Advertisement

"मणिपुर को टकराव नहीं, शांति चाहिए", राहुल गांधी का काफिला रोके जाने पर भड़की कांग्रेस

मणिपुर के बिष्णुपुर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का काफिला रोक जाने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर हमला...

मणिपुर के बिष्णुपुर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का काफिला रोक जाने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जातीय हिंसा से प्रभावित लोगों से मिलने से रोकने के लिए "निरंकुश तरीकों" का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार का यह कदम "पूरी तरह से अस्वीकार्य है और सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक मानदंडों को तोड़ता है।"

दो दिवसीय मणिपुर दौरे पर आए राहुल गांधी के काफिले को पुलिस ने तब रोका जब वह चुराचंदपुर में राहत शिविरों का दौरा करने जा रहे थे। पुलिस का कहना था कि किसी भी प्रकार की हिंसा भड़कने से रोकने के लिए उन्हें ऐसा करना पड़ा। काफिला रोके जाने को लेकर अब कांग्रेस भाजपा सरकार पर हमलावर हो गई है।

एक ट्वीट में, खड़गे ने कहा, "मणिपुर के बिष्णुपुर के समीप राहुल गांधी का काफिला पुलिस द्वारा रोका गया। वह राहत शिविरों में पीड़ित लोगों से मिलने और संघर्षग्रस्त राज्य में राहत पहुंचाने के लिए वहां जा रहे हैं। पीएम मोदी ने मणिपुर पर अपनी चुप्पी तोड़ने की जहमत नहीं उठाई है। उन्होंने राज्य को अपने हाल पर छोड़ दिया है।”

उन्होंने कहा, "अब, उनकी डबल इंजन विनाशकारी सरकारें निरंकुश तरीकों के ज़रिए राहुल गांधी को रोक रही हैं। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है और सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक मानदंडों को तोड़ता है। मणिपुर को शांति की आवश्यकता है, टकराव की नहीं।" चुराचंदपुर में राहत शिविरों का दौरा करने जा रहे राहुल गांधी को रोकने वाले पुलिस अधिकारियों ने कहा कि रास्ते में हिंसा की आशंका के चलते काफिले को रोक दिया गया।

उन्होंने कहा कि बिष्णुपुर जिले के उटलू गांव के पास राजमार्ग पर टायर जलाए गए और काफिले पर कुछ पत्थर फेंके गए। इम्फाल में एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "हमें ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति की आशंका है और इसलिए एहतियात के तौर पर हमने काफिले को बिष्णुपुर में रुकने का अनुरोध किया।"

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे "बहुत दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए कहा कि मोदी सरकार राहुल गांधी को राहत शिविरों में जाने और इम्फाल के बाहर लोगों से बात करने से रोक रही है। जयराम रमेश ने कहा, "उनकी दो दिवसीय मणिपुर यात्रा, भारत जोड़ो यात्रा की भावना के अनुरूप है। प्रधानमंत्री चुप्पी साधना या निष्क्रिय रहना चुन सकते हैं लेकिन मणिपुरी समाज के सभी वर्गों की बात सुनने और उन्हें राहत देने के राहुल गांधी के प्रयासों को क्यों रोका जा रहा है?''

कांग्रेस नेता गांधी के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और सेना अधिकारियों से बात कर रहे हैं। तीन मई को भड़की हिंसा के बाद लगाए गए 300 से भी अधिक राहत शिविरों में फिलहाल करीब 50 हज़ार लोग ठहरे हुए हैं। मेइती और कुकी समुदाय में भड़की हिंसा में अबतक राज्य के लगभग 120 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 3000 से अधिक घायल हो चुके हैं।

पहली बार तीन मई को तब दंगा भड़का था जब मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में जनजातीय एकजुटता मार्च का आयोजन किया गया। हिंसा से पहले कुकी ग्रामीणों को आरक्षित वन भूमि से बेदखल करने को लेकर तनाव था, जिसके कारण कई छोटे आंदोलन हुए थे। विदित हो कि मणिपुर की आबादी में मेइती लगभग 53 प्रतिशत हैं और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं। आदिवासी - नागा और कुकी - आबादी का 40 प्रतिशत हिस्सा हैं और पहाड़ी पर रहते हैं।

अब आप हिंदी आउटलुक अपने मोबाइल पर भी पढ़ सकते हैं। डाउनलोड करें आउटलुक हिंदी एप गूगल प्ले स्टोर या एपल स्टोर से
Advertisement
Advertisement
Advertisement
  Close Ad