मराठवाड़ा के संभाजीनगर जिले का गुमनाम-सा बेहद शांत शहर खुल्दाबाद एक बार फिर विवाद से सुर्खियों में आ गया है। शहर के ऐतिहासिक इलाके की संकरी गलियों में सफेदी से रंगी हुई एक सूफी दरगाह हिंदुत्व कट्टरपंथियों के निशाने पर है क्योंकि उसमें मुगल बादशाह औरंगजेब, उनकी पत्नी और बेटे की कब्र है। औरंगजेब अपनी मौत के तीन सदी बाद भी उन हिंदुत्ववादी ताकतों के निशाने पर है, जो मुगल बादशाह के वजूद का हर निशान मिटा डालने पर आमादा हैं। यह सिलसिला हाल ही में विकी कौशल अभिनीत फिल्म छावा की बॉक्स-ऑफिस कामयाबी के बाद शुरू हुआ है, जो शिवाजी के सबसे बड़े बेटे और मराठा साम्राज्य के दूसरे छत्रपति संभाजी भोसले की कहानी बताती है, जिसकी औरंगजेब के साथ जंग में मौत हो गई थी। कट्टर हिंदुत्ववादी संगठनों ने अब खुल्दाबाद में औरंगजेब की कब्र को ध्वस्त करने की नई मांग उठाई है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की देखरेख में है।
धमकियों के सिलसिले के बाद, एएसआइ और स्थानीय अधिकारियों ने खुल्दाबाद में सूफी दरगाह के पास सुरक्षा बढ़ा दी है। यह मकबरा एक साधारण पत्थर के चबूतरे पर बना है जिस पर कोई सजावट नहीं है। माना जाता है कि इसे सूफी संत जैनुद्दीन के शिष्यों ने उनकी मौत के बाद बनवाया था।
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महाराष्ट्र में विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख गोविंद शेंडे ने कहा, ‘‘औरंगजेब हमारे पिछले उपनिवेशवाद का प्रतीक है। हमने पहले ही उसके नाम पर स्थानों के नाम बदल दिए हैं, तो फिर हम अपने राज्य में उसकी कब्र क्यों रहने दें। हिंदू अब जाग चुके हैं और हम हिंदू गौरव का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’ 17 मार्च को शिवाजी जयंती (संवत तिथि के मुताबिक) के अवसर पर विहिप और बजरंग दल ने औरंगजेब की कब्र को राज्य से हटाने की मांग को लेकर अभियान शुरू किया। शेंडे ने कहा, ‘‘हम पूरे राज्य में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेंगे और जिला अधिकारियों से कब्र हटाने की अपील करेंगे। अगर सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो हमारा आखिरी कदम कार्रवाई अपने हाथों में लेना होगा।’’
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और सत्तारूढ़ महायुति के दो धड़े (भाजपा और शिवसेना-शिंदे गुट) के शीर्ष नेताओं से इस मांग को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है, जो कब्र को ध्वस्त करने के हिमायती हैं। संभाजीनगर से शिंदे शिवसेना के विधायक संजय शिरसाट ने कहा कि कब्र को हटाने के लिए पहले भी कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं। वे कहते हैं, ‘‘अगर इस जगह से उसका वजूद खत्म हो जाए तो हमें संतोष होगा।’’
जून 2022 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली तत्कालीन महाविकास अघाड़ी सरकार ने औरंगाबाद जिले का नाम बदलकर संभाजीनगर कर दिया था। भारी बहुमत से सत्ता में आने के बाद भाजपा अब जिले में औरंगजेब की कब्र को निशाना बनाकर मराठा सियासत पर अपनी छाप भी लगाना चाहती है, हालांकि उसने महायुति के अपने सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अजीत पवार गुट के लिए स्थिति असहज बना दी है। अजीत गुट धर्मनिरपेक्ष विचारधारा का दावा करता है और मराठवाड़ा तथा पश्चिमी महाराष्ट्र क्षेत्र में मुस्लिम समुदायों का उसे समर्थन प्राप्त है। उसने भाजपा और शिंदे गुट के रुख से आधिकारिक तौर पर खुद को अलग कर लिया है। इससे पहले, समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी को औरंगजेब को ‘अच्छा प्रशासक’ बताने वाले उनके बयान के लिए निलंबित किए जाने के बाद राकांपा ने मौन रहना बेहतर समझा।
राकांपा अजीत गुट के प्रवक्ता आनंद परांजपे ने कहा, ‘‘महायुति गठबंधन के साथ राकांपा का समझौता विकास के मुद्दे पर है। हम महाराष्ट्र के विकास के सभी मामलों में अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ खड़े रहेंगे, लेकिन कुछ मुद्दों पर हमारे विचार अलग हैं और हम इस पर कायम हैं। यह (कब्र) एएसआइ संरक्षित स्मारक है और महाराष्ट्र सरकार इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं कर सकती। इस बारे में फैसला केंद्र सरकार को करना है। महाराष्ट्र में विरोध करने के बजाय भाजपा सदस्यों को अपना आंदोलन दिल्ली ले जाना चाहिए।’’ परांजपे ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि औरंगजेब क्रूर शासक था जिसने हिंदू मंदिरों को नष्ट किया था, लेकिन उसकी मृत्यु के 300 साल बाद इस मुद्दे को उठाना अनुचित है।
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इस बीच, कांग्रेस विधायक हर्षवर्धन सपकाल ने दावा किया कि भाजपा सरकार औरंगजेब पर राजनीति करके तालिबान की तरह काम कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘हम हर साल राम की वीरता के सम्मान के लिए रावण का पुतला जलाते हैं। इसी संदर्भ में, औरंगजेब महान मराठों और मावलों की बहादुरी का प्रतीक है, जिन्होंने इस क्षेत्र को मुगलों से बचाया था।’’
सपकाल ने कहा कि सदियों तक शिवाजी का विश्राम स्थल अज्ञात रहा, जब तक कि समाज सुधारक ज्योतिराव फुले ने रायगढ़ किले में उसकी खोज नहीं की, ‘‘लेकिन उनसे यह श्रेय छीनने की कोशिश की जा रही है। सरकार को तो अभी ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।’’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने पहले समाधि खोजने का श्रेय लोकमान्य तिलक को दिया था।
इतिहासकार विश्वास पाटील का कहना है कि शिवाजी महान हिंदू शासक थे जिन्होंने अपनी मुस्लिम प्रजा का भी खयाल रखा और अपनी सेना में कई मुस्लिम कमांडरों को भर्ती किया। प्रतापगढ़ की प्रसिद्ध लड़ाई के बाद, जहां उन्होंने ताकतवर मुगल शासक अफजल खान को धोखे से गले लगाया और उसे तीखे बाघ के पंजे वाले हथियार से मार डाला, शिवाजी ने खान की कब्र के लिए जमीन भी दी।
उन्होंने कहा, ‘‘शिवाजी ने मंत्रियों और सैनिकों को याद दिलाया था कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद किसी से दुश्मनी नहीं निभानी चाहिए। जब यह उपदेश शिवाजी ने खुद दिया था और इतिहास में इसका अच्छी तरह से उल्लेख है, तो औरंगजेब की कब्र को हटाना मूर्खता होगी।’’
उधर, कर्नाटक के बेंगलूरू में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के दौरान संघ के प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि औरंगजेब का मुद्दा अप्रासंगिक है, लेकिन बैठक के बाद आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि हमें औरंगजेब की जगह दारा शिकोह पर ध्यान देना चाहिए।