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अन्नाद्रमुक के मन में मुस्लिम कैदियों के लिए अचानक प्रेम क्यों? स्टालिन ने कहा- इसी पार्टी ने एनआरसी का आंखें मूंद कर किया था समर्थन

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे मुस्लिम कैदियों के प्रति अखिल...
अन्नाद्रमुक के मन में मुस्लिम कैदियों के लिए अचानक प्रेम क्यों? स्टालिन ने कहा- इसी पार्टी ने एनआरसी का आंखें मूंद कर किया था समर्थन


तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे मुस्लिम कैदियों के प्रति अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के ‘‘अचानक पैदा हुए प्रेम’’ के लिए मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में विपक्षी दल पर निशाना साधा और कहा कि इसी दल ने संशोधित नागरिकता कानून जैसे केंद्र के कदमों का ‘‘आंखें मूंदकर’’ समर्थन किया था।

इस मामले को लेकर विपक्ष के नेता ई के पलानीस्वामी के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक ने सदन से बहिर्गमन कर दिया। मुस्लिम कैदियों की समयपूर्व रिहाई के अनुरोध से संबंधित एक विशेष ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों की समयपूर्व रिहाई के संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार से बताया। पलानीस्वामी ने करीब 20 से 25 साल से जेल में बंद 36 मुस्लिम कैदियों को उनके बुजुर्ग होने और बीमार होने जैसे कारकों के मद्देनजर रिहा किए जाने की अपील की है।

स्टालिन ने कहा कि इस मामले पर गौर करने के लिए सरकार ने 22 दिसंबर, 2021 को मद्रास उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एन ऑथिनाथन के नेतृत्व में छह सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति ने 28 अक्टूबर, 2022 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। उसने आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे 264 कैदियों की रिहाई की सिफारिश की।

स्टालिन ने बताया कि सरकार ने पहले चरण में उचित विचार-विमर्श के बाद आजीवन कारावास की सजा काट रहे 49 कैदियों की फाइल 24 अगस्त, 2023 को राज्यपाल आर एन रवि के पास उनकी मंजूरी के लिए भेजीं। उन्होंने बताया कि इनमें से 20 कैदी मुस्लिम हैं। स्टालिन ने कहा कि राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद सभी कैदियों को रिहा कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उन शेष कैदियों को रिहा करने के लिए भी सरकार आगे कार्रवाई करेगी, जिनकी रिहाई की सिफारिश समिति ने की है।

उन्होंने कहा कि इस साल आठ अक्टूबर तक आजीवन कारावास की सजा काट रहे 335 कैदियों को समय से पहले रिहा किया गया है और उनमें से नौ मुस्लिम कैदी हैं। स्टालिन ने कहा, ‘‘कुछ लोग यह धारणा पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं कि किसी भी मुस्लिम कैदी को रिहा नहीं किया गया और इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।’’ उन्होंने कहा कि सरकार उचित कानूनी कार्रवाई कर रही है।

पलानीस्वामी द्वारा मुस्लिम कैदियों की रिहाई की वकालत किए जाने का जिक्र करते हुए स्टालिन ने सवाल किया कि अन्नाद्रमुक जब 10 साल तक सत्ता में थी, तब उसने इस मामले पर अपनी आंखें क्यों बंद कर ली थीं। मुख्यमंत्री ने पूछा कि अन्नाद्रमुक के शासन (2011-21) के दौरान मुस्लिम कैदियों की समयपूर्व रिहाई को लेकर कुछ क्यों नहीं किया गया, जबकि उसने धर्मपुरी में बस जलाए जाने के मामले में दोषियों को रिहा कर दिया था। स्टालिन ने कहा, ‘‘हम जानते हैं और हम से भी बेहतर तरीके से अल्पसंख्यक समुदाय के भाई और बहन इस बात को जानते’’ हैं कि मुस्लिम कैदियों के लिए अन्नाद्रमुक के ‘‘अचानक पैदा हुए प्रेम’’ का कारण क्या है, जिसने मुस्लिम कैदियों की रिहाई के लिए कोई कदम नहीं उठाया, बल्कि उसने संशोधित नागरिकता कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी संबंधी केंद्र की पहल का ‘‘आँखें मूंद कर’’ समर्थन भी किया।

पलानीस्वामी ने विधानसभा के बाहर संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने अन्नाद्रमुक को भी मिले ज्ञापनों के बाद मुस्लिम कैदियों की रिहाई का सदन में आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री ने अपना जवाब कैदियों की रिहाई के अनुरोध तक ही सीमित रखा होता तो कोई समस्या नहीं होती, लेकिन स्टालिन ने मुसलमानों के लिए अन्नाद्रमुक की चिंता को लेकर सवाल उठाया और उन्होंने पिछली अन्नाद्रमुक सरकार को इस मामले में कुछ भी नहीं करने का आरोपी भी ठहराया।

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