाखों देशवासियों की मिली-जुली समझ, त्याग और सपनों को दिखाता है। महान विद्वानों, ड्राफ्टिंग कमिटी और संविधान सभा के सदस्यों ने करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए गहरी सोच दी। उनके बिना किसी स्वार्थ के योगदान ने भारत को आज दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाया है।”

उन्होंने कहा कि संविधान सामाजिक न्याय, कमजोर वर्ग के लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति हमारी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि हमारा संविधान समझ और अनुभव, त्याग, उम्मीदों और आकांक्षाओं से बना है। हमारे संविधान की आत्मा ने साबित कर दिया है कि भारत एक है और सदैव एक ही रहेगा।

विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ने की बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं की भावना के अनुरूप हम सभी को इस अमृत काल के दौरान विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए।

इस अवसर पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “सभी देशवासियों को बधाई और शुमकामनाएं। इस पावन अवसर पर आज भारत विधानसभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद, संविधान के शिल्पकार बाबा साहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर जी और संविधान सभा के सभी मान्य सदस्यों का आदरपूर्वक नमन करता हूं। उनके अद्भुत ज्ञान, वेग, दूरदृष्टि और अथक परिश्रम से ऐसा महान संविधान मिला है जो हमें न्याय, समानता, हर नागरिक के सम्मान और गरिमा की गारंटी देता है।”

इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 75वें संविधान दिवस के मौके पर संसद के संविधान सदन में संविधान दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए संसद पहुंचीं। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला समेत कई गणमान्य नेता भी मौजूद रहे।

 

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