रोमांचपसंद डेवरेला मर्फी ने सन 1965 में साइकिल पर आयरलैंड से भारत की यात्रा की थी। इसी यात्रा के अनुभव को उन्होंने अपनी पुस्तक ‘फुल टिल्ट’ में लिखा है।
भूकंप प्रभावित नेपाल में व्यापक राहत अभियान मैत्री चलाने वाले भारत ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि वह पड़ोसी देश के पुर्नवास और पुर्ननिर्माण में भी सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अमेरिका में भारत के नए राजदूत अरूण कुमार सिंह ने अपने दस्तावेजों की प्रतियां विदेश मंत्रालय के चीफ ऑफ प्रोटोकॉल के कार्यालय में पेश करने के बाद औपचारिक तौर पर अपना पदभार संभाल लिया।
कष्ट में पड़े लोग सरल हृदय करुणा के स्पर्श की सांत्वना के भूखे होते हैं। आत्मरत चतुराई उनके जले पर नमक छिडक़ती है। यह बात मोदी सरकार के चालाक मीडिया प्रबंधक नहीं समझ पाए। वे यह भी भूल गए कि भारतीय टेलीविजन, खासकर हिंदी टेलविजन, नेपाल के लोग भी देखते और समझते हैं।
भूकंप प्रभावित नेपाल को मंगवार को फिर से रिक्टर स्केल पर 4.0 तीव्रता वाले भूकंप ने हिला दिया। वहीं 25 अप्रैल को आए घातक भूकंप में मरने वालों की संख्या 7,500 के पार हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 मई से 16 मई की अपनी आगामी चीन यात्रा की आधिकारिक घोषणा मंगलवार को माइक्रोब्लॉग साइट वेइबो पर की है। मोदी ने लिख है कि वह चीनी नेतृत्व के साथ सार्थक चर्चा के लिए उत्साहित हैं।
नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप में मरे 530 से ज्यादा लोगों का यहां के पशुपतिनाथ मंदिर के घाटों पर अंतिम संस्कार किया गया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप में मारे गए 57 विदेशियों में से 41 लोग भारतीय हैं। इमारतों को जमींदोज और बिजली के खंभों व पेड़ों को जड़ों से उखाड़ फेंकने वाला यह भीषण भूकंप अपने पीछे तबाही और दर्द का एक भयावाह मंजर छोड़ गया है। नेपाल पुलिस द्वारा जारी बयान के अनुसार, भूकंप में मरने वाले भारतीयों की संख्या 41 हो चुकी है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को नेपाल नहीं दिए जाने से उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड के नेता इसके लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं। जद यू नेताओं ने कहा कि नीतीश कुमार नेपाल में भूकंप पीड़ितों के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों का जायजा लेने जा रहे थे तो केंद्र सरकार ने रोक दिया। जद यू नेताओं से इसे राजनीति से प्रेरित बताया।
नेपाल में भारतीय मीडिया के खिलाफ आक्रोश तेजी से फैलता जा रहा है। नेपाल में आए भीषण भूकंप के बाद वहां पर कवरेज के लिए गए भारतीय मीडिया के रवैये ने एक बड़े हिस्से को बेहद नाराज किया है। यह नाराजगी बाकायदा ट्विटर पर एक अभियान के रूप में सामने आई जिसके तहत एक अकाउंट खोला गया-गो बैक इंडियन मीडिया-और यह कुछ ही घंटों में वायरल हो गया।