भारतीय जनता पार्टी का संगठन राजनैतिक ढांचा भर नहीं, बल्कि विचार, अनुशासन और समर्पण का उदाहरण है। यह संगठन उस मिट्टी से उपजा है, जहां राष्ट्र प्रथम और राजनीति सेवा का माध्यम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, गृह मंत्री अमित शाह की संगठनात्मक दृढ़ता और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्षों के निरंतर दिशा-निर्देश ने भाजपा को जन-आकांक्षाओं की ठोस संस्थागत अभिव्यक्ति बनाया है।
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में राजनीति तब सार्थक होती है, जब वह सत्ता से आगे बढ़कर सेवा, संकल्प और संस्कार का रूप धारण कर ले। भारतीय जनता पार्टी इसी विचारधारा की प्रतिनिधि है। कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कोहिमा तक, भाजपा ने “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” की भावना को व्यवहार में उतारा है।
भाजपा की राजनीति परिवारवाद बनाम परिश्रमवाद की स्पष्ट रेखा खींचती है, जहां अवसर उपनाम से नहीं बल्कि योग्यता से मिलता है। पंचायत से संसद तक सामान्य कार्यकर्ता को नेतृत्व की जिम्मेदारी देना भाजपा की आंतरिक लोकतांत्रिक शक्ति को दर्शाता है। समय-समय पर भाजपा ने अपने भीतर से ऐसे नेतृत्व को आगे बढ़ाया है, जिसने न केवल पार्टी को मजबूती दी, बल्कि भारतीय राजनीति को भी नई दिशा प्रदान की। आज जब भारतीय जनता पार्टी को अपना 12वां और सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष मिला है, तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भाजपा एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। नितिन नबीन का भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुना जाना केवल एक संगठनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि यह आने वाले दशकों की राजनीति की स्पष्ट झलक भी है। यह निर्णय अनुभव और ऊर्जा, संगठन और नवाचार, परंपरा और परिवर्तन के संतुलन का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लाल किले की प्राचीर से दिया गया वह उद्बोधन, जिसमें उन्होंने युवाओं से राजनीति में आने का आह्वान किया था, कोई क्षणिक या भावनात्मक भाषण नहीं था। वह एक सुविचारित, दीर्घकालिक रणनीति का सार्वजनिक उद्घोष था। तब उन्होंने एक लाख प्रतिभाशाली युवाओं को राजनीति में लाने की बात कही थी ताकि देश में परंपरागत वंशवादी राजनीति को खत्म कर राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी बढ़ाई जा सके। इस पहल के तहत ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ जैसे मंचों से युवाओं को नेतृत्व की भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा है। इसी क्रम में भाजपा की बागडोर भी एक समर्पित, परिश्रमी और विचारधारा के प्रति कटिबद्ध युवा कार्यकर्ता को सौंपा जाना ऐतिहासिक कदम है।
लोकतंत्र में नेतृत्व का मूल्य सिर्फ पद से नहीं, बल्कि अनुभव, संवेदनशीलता और जमीनी समझ से तय होता है। बिहार की राजनीति में नितिन नबीन ऐसा ही नाम है, जिनका नेतृत्व भाषणों से नहीं, बल्कि वर्षों की निरंतर जनसेवा और प्रशासनिक अनुभव से गढ़ा गया है। पांच बार बिहार विधानसभा के लिए निर्वाचित होना केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि जनता के विश्वास की निरंतर पुष्टि है। मंत्री के रूप में बिहार सरकार में उनकी भूमिका ने उनके नेतृत्व को और परिपक्व किया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की राजनीति का केंद्र बिंदु हमेशा से ही जनसेवा रहा है। उनका नेतृत्व अनुभव से उपजा है, इसलिए उनमें धैर्य भी है और दृढ़ता भी है। राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पदों पर कार्य करते हुए नितिन नबीन ने यह सिद्ध किया है कि संगठन चलाना केवल पद का विषय नहीं, बल्कि निरंतर परिश्रम, संवाद और संघर्ष की मांग भी करता है।
भाजपा की ताकत राष्ट्रवाद, सुशासन और सांस्कृतिक चेतना में है। यह विचार शाखाओं से लेकर बूथ तक, प्रशिक्षण शिविरों से लेकर संसद तक एक ही धड़कन में चलता है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेतृत्व को “कमांड” नहीं, “कनेक्ट” बनाया है। इसलिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्षों की भूमिका विचार और अनुशासन के सेतु की तरह रही है। अध्यक्षीय नेतृत्व ने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि विचारधारा कार्यपद्धति में दिखे चाहे वह सामाजिक समरसता हो, महिला सशक्तिकरण हो या फिर युवा नेतृत्व का निर्माण हो। भाजपा का संगठनात्मक मॉडल “सेवा, संवाद और समर्पण” पर टिका है। संवाद कार्यकर्ता और नेतृत्व के बीच एक भरोसा पैदा करता है, जबकि समर्पण कठिन परिस्थितियों में भी संगठन को एकजुट रखता है। यही कारण है कि भाजपा का कार्यकर्ता पहचान से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से बड़ा होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन का आग्रह, गृह मंत्री अमित शाह के निर्णायक और राष्ट्रीय अध्यक्षों का अनुशासन इन तीनों ने संगठन को अवसरवाद से दूर रखा है। नीति और नीयत की यह एकरूपता भाजपा को भरोसेमंद बनाती है। इसलिए यहां पद साध्य नहीं, साधन है। सत्ता लक्ष्य नहीं, सेवा का अवसर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार यह कहते रहे हैं कि नेतृत्व कोई वंशानुगत विशेषाधिकार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्कार है, जो अनुभव, संवाद और निरंतर सीखने की प्रक्रिया से विकसित होता है। यही सोच आज भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और उसके नेतृत्व मॉडल को परिभाषित करती है। इस दृष्टि से देखें, तो भाजपा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन केवल एक नेता नहीं, बल्कि उस नए भारत की राजनीतिक चेतना का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिसे प्रधानमंत्री मोदी जी ने आकार दिया है।
आज की युवा पीढ़ी की भाषा में कहें तो नितिन नबीन स्वयं एक मिलेनियल नेता हैं। 45 वर्ष की आयु में वह उस युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिसने भारत को रेडियो के दौर से लेकर स्मार्टफोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक एक साथ कई युगों से गुजरते हुए देखा है। यह केवल तकनीकी यात्रा नहीं रही, बल्कि सोच, समाज और शासन के तरीकों में आए गहरे परिवर्तन की यात्रा भी रही है। इसी बहुस्तरीय अनुभव ने उनके नेतृत्व को संतुलित, व्यावहारिक और भविष्यदर्शी बनाया है। मिलेनियल पीढ़ी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उसने परिवर्तन को डर के रूप में नहीं, अवसर के रूप में देखा है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने संगठन को बूथ से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक मजबूत किया है। आज के समय के अनुसार लोकतंत्र में सशक्त नेतृत्व वही है, जो संस्कारों से उपजा हो और समय की नब्ज पहचानता हो। भाजपा संगठन के लिए यह युवा नेतृत्व केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया वक्तव्य “आज से नितिन नबीन मेरे बॉस हैं और मैं उनका कार्यकर्ता हूं।” यह केवल आत्मीय टिप्पणी नहीं थी, बल्कि भाजपा की आंतरिक लोकतांत्रिक परंपरा का गहरा संदेश था। यह कथन बताता है कि भाजपा में पद नहीं, बल्कि दायित्व महत्वपूर्ण होता है। व्यक्ति नहीं, बल्कि संगठन सर्वोपरि होता है। यह वही संस्कृति है, जिसने एक साधारण कार्यकर्ता को प्रधानमंत्री बनने का अवसर दिया और आज एक अपेक्षाकृत युवा नेता को विश्व की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है। एक भाजपा कार्यकर्ता और मां भारती के सेवक के रूप में मैं यह विश्वास के साथ कह सकता हूं कि नितिन नबीन का नेतृत्व संगठन के हर स्तर बूथ से लेकर राष्ट्रीय मंच तक नई स्पष्टता और गति प्रदान करेगा। उनकी संगठनात्मक कुशलता, प्रशासनिक अनुभव और युवा दृष्टि कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
आज जब भारत ‘अमृतकाल’ की गौरवशाली यात्रा पर तीव्र गति से अग्रसर है, तब भाजपा संगठन का उत्तरदायित्व और भी व्यापक हो जाता है। पार्टी अपने वैचारिक अधिष्ठान को सुदृढ़ व्यवस्था में, नेतृत्व को अक्षुण्ण जन-विश्वास में और अनवरत पुरुषार्थ को सार्थक उपलब्धियों में रूपांतरित कर राजनीति की वास्तविक परिभाषा को चरितार्थ कर रही है। आज भाजपा में नूतन युग का उदय किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि उस दर्शन से होता है, जो अनुभव की परिपक्वता और नवाचार की नवीनता को एक सूत्र में पिरोता है। नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में दायित्व ग्रहण करना इसी वैचारिक संगम का जीवंत उदाहरण है।
यह मात्र नेतृत्व का हस्तांतरण नहीं, बल्कि ऐसा विस्तार है, जहां संगठन की जड़ें और अधिक गहरी होंगी और उसकी शाखाएं भविष्य के क्षितिज तक विस्तृत होंगी। आज भाजपा फिर यह संदेश दे रही है कि वह कालखंड के अनुसार स्वयं को ढालती तो है, किंतु अपने मूलभूत मूल्यों से कभी विचलित नहीं होती है। अनुकूलनशीलता और सिद्धांतों के प्रति यह अडिग निष्ठा ही भाजपा की वास्तविक शक्ति है। इस अवसर पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि संगठनात्मक पुनर्जागरण को एक अभियान नहीं, बल्कि आचरण बनाएं। ‘नूतन’ नेतृत्व पर विश्वास रखते हुए ‘नवीन’ संकल्पों को जन-जन तक पहुंचाए। भाजपा को और अधिक संगठित, समावेशी और सशक्त बनाकर राष्ट्र निर्माण की इस यात्रा में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें।

(बिहार विधान परिषद् सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रमुख, विचार निजी हैं)