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तुलसी की कथा में सीता संग राम

भरतनाट्‌यम नृत्य की प्रखर नृत्यागंना और गुरु सुश्री सिन्धु मिश्रा की होनहार शिष्या श्रुति वर्मा एक...
तुलसी की कथा में सीता संग राम

भरतनाट्‌यम नृत्य की प्रखर नृत्यागंना और गुरु सुश्री सिन्धु मिश्रा की होनहार शिष्या श्रुति वर्मा एक कुशल नृत्यागंना के रूप में नई दस्तक हैं। इस परंपरागत नृत्य शैली की खूबियों को हासिल करने में उसने पूरी लगन के साथ जो सराहनीय प्रयास किया है उसकी झलक उसके नृत्य प्रदर्शन में दिखाई देती है। 

हाल ही में गुरु सिन्धु की संस्था अयाम द्वारा वैदेही के नाम से एलटीजी सभागार में श्रुति वर्मा के नृत्य की प्रस्तुति हुई। यह गौरतलब और महत्वपूर्ण है कि सिन्धु मिश्रा ने दक्षिण भारतीय भरतनाट्‌यम में उत्तर भारत की काव्य रचनाओं को वरनम और पदम से जोड़कर नृत्य में संरचित करने में जो सार्थक प्रयोग किया है, वह वाकई में चुनौती भरा कार्य है। मंगला चरण के रूप में कार्यक्रम का आरंभ तुलसी भजन - श्री रामचन्द्र कृपालु भजनम की प्रस्तुति से हुआ। राग सिन्धु भैरवी और ताल मिश्र चापू निबद्ध इस भजन को श्रुति ने भक्ति भाव में डूबकर बड़ी रंजकता से नृत्य के जरिए प्रस्तुत किया। 

संत कवि तुलसी दास की कृति रामचरितमानस से उद्धृत सीता-राम मिलन प्रसंग की वरनम में प्रस्तुति बहुत ही कलात्मक और अनोखी थी। सीता स्वयंवर से सभी परिचित हैं। स्वयंवर में सभी प्रत्याशियों के मन में उथल-पुथल सी होने लगी थी वहां राम के पहुंचने से, पर सीता फूली न समायी| स्वयंवर में सीता को पाने के लिए पधारे बलशाली राजाओं के सामने शर्त थी, वहां पर रखे शिव धनुष को उठाने की| पर जब यह करने में वे सब विफल रहे, तब राम ने सहजता से धनुष तोड़‌कर जनक की मनोकामना पूरी की और राम-सीता का विवाह हो गया। इस कथा से जुड़े दृश्यों को श्रुति ने नृत्य और अभिनय के जरिए बड़ी हार्दिकता और मार्मिकता से प्रदर्शित किया।

यह प्रस्तुति राग बागेश्री, तालमालिकों चतुद्र एकम और मिश्र चापू ताल में संरचित थी | संत कवि सूरदास की काव्य रचना “सुनो कवि” की पदम में प्रस्तुति बहुत ही भावाकुल करने वाली थी | राम के विरह में अशोक वाटिका में बैठी सीता को हनुमान जब राम की मुद्रिका देते हैं तो उसे देखकर वे बहुत उल्लासित और भावुक हो जाती हैं पर उनका मन विचलित हो जाता है। कपि से कहती हैं कि राम खुद क्यों नहीं आए और आक्रोश में उलाहना देती हैं कि बड़े-बड़े राक्षसों का वध करने वाले राम क्या यहां आने से डर गए या मेरे विरह में योगी हो गए आदि विचोरों में उलझी सीता की जो दर्द भरी मनोदशा है उसका बहुत ही संवेदनशील भाव श्रुति के अभिनय में अभिव्यक्त हुआ। यह नृत्य संरचना रागम सारंगी और आदिताल में निबद्ध थी। श्रुति वर्मा ने कार्यक्रम का समापन गतशील प्रवाह पूर्ण तिल्लाना की प्रस्तुति से किया| राग भीमपलासी, त्रिपुटा ताल पर आधारित खण्ड जाति में यह खूबसूरत प्रस्तुति थी।

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