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नीतीश को बुद्धिजीवियों का सहारा

नीतीश को बुद्धिजीवियों का सहारा

प्रोफेसर रघुवंश की पुस्तक हम भीड़ के लोकार्पण में दिल्ली आए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश ने सियासी बोलों की कोई कमी नहीं रखी। समाजवादी रघुवंश के बहाने उन्होंने अपने आपातकाल के किस्से सुनाए और भारतीय जनता पार्टी की तिरंगा यात्रा पर भी कटाक्ष किया। नीतीश ने कहा, ‘यह देख कर अच्छा लग रहा है कि जो लोग तिरंगा को मानते भी नहीं थे वे ही लोग अब तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं।’
छत्तीसगढ़ के गांवों में घर के बाहर बेटियों की नेमप्लेट

छत्तीसगढ़ के गांवों में घर के बाहर बेटियों की नेमप्लेट

छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के गांवों में लोगों ने स्थानीय प्रशासन की अनूठी मुहिम के तहत अपने घरों के बाहर अपनी बेटियों की नेमप्लेट लगाई है, ताकि लड़कियों की शिक्षा एवं समाज में उनकी पहचान को सशक्त बनाया जा सके।
नक्सल प्रभावित इलाकों में आकाशवाणी बनेगा हथियार

नक्सल प्रभावित इलाकों में आकाशवाणी बनेगा हथियार

माओवादी प्रभावित जिले में ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) ने तय किया है कि वॉल्व वाली पुरानी तकनीक को बदल कर उच्च क्षमता वाले नए ट्रांसमीटर लगाए जाएं ताकि सरकार अपने मन की बात के साथ लोगों की आवाज जन की बात भी सुन सके। छत्तीसगढ़ में रेडियो स्टेशन का न सिर्फ कलेवर बदल जाएगा बल्कि इसके कार्यक्रम और स्वरूप भी बदला जाएगा। अच्छे ट्रांसमीटरों के अभाव में लगभग बेकार पड़े रेडियो स्टेशनों पर सरकार 32 करोड़ रुपये निवेश कर छह नए आकाशवाणी के स्टेशन बनाएगी।
मुठभेड़ मामला: हाईकोर्ट ने दिया कब्र से शव निकालकर पोस्टमार्टम का आदेश

मुठभेड़ मामला: हाईकोर्ट ने दिया कब्र से शव निकालकर पोस्टमार्टम का आदेश

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर उच्च न्यायालय ने राज्य के सुकमा जिले में कथित मुठभेड़ में मारी गई मड़कम हिड़मे के शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम करने का आदेश दिया है।
छत्तीसगढ़ में 36 लाख परिवारों को निशुल्क खसरा

छत्तीसगढ़ में 36 लाख परिवारों को निशुल्क खसरा

छत्तीसगढ़ में पिछले लगभग एक महीने से जारी लोक सुराज अभियान के दौरान मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पाया कि राज्य के किसान और ग्रामीण अपनी जमीन का खसरा-नक्शा लेने के लिए परेशान होते हैं। इसके लिए उन्हें दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इन्हीं सब परेशानियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य के 36 लाख परिवारों को उनकी जमीन का मुफ्त खसरा-नक्शा उपलब्ध कराने का फैसला किया है।
कैंपस से निकली विचारों की आंधी

कैंपस से निकली विचारों की आंधी

छात्र राजनीति का इतिहास बहुत पुराना है। राष्ट्र के नव-निर्माण से लेकर आज तक यह जारी है। हाल में भारत के विश्वविद्यालयों से एक आंधी उठी है जो हो सकता है देश की राजनीति के लिए बवंडर साबित हो
बुजुर्ग को इंसाफ दिलाने वाले आशुतोष के जज्‍बे को सलाम

बुजुर्ग को इंसाफ दिलाने वाले आशुतोष के जज्‍बे को सलाम

लखनऊ के फोटो जर्नलिस्‍ट आशुतोष त्रिपाठी के कैमरे से ली गईं कुछ तस्वीरों ने न सिर्फ एक बुजुर्ग टाइपिस्‍ट को इंसाफ दिलाया बल्कि सोशल मीडिया की ताकत का भी अहसास करा दिया। पूरी ईमानदारी और साहस से अपना फर्ज निभाने वाले आशुतोष के जज्‍बे की भी खूब तारीफ हो रही है।
नियति से निर्वाण की कथा रंग राची

नियति से निर्वाण की कथा रंग राची

मीरांबाई की संघर्ष-यात्रा को केंद्र में रखकर लिखा गया उपन्यास ‘रंग राची’ आखिरकार पाठकों तक पहुंच ही गया। दिल्ली के साहित्य अकादमी सभागार में नामवर सिंह ने अध्यक्षीय आशीर्वचन दिया। उन्होंने कहा, ‘हिंदी में बहुत कवयित्रियां हुई लेकिन जो स्थान मीरां ने बनाया वह सब के लिए आदर्श है। मीरा को करूणा, दया के पात्र के रूप में देखने की जरूरत नहीं है, मीरां स्त्रियों के स्वाभिमान की प्रतीक हैं।’ इस उपन्यास को सुधाकर अदीब ने लिखा है और यह राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुई है।
मसान – एक दर्द की दो दास्तां

मसान – एक दर्द की दो दास्तां

मसान यानी श्मशान के इर्द-गिर्द भी प्रेम पनपता है। जलती चिता से उठती चिंगारियां दिल की कोमलता को नहीं झुलसा पातीं। नीरज घायवन ने कम संसाधनों में एक बढ़िया फिल्म रच दी है। दो कहानियां अतंतः एक ही मंजिल को पहुंचती हैं, त्रासदी।
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