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भाजपा का सदस्‍यों को फरमान, आजादी के आंदोलनों में 'हिस्‍सेदारी' की खोज करो

भाजपा का सदस्‍यों को फरमान, आजादी के आंदोलनों में 'हिस्‍सेदारी' की खोज करो

अक्‍सर भाजपा के नेताओं पर यह तंज कसा जाता है कि आजादी की लड़ाई के वक्त भाजपा नहीं थी। इसलिए उनका देश की आजादी में कोई योगदान नहीं है। इसी तंज का मुकाबला करने के लिए भाजपा के मुख्‍याल ने पार्टी के सभी जिला मुख्यालयों को एक खास संदेश भेजा है। पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि वे अपने पारिवारिक एलबम, पर्सनल रिकॉर्ड या कोई भी ऐसा दस्तावेज जुटाएं, जिससे पता चलता हो कि भाजपा नेताओं ने 'राष्ट्रीय आंदोलनों' में हिस्सा लिया था।
नासा बना रहा है शनि के चंद्रमा टाइटन पर पनडुब्बी भेजने की योजना

नासा बना रहा है शनि के चंद्रमा टाइटन पर पनडुब्बी भेजने की योजना

शनि के चंद्रमा टाइटन पर मौजूद सबसे बड़े महासागर की गहराई का पता लगाने और जीवन के संकतों को तलाशने की मुहिम के तहत नासा वहां एक पनडुब्बी भेजने की योजना बना रहा है।
मेडिकल रिसर्च के लिए अपना ‘मंदिर’ दान कर गए ‘पॉकेट हरक्युलिस’

मेडिकल रिसर्च के लिए अपना ‘मंदिर’ दान कर गए ‘पॉकेट हरक्युलिस’

वे मानव शरीर को ‘मंदिर’ मानते थे। मंदिर की तरह ही अपने शरीर की उन्होंने देखभाल की। 104 साल की उम्र पाई। यहां बात देश के पहले मिस्टर यूनिवर्स मनोहर आइच की हो रही है। रविवार को उनका निधन हो गया। वे अपने ‘मंदिर’ को मेडिकल रिसर्च के लिए दान कर गए। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में उनका ‘मंदिर’ यानी शरीर मेडिकल के विद्यार्थियों के रिसर्च के काम आएगा।
किताबों के साथ गुजरे बचपन से जवानी में बढ़ती है आमदनी: स्टडी

किताबों के साथ गुजरे बचपन से जवानी में बढ़ती है आमदनी: स्टडी

किताबों के संग गुजारे गए बचपन के पल न सिर्फ मजेदार होते हैं, बल्कि बड़े होने पर आमदनी बढ़ाने की वजह भी बनते हैं। जी हां, एक नए अध्ययन में वयस्कों की आमदनी और किताबों के बीच गुजरे बचपन के साथ उसका गहरा रिश्ता पाया गया।
आप सरकार से नौकरी की पेशकश को रोहित वेमुला के भाई ने ठुकराया

आप सरकार से नौकरी की पेशकश को रोहित वेमुला के भाई ने ठुकराया

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रसासन की कथित प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या करने वाले दलित शोध छात्र रोहित वेमुला के भाई ने दिल्ली सरकार की तरफ से की गई नौकरी की पेशकश को स्वीकारने से मना कर दिया है। यह जानकारी दिल्ली की आप सरकार ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में दी है।
पृथ्वी पर 4.1 अरब वर्ष पहले हुई थी जीवन की शुरुआत

पृथ्वी पर 4.1 अरब वर्ष पहले हुई थी जीवन की शुरुआत

पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत 30 करोड़ वर्ष पहले नहीं बल्कि कम-से-कम 4.1 अरब वर्ष पहले हुई थी। पूर्व के दस्तावेजों के अनुसार, हमारे ग्रह पर 30 करोड़ वर्ष पहले जीवन की शुरुआत होने की बात कही गई थी लेकिन नये अनुसंधान में नए तथ्य सामने आए हैं।
नेपाल में नए संविधान को लेकर हो रहे बवाल से भारत भी असंतुष्ट

नेपाल में नए संविधान को लेकर हो रहे बवाल से भारत भी असंतुष्ट

भारत में नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत-नेपाल के रिश्तों में जो तल्खी आई है उसे एक बुरे सपने की तरह भूल जाना चाहिए। उपाध्याय के मुताबिक दोनों देशों के बीच जिस प्रकार के करीबी रिश्ते हैं उसकी तुलना किसी भी दूसरे देश के साथ नहीं की जा सकती। लेकिन इसके उलट नेपाल में नए संविधान का विरोध कर रहे सोशल रिपब्लिकन पार्टी के अध्यक्ष रामबाबू राय कहते हैं कि रिश्ते खराब करने की शुरूआत किसने की है, इस ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
वीरेन का जाना, जीवंत वामपंथी प्रतिज्ञा को गहरा आघात

वीरेन का जाना, जीवंत वामपंथी प्रतिज्ञा को गहरा आघात

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी साम्राज्यवाद और राष्ट्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदी-मार्का हिंदुत्ववादी फासीवाद के मौजूदा वर्चस्व के दौर में वीरेन डंगवाल (1948-2015) की कविता किसी आत्मीय, जीवंत, वामपंथी प्रतिज्ञा की तरह सामने आती है।
हार्ट अटैक के बाद दिल की मांसपेशियां फिर बना देगा यह प्रोटीन

हार्ट अटैक के बाद दिल की मांसपेशियां फिर बना देगा यह प्रोटीन

वैज्ञानिकों ने ऐसे प्रोटीन की पहचान की है जो दिल का दौरा पड़ने के बाद उसकी मांसपेशी की कोशिकाओं को फिर से बनाने में मदद करता है। अनुसंधाकर्ताओं ने यह भी बताया है कि हृदय के अंदर थोड़ी अधिक मात्रा में यह प्रोटीन रखा जाए तो चूहों और सुअरों में इससे न केवल हृदयघात के बाद दिल के कामकाज में सुधार होता है बल्कि उनके बचने की संभावना भी बढ़ जाती है।
कुपोषण से मुक्ति एक सपना बन गया है

कुपोषण से मुक्ति एक सपना बन गया है

कुपोषण एक ऐसी बीमारी जो कि बच्चों के विकास में बाधक ही नहीं बल्कि समाज के लिए चिंता का विषय है। कुपोषण से मुक्ति की सरकार लाख कोशिशें कर ले लेकिन इससे मुक्ति एक सपना बन गया है। राष्ट्रीय प्रतिष्ठान और सेव द चिल्ड्रेन के लिए किए जा रहे शोध के दौरान पाया गया कि सरकारी आंकड़े कुपोषण को लेकर कुछ और स्थिति बताते हैं जबकि जमीनी हकीकत कुछ और होती है।
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