Advertisement

महाराष्ट्र/नगर निगम चुनाव: बदला दबदबा मगर कई पेच

विवादों के साये में महायुति ने मुंबई नगरपालिका की सत्ता का रंग अरसे बाद बदल दिया, मगर नतीजे शिवसेना के...
महाराष्ट्र/नगर निगम चुनाव: बदला दबदबा मगर कई पेच

विवादों के साये में महायुति ने मुंबई नगरपालिका की सत्ता का रंग अरसे बाद बदल दिया, मगर नतीजे शिवसेना के समर्थन में कोई बड़ी कमी की गवाही नहीं देते

नगर निगम चुनाव शायद ही कभी विधानसभा या लोकसभा चुनावों की तरह लोगों का ध्यान खींच पाते हैं। फिर भी, हाल में हुए महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव कुछ ज्‍यादा ही दिलचस्‍पी जगा गए। इसमें सबसे अहम बृहन्‍मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के चुनाव में दांव बड़े थे, जहां चार साल बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनावों का ऐलान किया गया था। गौरतलब है कि बीएमसी देश की सबसे अमीर नगरपालिका है, जिसका सालाना बजट 74,000 करोड़ रुपये होता है। यह रकम गोवा, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्‍यों के बजट के योग से भी ज्‍यादा है। खैर, वार्डों के नतीजों और मेयर के गणित के अलावा ये चुनाव बदलती राजनैतिक वफादारियों, गठबंधन के समीकरण के साथ-साथ चुनावी नतीजों और जनता के भरोसे के बीच बढ़ते विरोधाभास की भी तस्वीर पेश करते हैं।

इन्‍हीं उलझे संदेशों की वजह से 16 जनवरी को आए नतीजों के दस दिनों बाद भी मेयर के चुनाव का इंतजार है। दरअसल, मतदान के दिन के तमाम आरोप-प्रत्‍यारोपों के बावजूद आखिरकार जो नतीजे आए वे इतना तो तय करते हैं कि महायुति यानी भाजपा, शिंदे शिवसेना के गठबंधन को फायदा हुआ, लेकिन मुंबई में भाजपा की सीटों में इतना इजाफा नहीं हो पाया (2017 में 82 से 2026 में 89) कि वह अपने दम पर अपना मेयर बनाने की लंबी सियासी ख्‍वाहिश पूरी कर पाए। शिंदे शिवसेना को 29 और उद्धव शिवसेना को 65 सीटें मिलीं। यह संख्‍या अविभाजित शिवसेना की पिछली बार की 92 सीटों से ज्‍यादा ही है। यहां यह भी गौरतलब है कि पिछली बार 54 पार्षद टूटकर शिंदे के साथ चले गए थे, तब भी उद्धव गुट के लिए मौजूदा नतीजे ज्‍यादा निराशाजनक नहीं हैं।

राज और उद्धव ठाकरे

शायद यही गणित उप-मुख्‍यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए खास महत्‍व का बन गया और वे संकेत दे रहे हैं कि 2017 में भी भाजपा की सीटें शिवसेना के गठजोड़ की वजह से बढ़ी थीं (उसके पहले 2012 के चुनावों में भाजपा को 36 सीटें ही मिली थीं) और इस बार भी उनका साथ न होता, तो भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर नहीं उभर पाती। हालांकि शिंदे ने अपने नए पार्षदों को कई दिनों तक एक साथ एक होटल में रखा, ताकि कोई टूट-फूट न हो। वे यह भी कहने से नहीं चूके कि उन्‍हें टूट-फूट की आशंका अंदर से ज्‍यादा है।

उधर, शिवसेना उद्धव गुट के नेता उद्धव ठाकरे को एक क्षीण-सी उम्‍मीद थी कि ‘‘भगवान चाहेगा तो मेयर शिवसेना का होगा।’’ उनका इशारा उस लॉटरी व्‍यवस्‍था की ओर था, जिसमें यह तय होता है कि इस बार किस वर्ग (सामान्‍य, महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति) का मेयर होगा। अगर अनुसूचित जनजाति वर्ग की पर्ची निकलती है, तो उस वर्ग के दो पार्षद सिर्फ उद्धव गुट के पास ही हैं। उद्धव गुट की उम्‍मीद और शिंदे गुट की आकांक्षा की एक और वजह है कि यह संस्‍थापक दिवंगत बाल ठाकरे का शताब्दी वर्ष भी है। लेकिन पर्ची महिला श्रेणी की निकली। हाल के वर्षों में एक संशोधन के हवाले से अनुसूचित जनजाति वर्ग की पर्ची डाली ही नहीं गई।

बीएमसी की कुल 227 में 120 सीटें महायुती को मिलीं, जबकि ठाकरे भाइयों के नेतृत्व वाला गठबंधन 73 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। कांग्रेस 24 सीटें ले पाई। ये चुनाव मुंबई में दशकों के राजनैतिक दौर के अंत का गवाह बनने जा रहा है। यह शहर की सत्ता संरचना में एक बड़े बदलाव का संकेत है। शहर में चार साल के अंतराल के बाद फिर से मेयर बनने वाला है। मुंबई की आखिरी मेयर अविभाजित शिवसेना की किशोरी पेडनेकर थीं। वे 22 नवंबर, 2019 से 8 मार्च, 2022 तक कुर्सी पर थीं।

इसके बावजूद अभी पेंच फंसा हुआ है और संभव है मेयर के चुनाव में कुछ और वक्‍त लगे। पेंच मुंबई में ही नहीं, दूसरे नगर निगमों में भी है। दूसरी जगहों पर भी मेयर के नाम पर सुलह होना बाकी है। खैर, नतीजे यह भी बताते हैं कि शहरी महाराष्ट्र में महायुति का दबदबा कायम हो गया है। राज्‍य के 29 नगर निगमों के नतीजों में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को जीत मिली। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों में भाजपा निर्णायक रूप से अजीत पवार की राकांपा और शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (एसपी) गठबंधन से आगे निकल गई है, जो क्षेत्रीय दिग्गजों के पारंपरिक प्रभाव में कमी का संकेत देता है। इन चुनावों में एक मंच पर आए दोनों राकांपा गुट पुणे में अपनी चमक नहीं दिखा पाए। भाजपा ने पुणे नगर निगम की 165 सीटों में से 110 सीटों और पिंपरी-चिंचवड़ की 128 सीटों में 81 सीटों पर भारी बढ़त हासिल की।

ऐसे ही नतीजे पूरे पश्चिमी महाराष्ट्र में आए। भाजपा कोल्हापुर, सतारा, सोलापुर और सांगली जैसे नगर निकायों में आगे है। कुल मिलाकर, भाजपा ने राज्य भर में 1,170 से ज्‍यादा वार्डों में जीत हासिल की। उसकी सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 300 से ज्‍यादा वार्डों में जीत हासिल की। ये आंकड़े न सिर्फ चुनावी कामयाबी, बल्कि महायुति की शहरी निकायों पर दबदबे का संकेत देते हैं।

इस बदलाव में गौर करने की बात यह भी है कि कांग्रेस का अपेक्षाकृत प्रदर्शन बेहतर हुआ है। वह भाजपा से लातुर सहित दो नगर निगम छीनने में कामयाब रही है और मुंबई में सबसे बड़े दांव वाले धारावी में भी अपना समर्थन बचाने में कामयाब रही है। ये नतीजे राकांपा के दोनों गुटों के लिए जरूर परेशानी पैदा करने वाले हैं। मुंबई में तो वे 5 (अजित गुट को 3 और शरद पवार खेमे को 2) सीटों तक सिमट आए।

चुनावी नतीजों के साथ पूरी चुनावी प्रक्रिया पर कई तरह के सवाल खड़े हुए हैं। विपक्षी पार्टियों ने बड़े पैमाने पर ‘वोट चोरी’ और भाजपा पर वोटिंग से पहले पैसे और घरेलू सामान बांटने का आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रवक्‍ता डॉ. शमा मोहम्मद ने आरोप लगाया कि भाजपा ने वोटिंग पहले सामान बांटा। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर सवाल उठाया और पूछा, ‘‘यह वोट चोरी नहीं, तो क्या है?’’

अरसे बादः बीएमसी में जीते उम्मीदवारों के साथ देवेंद्र फड़नवीस (बीच में)

प्रशासनिक विवादों ने मामले को और उलझा दिया है। मार्कर की स्याही हल्की होने की शिकायतों के बाद राज्य चुनाव आयोग को दखल देना पड़ा, जबकि मुंबई के जुहू और बांद्रा जैसे इलाकों में वोटर लिस्ट से नाम गायब होने, वोटर ऐप्स में तकनीकी खराबी और बूथ पर गड़बड़ी की खबरें सामने आईं।

कुछ वोटरों के आरोप थे कि उनके वोट दूसरे पक्ष की तरफ गए। ये ऐसे दावे हैं, जो साबित तो नहीं हुए लेकिन इनसे लोगों का अविश्वास बढ़ गया है।

कुल मिलाकर, महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव सिर्फ जीत और हार का हिसाब-किताब नहीं दिखाते। बल्कि वे दिखाते हैं कि शहरी राजनीति पर भाजपा की पकड़ बढ़ती जा रही है। बिखरे विपक्ष और क्षेत्रीय पार्टियों के सामने नई राजनैतिक चुनौतियों इस नतीजे को दिखाती हैं। अगर विपक्ष कुछ और एकजुटता से लड़ता तो शायद फर्क दिख सकता था।

अब आप हिंदी आउटलुक अपने मोबाइल पर भी पढ़ सकते हैं। डाउनलोड करें आउटलुक हिंदी एप गूगल प्ले स्टोर या एपल स्टोर से
Advertisement
Advertisement
Advertisement
  Close Ad