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जिए जा रहे जीवन की गूंज

जिए जा रहे जीवन की गूंज

“जो लोग कुलदीप कुमार को साहित्यिक-सांस्कृतिक, सामाजिक-राजनैतिक विषयों पर निरंतर हिंदी-अंग्रेजी में...
जीवन सरल बीमा पॉलिसी के बारे में जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की, धोखाधड़ी के आरोप

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सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जीवन बीमा निगम की बीमा पॉलिसी जीवन सरल में लाखों ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी किए...
बीटी बैंगन की खेती करने वाले किसान जीवन सैनी के बचाव में आए संगठन, एक लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा

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हरियाणा सरकार द्वारा फतेहाबाद के किसान जीवन सैनी की बीटी बैंगन की फसल को नष्ट करने से हुए नुकसान की...
यादों के संदूक में शब्द

यादों के संदूक में शब्द

बचपन सभी का सुनहरा होता है। इसी बचपन की यादों का पिटारा जब शब्दों में सहेज लिया जाता है तो किताब बन जाता है। ऐसी ही एक किताब है आर के नारायण की। उनके बचपन के संस्मरणों पर आधारित इस किताब का नाम है, मेरी जीवन गाथा।
कांटों के बीच अपनों की चिंता

कांटों के बीच अपनों की चिंता

मनोज की कविताओं में समाज के विविध रंग दिखाई पड़ते हैं। परिवार के प्रति चिंता या अपनों की देखरेख की चिंता भी मनोज शब्दों में ऐसे बांधते हैं कि हर किसी को वह दुख साझा लगता है। सन 2008 के प्रतिष्ठित भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार के बाद भारतीय भाषा परिषद से तथापि जीवन नाम से काव्य संग्रह। कविताएं लिखने के अलावा अनुवाद के काम में संलग्न रहते हैं।
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