बनारस लिट फेस्ट ने दूसरे बनारस लिट फेस्ट बुक अवॉर्ड्स की लॉन्गलिस्ट की घोषणा कर दी है। इन पुरस्कारों के अंतर्गत वर्ष 2025 में प्रकाशित विभिन्न विधाओं और भाषाओं की चुनिंदा एवं उल्लेखनीय साहित्यिक कृतियों को सम्मानित किया जाएगा। कथा साहित्य, कथेतर गद्य, कविता और अनुवाद की श्रेणियों में प्रदान किए जाने वाले ये पुरस्कार लेखकों के साथ-साथ अनुवादकों के सृजनात्मक और बौद्धिक योगदान को भी समान रूप से रेखांकित करते हैं।
इस वर्ष की लॉन्गलिस्ट में स्थापित साहित्यकारों के साथ-साथ उभरती हुई नई रचनात्मक आवाज़ों की कृतियाँ भी शामिल हैं, जो समकालीन भारतीय लेखन की गंभीरता, विविधता और सृजनात्मक ऊर्जा को प्रभावशाली ढंग से सामने लाती हैं।
रवींद्रनाथ टैगोर अनुवाद पुरस्कार, सर्वपल्ली राधाकृष्णन कथेतर गद्य पुरस्कार, रस्किन बॉण्ड कथा साहित्य पुरस्कार, प्रेमचंद कथा पुरस्कार, महादेवी वर्मा कथेतर गद्य पुरस्कार, राहुल सांकृत्यायन अनुवाद पुरस्कार और कबीर कविता पुरस्कार जैसी श्रेणियाँ भारत की बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक और जीवंत साहित्यिक परंपरा के प्रति बनारस लिट फेस्ट की गहरी प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करती हैं।
दूसरे बनारस लिट फेस्ट बुक अवॉर्ड्स – लॉन्गलिस्ट (अंग्रेज़ी)
रस्किन बॉण्ड पुरस्कार (फिक्शन)
द वर्ल्ड विद इट्स माउथ ओपन — ज़ाहिद रफ़ीक़
टेल्स फ्रॉम द डॉन-लिट माउंटेन्स — सुबी ताबा
म्यूज़ेस ओवर मुंबई — मुरज़बान एस. श्रॉफ
द एल्सव्हीरियन्स: ए डॉक्यूमेंट्री — जीत थायिल
आवर फ्रेंड्स इन गुड हाउसेज़ — राहुल पंडिता
ईडन अबैंडन्ड: द स्टोरी ऑफ़ लिलिथ — शिनी एंटनी
द टाइगर’ज़ शेयर — केशव गुहा
द बर्निंग्स — हिमांजलि संकर
मिसेज़ हैपिली सिंगल — शुभा सरमा
ए फ़ेटल डिस्ट्रैक्शन — संयुक्ता भौमिक
सरोजिनी नायडू पुरस्कार (कविता)
फ्रीरेन — ईस्टरिन कीर
द गैलरी ऑफ़ अपसाइड डाउन विमेन — अरुंधति सुब्रमण्यम
द हनुमान चालीसा — अभय के
टुमॉरो समवन विल अरेस्ट यू — मीना कंदासामी
सो दैट यू नो — मणि राव
कॉइन्स इन रिवर्स — रोशेल पोतकर
लोन पाइन — सिद्धार्थ मेनन
द आर्ट ऑफ़ अनबॉक्सिंग — नीरा कश्यप
ए ब्लर ऑफ़ अ वुमन — बसुधारा रॉय
मेरकस्टापा: बॉर्डर वॉकर — ब्रेनर्ड प्रिंस
सर्वपल्ली राधाकृष्णन पुरस्कार (नॉन-फिक्शन)
फ़ादर टंग, मदरलैंड — पैगी मोहन
द कॉल ऑफ़ म्यूज़िक — प्रिया पुरुषोत्तमन
लर्निंग फ्रॉम साइलेंस — पिको अय्यर
कैंडल इन द विंड — शर्मिष्ठा शेनॉय
द फ़ॉल ऑफ़ काबुल — नयनीमा बसु
स्टोरी ऑफ़ एन अननोन इंडियन — नेहा दीक्षित
शैटर्ड लैंड्स — सैम डैलरिम्पल
बिलीवर’ज़ डिलेमा — अभिषेक चौधरी
चार्ल्स कोरिया: सिटिज़न चार्ल्स — मुस्तानसिर दलवी
सॉन्ग ऑफ़ द क्ले पॉट — सुमना चंद्रशेखर
रवींद्रनाथ टैगोर पुरस्कार (अनुवाद)
लिमिटेड / अनलिमिटेड — शंकर
अनुवाद: अरुणावा सिन्हा
दिस प्लेस ऑफ़ मड एंड बोन — संजय बिस्टा
अनुवाद: अनुराग बस्नेत
द डेड फ़िश — राजकमल चौधरी
अनुवाद: महुआ सेन
द आउल, द रिवर, द वैली — अरूपा पतंगिया कलिता
अनुवाद: मित्रा फूकन
कास्ट अवे — ना. वनमामलाई
अनुवाद: जोशुआ ज्ञानसेल्वन
हूज़ उर्दू इज़ इट एनीवे? — रख्शंदा जलील
लूटालूट — बाबूराव बागुल
अनुवाद: मानव कौल
द मैडहाउस: पागलख़ाना — ज्ञान चतुर्वेदी
अनुवाद: पुनर्वसु जोशी
द डिवाइन स्वॉर्ड — रीता चौधरी
अनुवाद (असमिया से): रीता बोरबोरा
शबनम — सैयद मुज्तबा अली
अनुवाद: नाज़ेस अफ़रोज़
दूसरे बनारस लिट फेस्ट बुक अवॉर्ड्स – लॉन्गलिस्ट (हिंदी)
प्रेमचंद पुरस्कार (कथा साहित्य)
दूरस्थ दाम्पत्य — ममता कालिया
हलफ़नामे — राजू शर्मा
खलल — संतोष दीक्षित
मतलब हिन्दू — अम्बर पाण्डेय
अप्रेम और अन्य कहानियाँ — अनिल यादव
त्रिमाया — मनीषा कुलश्रेष्ठ
प्रतिरूप — मनोज कुमार पांडेय
अतर — प्रत्यक्षा
नया नगर — तस्नीफ़ हैदर
इश्क़ बाक़ी —पंकज दुबे
कबीर पुरस्कार (कविता)
रंगसाज़ की रसोई — अरुण कमल
एक अनाम पत्ती का स्मारक — नरेश सक्सेना
पागल गणितज्ञ की कविताएँ — उदयन वाजपेयी
जब चीज़ें देर से आती हैं जीवन में — निशांत
बुद्ध और फराओ — दीपक जायसवाल
प्रेम के पक्ष में प्रार्थना — कुंदन
भाषा में नहीं — सपना भट्ट
मैं गायक बनना चाहता था — हरिओम राजोरिया
श्रेयसी — विनय कुमार
नीली ब्याज — अदनान कफ़ील ‘दरवेश’
राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार (कथेतर)
गांधी के बहाने — पराग मांदले
हिंदी साहित्य के 75 वर्ष: नेहरू युग से मोदी युग तक — सुधीर पचौरी
भक्ति का लोकवृत्त और रविदास की कविताई — श्रीप्रकाश शुक्ल
यादों के शिलालेख — सूर्यबाला
यूँ गुज़री है अब तलक — सीमा कपूर
जब से आँख खुली है — लीलाधर मंडलोई
ठाकुरबाड़ी — अनिमेष मुखर्जी
किसानी की कहानी: बेटी के लिए - सोरित गुप्तो
दुःख की दुनिया भीतर है — जे. सुशील
न्यूज़ चैनलों का जनतंत्र — आनंद प्रधान
महादेवी वर्मा पुरस्कार (अनुवाद)
सभ्यता के कोने — रामचन्द्र गुहा
अनुवाद: अनिल माहेश्वरी
जाग तुझको दूर जाना — नमिता गोखले
अनुवाद: ऐश्वर्य कुमार
अम्बेडकर : एक जीवन — शशि थरूर
अनुवाद: अमरेश द्विवेदी
चरु, चीवर और चर्या — प्रदीप दाश
अनुवाद: सुजाता शिवेन
857 की क्रान्ति का अवध – थॉमस हेनरी कावानाघ
अनुवादक: राजगोपाल सिंह वर्मा
बनारस के विस्मृत जननायक : बाबू जगत सिंह — एच. ए. क़ुरेशी, श्रेया पाठक, अनुवादक: शान कश्यप
अपनी धुन में आत्मकथा लेखक — रस्किन बॉण्ड
अनुवाद: प्रभात सिंह
लोकतंत्र की चौकीदारी — स्टीवेन लेवित्सकी, डेनियल ज़िब्लाट
अनुवाद: अभिषेक श्रीवास्तव
क्यों नहीं हो सकते हाथी लाल? — वाणी त्रिपाठी टिक्कू
अनुवाद: अदिति माहेश्वरी-गोयल
समीर: लफ़्ज़ों के साथ एक सफ़रनामा — डेरेक बोस
अनुवाद: प्रभात मिलिंद
बनारस लिट फेस्ट के अध्यक्ष दीपक माधोक ने लॉन्गलिस्ट जारी करते हुए कहा,
“बनारस लिट फेस्ट बुक अवॉर्ड्स के दूसरे संस्करण की लॉन्गलिस्ट प्रस्तुत करते हुए हमें भारतीय साहित्य की भाषाई और विधागत विविधता का उत्सव मनाने का अवसर मिला है। ये कृतियाँ कहानी कहने, अनुवाद और सांस्कृतिक संवाद की उसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं, जो बनारस लिट फेस्ट की आत्मा है।”
वहीं, फेस्ट के सचिव बृजेश सिंह ने कहा, “बनारस लिट फेस्ट बुक अवॉर्ड्स के दूसरे वर्ष की यह लॉन्गलिस्ट समकालीन भारतीय लेखन और अनुवाद की व्यापकता को सामने लाती है। इस वर्ष हमें प्रमुख प्रकाशन संस्थानों और व्यक्तिगत लेखकों से लगभग 1,200 नामांकन प्राप्त हुए। हमारी प्रतिष्ठित जूरी ने अत्यंत सावधानी और परिश्रम के साथ इस सूची का चयन किया है। ये पुस्तकें नए दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं और साहित्यिक परिदृश्य को समृद्ध बनाती हैं। अब हमें शॉर्टलिस्ट की घोषणा का बेसब्री से इंतज़ार है।”
बनारस लिट फेस्ट बुक अवॉर्ड्स 2025 की शॉर्टलिस्ट 17 जनवरी 2026 को घोषित की जाएगी, जबकि अंतिम विजेताओं की घोषणा 21 जनवरी 2026 को होगी। प्रत्येक श्रेणी के विजेता को ₹51,000 की नकद राशि, एक ट्रॉफी और प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा, जो फेस्टिवल के दौरान सम्मानित किए जाएंगे।
बनारस लिट फेस्ट और बुक अवॉर्ड्स से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट देखें या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हमें फॉलो करें।