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इस्राइल: नेतन्याहू की पार्टी सबसे आगे

इस्राइल: नेतन्याहू की पार्टी सबसे आगे

इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी चुनावों में जीत की ओर बढ़ रही है। इस्राइली मीडिया ने 99.5 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने के साथ ही कहा कि लिकुड पार्टी को संसद, नेसेट की 120 सीटों में से 30 सीटें मिली हैं, जबकि इसकी मुख्य विरोधी मध्य-वाम जिओनिस्ट यूनियन एलायंस ने 24 सीटें हासिल की हैं।
विश्व कपः किसे  खिताब दिलाने को है दुनिया बेताब

विश्व कपः किसे खिताब दिलाने को है दुनिया बेताब

भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांज्लादेश के आखिरी दौर तक प्रतियोगिता में बने रहने से बढ़ा क्रिकेट का रोमांच। क्रिकेट पंडित तो यहां तक मानने लगे हैं कि विश्व कप एक बार फिर दक्षिण एशियाई क्षेत्र में ही और विशेषकर भारत में ही रह जाएगा। अब सवाल यह उठता है कि दक्षिण एशियाई देशों को विश्व कप में बनाए रखने की कहीं यह सोची-समझी रणनीति तो नहीं है? बहुत हद तक इस बात की पुष्टि सिडॉन पार्क के क्यूरेटर कार्ल जॉनसन ने यह कहकर कर दी है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की खास हिदायत पर विश्व कप में सपाट पिचें बनाई जा रही हैं।
विश्व कपः श्रीलंका क्वार्टर फाइनल के करीब

विश्व कपः श्रीलंका क्वार्टर फाइनल के करीब

संगकारा ने अपने करिअर का 23वां और सबसे तेज शतक लगाया। उन्होंने अपनी पारी में 86 गेंदें खेलीं तथा 11 चौके और दो छक्के लगाए। संगकारा ने 70 गेंदों में शतक पूरा किया जो श्रीलंका की तरफ से विश्व कप में सबसे तेज शतक भी है। दूसरी तरफ 25 वर्षीय तिरिमाने इस टूर्नामेंट में सैकड़ा जड़ने वाले सबसे कम उम्र के श्रीलंकाई बल्लेबाज बने। उन्होंने 143 गेंदें खेलीं तथा 13 चौके और दो छक्के लगाए।
राहुल का प्रचार अभियान सबसे खराब: पुस्तक

राहुल का प्रचार अभियान सबसे खराब: पुस्तक

सांघवी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक रहस्य करार दिया है। लेखक ने लिखा है, वह बेहद निजी जीवन से निकलकर कांग्रेस को उबारने के लिए आई थीं और दो चुनावों, 2004 एवं 2009, में कांग्रेस की जीत की अगुवाई की। जब यह सब कुछ हो रहा था तो वह कहां थीं? उनका राजनीतिक सहज ज्ञान कहां था? क्या उन्हें यह नहीं दिख रहा था कि कांग्रेस विनाश की ओर बढ़ रही है ? लेखक कहते हैं, इन सवालों का जवाब वास्तव में कोई नहीं जानता है।
बदली दुनिया सारी ना बदला हिंदुस्तानी

बदली दुनिया सारी ना बदला हिंदुस्तानी

सन 2002 में कौन कल्पना कर सकता था कि अमेरिका में एक अश्वेत नेता राष्ट्रपति बन सकेगा? भारत में किसने सोचा होगा कि गुजरात के घृणित दंगों की पृष्ठïभूमि के बावजूद प्रदेश के नवोदित नेता नरेंद्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बन सकते हैं?
सत्ता के ऊपर ज्ञान, व्यक्तियों के ऊपर विवेक

सत्ता के ऊपर ज्ञान, व्यक्तियों के ऊपर विवेक

चुनिंदा नायकों या खलनायकों की भूमिका पर जरूरत से ज्यादा जोर देने के कारण इतिहास का सम्यक विवेचन नहीं हो पाता। जैसे गांधी, नेहरू, पटेल, जिन्ना और माउंटबेटन पर ज्यादा जोर देने से हमें भारत विभाजन के बारे में कई जरूरी प्रश्‍नों के उत्तर नहीं मिलते। मसलन, देसी मुहावरे में आम जनता को अपनी बात समझाने में माहिर और उनमें आजादी के लिए माद्दा जगाने वाले गांधी अपने तमाम सद्प्रयासों के बावजूद नाजुक ऐतिहासिक मौके पर आम हिंदू-मुसलमान को एक-दूसरे के प्रति सांप्रदायिक दरार से बचने की बात समझाने में क्यों विफल रहे, नोआखली जैसी अपनी साक्षात उपस्थिति वाली जगह को छोडक़र? जिन्ना की महत्वकांक्षा और जिद को कितना भी दोष दें, कलकत्ता और अन्य जगहों का आम मुसलमान क्यों उनके उकसावे पर पाकिस्तान हासिल करने के लिए खून-खराबे पर उतारू हो गया?
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