लंदन यूनिवर्सिटी कॉलेज में कम्प्यूटर वैग्यानिक जुआन चेवेरिया ने इस फर्जी अकाउंट नेटवर्क का पता लगाया है। उन्होंने कहा कि ट्विटर पर बोट्स एैसे अकाउंट हैं जो कि किसी एक ही व्यक्ति द्वारा संचालित किए जाते हैं और इस बात का पता लगाना मुश्किल है कि कितने ट्विटर यूजर्स बोट्स हैं।
माना जा रहा है कि सबसे बड़े नेटवर्क का इस्तेमाल फौलोवर्स की संख्या गढ़ने, स्पैम भेजने और प्रचलित मुद्दों पर रुचि बढ़ाने के लिया किया गया होगा।
यह शोध इस बात का पता लगाने के लिए किया गया था कि लोग सोशल नेटवर्क का इस्तेमाल किस प्रकार से करते हैं। इसके लिए एक प्रतिशत ट्विटर यूजर्स के सैंपल को देखा गया, इन आंकड़ों में बहुत से अकाउंटों के जुड़े होने का पता चला जिससे यह समझ में आया कि कोई एक व्यक्ति ही बोटनेट को चला रहा है।
बीबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार इस शोध से यह बात सामने आई कि बोट्स का पता लगाने के लिए पहले के शोध इस तरह के नेटवर्कों का पता लगाने से इसलिए चूक गए क्योंकि ये स्वचालित अकाउंटों में अलग तरह से व्यवहार करते हैं।
साढ़े तीन लाख बोट्स के नेटवर्क का खुलासा इसलिए हो पाया क्योंकि इसके सभी अकाउंटों ने ऐसी कई साझा विशेषताएं दिखाईं जिससे पता चला कि ये सारे जुड़े हुए हैं। भाषा