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दाल-सब्‍जी-तेल को छोड़ो, मोदी के राज में शिक्षा भी हो गई महंगी

दाल-सब्‍जी-तेल को छोड़ो, मोदी के राज में शिक्षा भी हो गई महंगी

देश में पिछले दो सालों में खाने पीने की चीजों के दामों में बेेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। लोग इसका रोना भी रो रहे हैं। लेकिन रोजमर्रा के उपयोग की इन वस्‍तुओं के दामों में कोई कमी नहीं आई। इन सबके बीच शिक्षा पर भी महंगाई की मार पड़ी है। पिछले दो सालोंं में स्‍कूलों की फीस और शिक्षण सामग्री भी महंगी हुई है।
मोजांबिक के साथ दाल आयात समेत तीन बड़े समझौते

मोजांबिक के साथ दाल आयात समेत तीन बड़े समझौते

चार अफ्रीकी देशों की अपनी यात्रा के पहले चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को मोजांबिक पहुंचे। उन्होंने वहां राष्ट्रपति फिलिप न्यूसी से द्विपक्षीय मामलों पर चर्चा की। दोनों राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी में कई अहम समझौतों पर दस्तखत किए गए। भारत के नजरिए से दालों के आयात को लेकर हुआ समझौता सबसे अहम बताया जा रहा है। मोदी सरकार इसके जरिए देश में दलहन की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने की कोशिश में है। मोजांबिक की राजधानी मैपुटो में बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति न्यूसी और मेरे बीच रक्षा एवं सुरक्षा के मसलों पर आपसी सहयोग को मजबूत करने पर सहमति बनी है। उन्होंने मिले सम्मान के लिए प्रेजिडेंट न्यूसी, सरकार और मोजांबिक के लोगों को धन्यवाद दिया।
भाजपा में दाल गलनी मुश्किल जान कुछ अनोखा करने के फेर में स्वामीप्रसाद मौर्य

भाजपा में दाल गलनी मुश्किल जान कुछ अनोखा करने के फेर में स्वामीप्रसाद मौर्य

बसपा से इस्तीफा देकर अलग हुए उत्तर प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने सपा-भाजपा सहित सभी विकल्प खुले रखे हुए हैं
चर्चाः दाल खट्टी, चीनी कड़वी | आलोक मेहता

चर्चाः दाल खट्टी, चीनी कड़वी | आलोक मेहता

स्वास्‍थ्य गड़बड़ होने पर मुंह का स्वाद बदल जाता है। इसी तरह भारत में मौसम के साथ महंगाई बढ़ने पर आम आदमी के दांत खट्टे भले ही न हों, दाल खट्टी और चीनी कड़वी लगने लगती है। एक तरफ किसानों को अनाज, तिलहन और गन्ने का सही दाम नहीं मिलता और कर्ज से तंग आकर लोग आत्महत्या करते हैं, दूसरी तरफ कालाबाजारी और सूदखोर दलाल एवं व्यापारियों का एक वर्ग मनमाने ढंग से मूल्य वसूलते हैं।
खेसारी दाल पर बड़ा दांव लगा रही केंद्र सरकार

खेसारी दाल पर बड़ा दांव लगा रही केंद्र सरकार

दालों की बढ़ती कीमतों और दलहन आयात पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार खेसारी दाल पर 55 साल पहले लगा प्रतिबंध हटाने की कवायद में जुट गई है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के एक पैनल ने इस दाल को खाने के लिए सुरक्षित बताया है और बारे में अंतिम फैसला खाद्य नियामक एफएसएसएआई को करना है। लेकिन स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़े इस अहम फैसले को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
जब्‍त दाल में से 70% जमाखोरों को ही वापस, आरटीआई का खुलासा

जब्‍त दाल में से 70% जमाखोरों को ही वापस, आरटीआई का खुलासा

देश में दालों की जमाखोरी के खिलाफ हुई सरकार की कार्रवाई में एक नई जानकारी सामने आई है। महाराष्ट्र सरकार ने दालों के जब्त भंडार में से 70 प्रतिशत उनके मूल मालिकों को ही वापस कर दिया।
महाराष्‍ट्र निकला दाल जमाखोरों का गढ़, ठाणे में 125 करोड़ की दाल पकड़ी

महाराष्‍ट्र निकला दाल जमाखोरों का गढ़, ठाणे में 125 करोड़ की दाल पकड़ी

आम आदमी के निवाले से दूर होती दालों के पीछे जमाखोरी और कालाबाजारी का बड़ा खेल है। देश के कई राज्‍यों में हुई छापेमारी के दौरान अब तक महाराष्‍ट्र में सबसे ज्‍यादा दाल पकड़ी गई है।
भाजपा शासित राज्‍यों में दालों की जमकर जमाखोरी

भाजपा शासित राज्‍यों में दालों की जमकर जमाखोरी

दालों की बढ़ती कीमतों के बीच जमाखोरों और कालाबाजारी के खिलाफ राज्‍यों ने अभियान तेज कर दिया है। पिछले दो-तीन दिन के अंदर 10 राज्‍यों में छापेमारी के दौरान करीब 35 हजार टन से ज्‍यादा दाल का स्‍टॉक पकड़ा गया है। सबसे ज्‍यादा छापेमारी भाजपा शासित राज्‍यों में की गई है और यहीं दालों की सबसे ज्‍यादा मात्रा जमाखोरों से जब्‍त की गई है।
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