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रवि दहिया: पिता रोज 40 किमी दूर आते थे दूध-फल देने, जानें- उनके संघर्षों को कैसे मिला सिल्वर

टोक्यो ओलंपिक 2020 के 14वें दिन फ़्री स्टाइल कुश्ती में भारत को सिल्वर मेडल मिल गया है। इस मेडल पर रवि...
रवि दहिया: पिता रोज 40 किमी दूर आते थे दूध-फल देने, जानें- उनके संघर्षों को कैसे मिला सिल्वर

टोक्यो ओलंपिक 2020 के 14वें दिन फ़्री स्टाइल कुश्ती में भारत को सिल्वर मेडल मिल गया है। इस मेडल पर रवि दहिया ने कब्जा किया है। कुश्ती के फाइनल मैच में उन्हें रूस के पहलवान जावुर युगुऐव ने 7-4 से मात दी जिसके बाद वह गोल्ड मेडल से चूक गए, लेकिन अब वह सिल्वर मेडल लेकर भारत लौटेंगे। रवि ने टोक्यो खेलों में भारत को यह पांचवां पदक जीताया है। 

5 फीट 7 इंट की लंबाई वाले रवि दहिया अपनी कैटेगरी में सबसे लंबे पहलवानों में से एक हैं। 2019 में वह कजाखिस्तान के नूर सुल्तान में हुई वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में बॉन्ज मेडल जीतकर ओलंपिक के लिए क्वालिफाई हुए थे।

रवि दहिया का जन्म 1997 में हरियाणा के सोनीपत जिले के नहरी गांव में हुआ था। उनका जन्म किसानों के परिवार में हुआ था। उनके पिता किसान थे, लेकिन उनके पास खुद की जमीन नहीं थी वह किराए की जमीन पर खेती कर अपना गुजारा करते थे। 10 साल की उम्र से ही रवि ने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में अपनी ट्रेनिंग शुरू कर दी थी। उन्होंने अपनी ट्रेनिंग 1982 के एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाले सतपाल सिंह से ली है।

रवि कुमार दहिया को पहलवान बनाने के पीछे की महनत किसी और की नहीं बल्कि उनके पिता की है। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। रवि के पिता राकेश हर रोज गांव से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित छत्रसाल स्टेडियम दूध और फल पहुंचवाया करते थे।

उनके पिता ने अपने बेटे के सपने पूरे करने के लिए कड़ी महनत की है। यहां तक की जब रवि 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज जीत कर लाए थे, काम के कारण उन्होंने अपने बेटे का प्रदर्शन तक नहीं देख पाया था।

रवि की प्रतिभा 2015 में सामने आई थी जब उन्होंने जूनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के 55 किलोग्राम कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता था। उस मुकाबले के सेमीफाइनल में रवि चोटिल हो गए थे। जिसके बाद सीनियर वर्ग में करियर बनाने के दौरान चोट के कारण उन्हें पीछे भी हटना पड़ा। उनकी पुरानी चोट ने 2017 में सीनियर नेशनल्स में उन्हें परेशान किया था। जिसकी वजह से उन्होंने मैट से कुछ वक्त कर दूरी बना ली थी।

रवि को उस चोट से ठीक होने में लगभग एक साल तक का समय लग गया था। हालांकि चोट ठीक होने के बाद उन्होंने अपने पहले वाले अंदाम में धमाकेदार वापसी की। 2018 में उन्होंने वर्ल्ड अंडर 23 रेसलिंग चैंपियनशिप में 57 किलोग्राम कैटेगरी में सिल्वर जीता था।

सन् 2019 में रवि दहिया ने वर्ल्ड चैंपियनशिप के सिलेक्शन में सीनियर रेसलर उत्कर्ष काले और ओलंपियन संदीप तोमर को मात दी थी। 2020 में भी रवि का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। देश में कोविड के पहले उन्होंने मार्च में दिल्ली में हुई एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड पर कब्जा जमाया था।

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