Advertisement

सोनिया गांधी के पत्र पर कविता का सवाल: महिला आरक्षण विधेयक का उल्लेख क्यों नहीं

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की नेता तेलंगाना विधान परिषद की सदस्य के. कविता ने बुधवार को सवाल किया कि...
सोनिया गांधी के पत्र पर कविता का सवाल: महिला आरक्षण विधेयक का उल्लेख क्यों नहीं

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की नेता तेलंगाना विधान परिषद की सदस्य के. कविता ने बुधवार को सवाल किया कि कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी द्वारा संसद के विशेष सत्र के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने की मांग का उल्लेख क्यों नहीं किया गया है।

सोनिया गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया कि 18 सितंबर से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र के दौरान देश की आर्थिक स्थिति, जातीय जनगणना, चीन के साथ सीमा पर गतिरोध और अडाणी समूह से जुड़े नए खुलासों की पृष्ठभूमि में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की मांग समेत नौ मुद्दों पर उचित नियमों के तहत चर्चा कराई जाए।

कविता ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘यह देखकर दुख हुआ कि कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष और सांसद सोनिया गांधी जी ने महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा की तत्काल जरूरत को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सोनिया जी, राष्ट्र लैंगिक समानता के लिए आपकी सशक्त पैरवी का इंतजार कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी को लिखे आपके पत्र में हमें नौ महत्वपूर्ण मुद्दे देखने मिले, लेकिन महिला आरक्षण विधेयक क्यों नहीं है? क्या महिलाओं का प्रतिनिधित्व एक राष्ट्रीय महत्व का विषय नहीं है?’’

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में आग्रह किया कि देश की आर्थिक स्थिति खासकर महंगाई बेरोजगारी एवं छोटे उद्योगों पर संकट, किसान संगठनों के साथ समझौते के तहत एमएसपी लागू करने समेत किए गए कई वादों, अडाणी समूह से संबंधित जेपीसी की मांग, जातीय जनगणना कराने की मांग, केंद्र एवं राज्यों के संबंधों को नुकसान पहुंचाए जाने, प्राकृतिक आपदा के प्रभाव, चीन के साथ सीमा पर तनाव, हरियाणा एवं देश के कुछ अन्य हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव और मणिपुर के मुद्दे पर विशेष सत्र में चर्चा की जाए।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव की पुत्री कविता महिला आरक्षण विधेयक को पेश करने और पारित करने की मांग को लेकर इस साल मार्च की शुरुआत में भूख हड़ताल पर बैठी थीं और इस पर कानून बनाने की मांग पर जोर देने के लिए कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के साथ बातचीत की थी।

अब आप हिंदी आउटलुक अपने मोबाइल पर भी पढ़ सकते हैं। डाउनलोड करें आउटलुक हिंदी एप गूगल प्ले स्टोर या एपल स्टोर से
Advertisement
Advertisement
Advertisement
  Close Ad