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मुंबई क्लाइमेट वीक में पंचायत नेताओं ने साझा किए जलवायु-स्मार्ट देश बनाने का सुझाव

मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 के दौरान आयोजित विशेष पंचायत सत्र में देश के छह राज्यों के पंचायत प्रतिनिधियों...
मुंबई क्लाइमेट वीक में पंचायत नेताओं ने साझा किए जलवायु-स्मार्ट देश बनाने का सुझाव

मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 के दौरान आयोजित विशेष पंचायत सत्र में देश के छह राज्यों के पंचायत प्रतिनिधियों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के अपने जमीनी अनुभव साझा किए और बताया कि टिकाऊ समाधान गांवों से ही आ रहे हैं।

मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 के दौरान आयोजित विशेष पंचायत सत्र में देश के छह राज्यों — महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, बिहार, झारखंड और ओडिशा — के पंचायत प्रतिनिधियों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के अपने जमीनी अनुभव साझा किए। सत्र में यह संदेश उभरकर सामने आया कि भारत में प्रभावी जलवायु समाधान गांवों और पंचायतों से निकल रहे हैं।

जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘पंचायत्स लीडिंग इंडियाज क्लाइमेट चार्ज’ सत्र में पंचायत स्तर पर सौर ऊर्जा, टिकाऊ कृषि, फॉरेस्ट्री और संसाधन प्रबंधन जैसे उपायों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का आयोजन असर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स और पॉलिसी एंड डेवलपमेंट एडवाइजरी ग्रुप की कॉन्फ्रेंस ऑफ पंचायत्स पहल के तहत किया गया।

 

महाराष्ट्र के भंडारा जिले के बेला गांव की सरपंच शारदा गायधने ने बताया कि उनके गांव ने व्यापक वृक्षारोपण, सौर ऊर्जा के उपयोग, कचरा पृथक्करण और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से दूरी बनाकर राज्य का पहला नेट-ज़ीरो पंचायत बनने का लक्ष्य हासिल किया। इसके लिए बेला ग्राम पंचायत को 2024 में राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार में कार्बन न्यूट्रल विशेष पंचायत पुरस्कार मिला।

झारखंड के बोकारो जिले के सियारी गांव के मुखिया रामवृक्ष मुर्मू ने बताया कि बार-बार बिजली कटौती के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। कॉन्फ्रेंस ऑफ पंचायत्स से मिली सीख के बाद पंचायत ने सीएसआर फंड की मदद से 72 सोलर स्ट्रीट लाइट लगाईं। साथ ही स्कूलों और सामुदायिक भवनों में सौर ऊर्जा प्रणाली तथा तालाब पर सोलर लिफ्ट सिंचाई पंप लगाया गया, जिससे डीजल और अस्थिर बिजली पर निर्भरता कम हुई।

ओडिशा के कोरापुट जिले की निर्वाचित प्रतिनिधि जयंती नायक ने बताया कि आदिवासी महिलाओं के समूह ने भूमि उपयोग का दस्तावेजीकरण कर 10 हेक्टेयर से अधिक परती सामुदायिक भूमि की पहचान की। ग्राम सभा की मंजूरी के बाद इसे पंचायत विकास योजना में शामिल किया गया और 16 हजार पौधे लगाए गए, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी बने।

केरल के त्रिशूर जिले के पेरिनजानम पंचायत के पूर्व अध्यक्ष सचिथ के.के. ने बताया कि लगातार सामुदायिक जागरूकता अभियानों से पंचायत को ‘सोलर ग्राम’ में बदला गया। आठ वर्षों में 850 परिवार सौर ऊर्जा उपभोक्ता बने, जिससे बिजली खर्च में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आई।

कार्यक्रम में कर्नाटक के कोलार जिले से आए पंचायत सदस्य सूर्य नारायण राव ने टिकाऊ आजीविका और स्थानीय शासन को मजबूत करने के प्रयासों की जानकारी दी, जबकि बिहार के जमुई जिले के हरनी गांव के आदिवासी नेता कपिल डियो ने ग्रामीण विकास और सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़े अनुभव साझा किए।

वक्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने में पंचायतों की भूमिका अहम है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर लिए गए फैसले सीधे लोगों के जीवन और आजीविका को प्रभावित करते हैं। पंचायत आधारित ये प्रयास भारत में जलवायु बेहतर बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं।

सत्र को संबोधित करते हुए सेंटर फॉर यूथ एंड सोशल डेवलपमेंट के सह-संस्थापक एवं मेंटर जगदानंद ने कहा कि जलवायु सहनशीलता का भविष्य क्लाइमेट-स्मार्ट पंचायतों में है, जहां भूमि, जल, आजीविका और लोग एक साथ जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु-स्मार्ट भारत की शुरुआत पंचायतों से ही होगी।

पीडीएजी के सह-संस्थापक अरिंदम बनर्जी ने कहा कि कॉन्फ्रेंस ऑफ पंचायत्स का उद्देश्य स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की क्षमता बढ़ाना है, ताकि वे उभरते जलवायु जोखिमों का प्रभावी समाधान कर सकें। यह पहल 2028 तक एक राष्ट्रीय स्थानीय जलवायु कार्रवाई मंच के निर्माण में सहायक हो सकती है।

असर की सीईओ विनुता गोपाल ने कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आए पंचायत प्रतिनिधियों ने यह दिखाया है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रभावी कदम पहले से ही हर लगाए गए पेड़, हर सोलर पैनल और हर ग्राम योजना के जरिए जमीन पर आकार ले रही है। ये जमीनी मॉडल साबित करते हैं कि सबसे टिकाऊ समाधान वही हैं जो समुदायों से शुरू होकर व्यापक स्तर तक पहुंचते हैं।

उल्लेखनीय है कि मुंबई क्लाइमेट वीक भारत का पहला ऐसा मंच है, जो जलवायु बेहतर बनाने के प्रयासों को गति देने के लिए समर्पित है। 

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