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मेरी मां से मुझ तक पहुंची शशि की मुस्कराहट

मेरी मां से मुझ तक पहुंची शशि की मुस्कराहट

शशि कपूर को दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलना बहुत ही सुखद है। वह भले ही फिल्मी दुनिया के प्रचलित शब्द सुपर सितारे नहीं थे पर सितारे तो थे ही। उनकी फिल्मों से दर्शक जुड़े क्योंकि लोग उनके सहज अभिनय के कायल थे
निर्भया नहीं मिली…

निर्भया नहीं मिली…

मैं चाहता था कि सब कुछ ऐसा ही रहा आए। वह जानती थी कि कुछ भी ऐसा नहीं रहेगा। वह गीले कैनवास पर अधसूखे रंगों को धीरे से छूती, …कहती, ‘कितने अच्छे हैं, …पर धुंधला जाएंगे।’ मैं आंखें बंद कर कहता, ‘मैं और बना दूंगा, इनसे भी अच्छे, और चटक, और गहरे।’